अब जनयुद्ध के नक्कल करके विद्रोह असम्भव :- अध्यक्ष दाहाल

काठमाण्डु १ फागुन,

सत्तारुढ नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ जनयुद्ध आ जनआन्दोलन के बल मे शान्ति प्रक्रिया होत समाजवाद के आधार निर्माण ओरी देश अगाडि बढला से अब जनयुद्ध के नक्कल करके विद्रोह सम्भव ना होखेके बतवले बानी ।

नेकपा केन्द्रीय कार्यालय धुम्रबाराही मे ‘जनआन्दोलन आ जनयुद्ध के शहीद के स्मृति मे आजु आयोजना कईल श्रद्धाञ्जलिसभा’ मे अध्यक्ष दाहाल जनयुद्ध आ विद्रोह एक ऐतिहासिक तथा विशिष्ट परिस्थिति मे जनता के जरुरत आ नेतृत्व के सही विचार के आधार मे होखेवाला भईला से अब जनयुद्ध के नक्कल होखे ना सकेके स्पष्ट कईले बानी ।

नेत्रविक्रम चन्द ‘विप्लव’ समूह के सङ्केत करत उ कहनी कि, “एकथरि साथीलोग फेनु विद्रोह ओरी लागल बानी, माकिर हमनी सभी परिस्थिति आ विश्व अनुभव के समीक्षा करके शान्ति प्रक्रिया मे आके मौलिक तरिका के जनवादी क्रान्ति मे सामेल भईल बानी, जनयुद्ध के निरन्तरता देहला पर भी हमनी पेरु भा श्रीलङ्का के विद्रोह जइसन सकल रहनी, हमनी कम्युनिष्टलोग बीच के सहकार्य सहित बुर्जुवा के साथ लेके गणतन्त्र स्थापना कईले बानी ।”

तत्कालीन नेकपा (माओवादी) विसं २०५२ फागुन १ गते गणतन्त्र स्थापना के लक्ष्य सहित जनयुुद्ध के आरम्भ कईले रहे । विश्व कम्युनिष्ट आन्दोलन के उपलब्धि आ क्षति के अनुभव के बारे मे चर्चा करत उ क्रान्ति कउनो आयात भा निर्यात करेके विषय ना भईला से एकरा के हरेक देश के ऐतिहासिक जरुरत आ मौलिकता के आधार मे देखे खातिर निहोरा कइनी ।
अध्यक्ष दाहाल कम्युनिष्टलोग सत्ता मे पुगला के बाद विचलन होखेवाला बेमारी से उपर उठ के जनता के मनोभावना के आत्मसात् करत त्याग, समर्पण आ बलिदान के भावना के साथ शान्तिपूर्ण सङ्घर्ष, विकास आ समृद्धि से वैज्ञानिक समाजवाद के रास्ता मे अगाडि बढे खातिर नेता–कार्यकर्ता के निहोरा कइनी ।

उ सात राजनीति दल सँगे १२ बुँदे सहमति होखे से पहिले तत्कालीन नेकपा (एमाले) के नेता वामदेव गौतम लगायत सँगे संविधानसभा के खातिर सहमति भईल स्मरण करत उ शान्तिपूर्ण जनआन्दोलन मे रहल नेपाली काँग्रेस के तत्कालीन सभापति गिरिजाप्रसाद कोइराला भी राजतन्त्र विरुद्ध आउर फौजी आक्रमण बढावे खातिर खुद के निहोरा कईल स्मरण कइनी ।

तत्कालीन एमाले आ माओवादी जनयुद्ध के शुरुआती बरीस मे तीखो सङ्घर्ष मे रहला पर भी पिछिलका समय मे कम्युनिष्ट शक्ति बीच के सहकार्य के जोड देवेके माओवादी के निर्णय के पृष्ठभूमि मे अभी नेकपा के एकता भईल उल्लेख करत उ विसं २०२९ के झापा विद्रोह (सुखानीका शहीद) आ जनयुद्ध के शहीद तक के जोड के नेतृत्व से सही विचार आ सोच के साथ देश के सही गन्तव्य मे पुगावे के दृढता भी जनवनी ।

नेकपा के उपाध्यक्ष वामदेव गौतम नेपाल के जनयुद्ध के घटना विश्व इतिहास मे कमे होखेके ऐतिहासक घटना भईल जनावत जनयुद्ध आ जनआन्दोलन से सामन्तवाद के परास्त कईल आ साम्रज्यवाद के कमजोर बनावे के उल्लेख कइनी । उ कहनी कि, “जनयुद्ध बलिदान के युद्ध ह, मुक्ति आ सङ्घर्ष के युद्ध ह, एतना बडका बलिदान संसार के इतिहास मे भईल ना रहे, उ शहीदसब के सम्मान करत अब हमनी बहुदलीय प्रतिस्पर्धा के आधार मे समाजवाद स्थापना मे लागेके पडि ।”

उपाध्यक्ष गौतम जनयुद्ध के समय मे तत्कालीन एमाले के करीब ३०० नेता–कार्यकर्ता मरईला मे ओकर लेखाजोखा भी होखेके बतवनी । कार्जक्रम मे शहीदलोग उपर श्रद्धाञ्जलि व्यक्त कईल गईल रहे । तत्कालीन एमाले आ माओवादी केन्द्रबीच बितल २०७५ जेठ ३ गते एकता भईला के बाद हरेक फागुन १ के ‘जनआन्दोलन आ जनयुद्ध के शहीद के स्मृति मे आजु आयोजना कईल श्रद्धाञ्जलिसभा’ के रुप मे मनावे लागल बा ।

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