प्रदेश नं. २ के नाम रखाए ना सकल, “मधेस” भी अस्वीकृत

जनकपुर ४ चईत,

प्रदेश नम्बर २ के नाम मधेस प्रदेश राखेके प्रस्ताव भी बहुमत से अस्वीकृत भईल बा । मंगर के दिने प्रदेशसभा मे भईल निर्वाचन मे चउथका प्रस्ताव के रुप मे अगाडि बढावल “मधेस प्रदेश” भी अस्वीकृत भईल बा ।

प्रदेश २ के सत्तारुढ राजपा आ समाजवादी से अगाडि बढावल “मधेस प्रदेश” उपर भईल मतदान के पक्ष मे ६० आ विपक्ष मे ४६ मत पडल बा । एक मत बदर भईल बा ।

एकरा से पहिले प्रदेश २ के प्रदेशसभा मे नेपाली कांग्रेस के सांसद् राजेश्वरप्रसाद साह से अगाडि बढावल “मध्य मधेस”, कांग्रेस से प्रस्ताव कईल “मिथिला भोजपुरा”, सत्तारुढ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) से प्रस्ताव कईल “जानकी” भी अस्वीकृत भईल बा ।

कांग्रेस सांसद साह से प्रस्तुत कईल मध्य मधेस के पक्ष मे ४२ मत पडल रहे । कांग्रेस से अगाडि बढावल मिथिला भोजपुरा प्रस्ताव के पक्ष मे २८ मत पडल रहे आ नेकपा के प्रस्ताव मे ३७ मत पडल रहे । चार गो प्रस्ताव अस्वीकृत भईला के बाद प्रदेश २ के नामाकरण मे फेनु विवाद बढेके देखल गईल बा ।
प्रदेशसभा के पहिलका बईठक बईठेके २५ महिना के बाद नाम आ राजधानी टुंग्यावे खातिर प्रदेशसभा मे मंगर के दिने मतदान भईल रहे ।

कार्यव्यवस्था परामर्श समिति के बईठक मे अभी राजधानी आ बाद मे नाम के प्रस्ताव पेश करेके सहमति भईल रहे । राजधानी जनकपुर कायम करेके प्रस्ताव मे नेकपा, राजपा, समाजवादी आ कांग्रेस के एगो प्रस्ताव अगाडि बढवले रहे । यद्यपि प्रदेश के नाम मे बहुमत प्राप्त ना भईला के बाद राजधानी के विषय मे भी विवाद होखेवाला बा ।

प्रदेश २ के प्रदेशसभा मे १०७ सांसद बाडन । प्रदेशसभा से प्रस्ताव पारित होखे खातिर कम्ती मे दु तिहाई अर्थात् ७२ प्रदेशसभा सदस्य के समर्थन जरुरी पडि । सरकार के नेतृत्व कईल समाजवादी पार्टी के ३०, राजपा २५, नेकपा ३२, कांग्रेस के १९, संघीय समाजवादी के १ सिट बा ।

नाम आ राजधानी प्रदेशसभा के दु तिहाई बहुमत से पारित करेके संवैधानिक व्यवस्था बा ।

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