प्रेस स्वतन्त्रता उपयोग करे सके मे आशंका बा :- अध्यक्ष आचार्य

बुटवल ५ चईत,

नेपाल पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष गोविन्द आचार्य प्रेस स्वतन्त्रता, लोकतन्त्र आ संघीयता उपर अभी भी आशंका रहल बतवले बाडन ।
बुटवल मे आजु आयोजना कईल कार्जक्रम मे उ तीनु तह के सरकार प्रेस स्वतन्त्रता मे अंकुश लगावे मे उद्दत रहल बतवनी ।

‘लोकतन्त्र, प्रेस स्वतन्त्रता साँचोके प्रयोग करे मिली कि ना कहके गम्भीर आशंकासब उत्पन्न भईल बा’ कहत आचार्य, ‘संघीयता भी ठीक तरिका से कार्यान्वयन भईल नइखे, केन्द्र प्रदेश आ स्थानीय तह के अधिकार देवे नइखन चहले ।’

उ प्रेस के भजनमण्डली बनावे के खोजल आरोप लगवनी । ‘संविधान के प्रस्तावना मे पूर्ण प्रेस स्वतन्त्रता लिखल पर भी कानूनसब स्वतन्त्र प्रेस के नियन्त्रण करेके, सरकार के आलोचना करेमे रोकेके आ भजनमण्डली बनावे के खोजल गईल बा’ कहत आचार्य–‘मिडिया काउन्सिल विधेयक आ सूचना प्रविधि विधेयक ओकर उदाहरण ह ।’

सरकार के आलोचना करेवाला पत्रकार के ५ बरीस जेल आ १५ लाख से एक करोड तक जरिवाना करेवाला किसिम से प्रदेश सरकारसब विधेयक लियावल अध्यक्ष आचार्य स्मरण कइनी ।

सरकार आ राजनीतिक दलसब आलोचना सुने ना चाहेके, इमान्दार से गुट के आदमी के अवसर देरहल उल्लेख करत आचार्य पत्रकार से स्वतन्त्रतापूर्वक समाचार लिखेके आ आपन विचार अभिव्यक्त करेके वातावरण ना रहल बतवनी ।

आचार्य पत्रकार महासंघ चनाखो ना भईला पर तीनु तह के सरकार कानून बना के प्रेस स्वतन्त्रता कुण्ठित करेके खतरा रहल बतवनी ।

बहुमत के सरकार स्थायित्व भईल कहके लागला पर भी दलसब भितर निरंकुशता, गुट उपगुट के लडाई आ फरक विचार राखेवाला के निशेष करेके परिपाटी से लोकतन्त्र उपर हि आशंका पैदा कईल आचार्य बतवनी ।
सञ्चार क्षेत्र मे त संघीयता मुताविक के अधिकार आउर आवे ना सकल बतवनी । बेर बेर ध्यानाकर्षण करईला पर भी समानुपातिक विज्ञापन नीति कार्यान्वयन करे खातिर सरकार आनाकानी कईल अध्यक्ष आचार्य बतवनी ।

पत्रकारिता क्षेत्र मे कुछ नकारात्मक पक्ष आ पत्रकारिता के आवरण मे अपराध कर्म भी रहल स्वीकारत अध्यक्ष आचार्य ओइसन पक्ष के निर्ममतापूर्वक कारवाही करेके बात मे जोड देहनी ।
‘पत्रकारिता के आवरण मे गलत करेवाला के महासंघ कभो संरक्षण ना करी’ कहत उ, ‘माकिर अपवाद के समस्या के देखा के पुरे प्रेस स्वतन्त्रता उपर अंकुश लगावेके काम स्वीकार्य ना होखी ।’

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