कोरोना से डेराइ मत, भगावे मे जुटी

बिश्वमे एक बिकराल के रुप मे बढरहल एक किसिम के किटानु बाटे । हरेक देश मे बहुत तेज से बढला के कारण से बिश्व के मानव जाति उपर पानी फेरदेहल गइल बाटे ।
बिश्व मे करिब करिब एक लाख तक के जान लेचुकल जान लेवा किटानु बाटे । हरेक देश के होश हवास उडा देहला के कारण से ध्ज्इ सयुक्त रुप मे सुचना जारि कइले बाटे कि सम्पूर्ण देश मिल के एकर दवाइ पत्ता लगावे के परि ।
बिश्व मे ई रोग महामारी रुप मे भइला के बजह से आम जनता मे नेपाल सरकार भा भरतीय सरकार सामाजिक दुरी रखला मे हि सबसे बडका दवाइके रुप मे देखल गइला से हरेक नागरिक के नैतिकता बनता कि सहि मे सामाजिक दुरी रखला मे ठिक रहि ।
वास्तव मे ई रोग हरेक बिकसित देश सभन के डाढ सेकुवा जइसन सेकदेहल गइल बा । जब कि हरेक क्षेत्रमे उ देश सभन अगाडि बाटे ।
बिकासनोमुख देश के बाटे त बात ना कइला मे हि उत्तम रहि । कोरोना भााासइरइहुवाङग शहर से एक बादुर के शरीर से उत्पादन भइल ई अपने आप मे महा शक्तिशाली के रुप भाइरस जनम भइल कहल जात बा, जउन अभी तक आधिकारीक प्रमाण नइखे मिलल ।
ई अइसन प्रकार के किटानु बाटे कि जवन बाताबरण मे जाता उहीँ वातावरण मे मिल जाता जवना बजह से एकर लक्षण पत्ता करेमे बहुत दिकत होरहल बाटे । माकिर कुछ आठ किसिम के लक्षण पत्ता लागल त बा लेकिन एके एक ठोस भा निश्चित रूप मे कवानो नइखे कह सकल जात ।
ओहि से ई रोग से हरेक देश समुदाय मे चिन्ता के बिषय बन चुकल बाटे । कोरोना भाइरस अपन रुप जवन भि जगह ठाँव मे भि परिवर्तन होसकता । ई भाइरस के कवनो देश मे दवाई ना पता लगला के कारण से आउर डर त्रास आम सामाज मे छागइल बा ।
नेपाल सरकार एक ठिक समय पर लकडाउन लगइला पर नेपाल एगो बिश्वब्यापी रुपमे सुरक्षित ढाल ओढले बा । जदि नेपाल मे अइसन रोग भइला पर नेपाल सरकार कवनो भि हालत मे ना रोक सकता ।
नेपाल सरकार लाचार भि बनसकता । ओहि से नेपाल सरकार के द्धारा निहोरा कइल गइल आम नेपाली जनता से कि अपने सभन सामाजिक दुरी बनाके रहला मे हि अच्छा रहि कहे सुचना कइल गइल बा ।
लेकिन कुछ सामाज के कुपातर लोग सभन बा कि सामाजिक दुरी ना बना के अपन सान देखावे के खतिरा घर से बाहर आरहल लोग उ लोग सामाज के एगो बडका दुशमन आउर ओके देश द्रोही के रुप मे घोषणा कर के मुदा चलावल एक दम सहि रहि । ओ लोग सभन के सामाजिक बहिसकार कइल जरुरी बाटे ।
जदि एक जने एकर चपेटा मे परगइल त जानि कि नेपाल सखाप होजाई ।
ओहिसे हम व्यक्तिगत रउवा सभन से निहोरा कइल जाता कि घर से बाहर मत निकली लोग । कुछ समस्या आम जनता के उपर परल गरिब जनता से लेके बिद्यार्थी, ब्यापारी, सरकारी कामकाज, किसान सभन के खाद्य नइखे मिलत ।
लेकिन का करब ई महामारी से बचे खतिरा कुछ कष्ट उठावे के परी । कहल जाला कि जान रहि त जहान रहि । जब जाने न रहि तब का रहि । ई अन्धाकार होजाई ओहि से समहर के रहि । अपने बँची आ दुसरा के बचाई इहे मे सभ के भलाइ रहि ।
अपन जहान त देश जहान रहि । इ बिकराल समस्या के दवाइ एगो हि बा लकडाउन । कोरोना भाइरस के दोसर रुप मे कोभिनड १९ नमाकरण कइल गइल बाटे । लगभग चार लाख से जादे लोग एकर चपेटा मे पर चुकल बाटे ।
वास्तव मे ए प्रती हरेक नागरिक के कर्तव्य बाटे कि सरकारके पलना करे के । ई रोग पूरा मानव के माथ के बोझ बन चुकल बाटे । जइसे कुछ देश के नाम अइसन बा । स्पेन, इटली, अमेरिका अइसन देश मे सुरु मे लकडाउन ना कइला के परिणाम भोग रहल बा ।
ई आलेख तइयार करे तक स्पेन मे १५ आ इटली मे १६ आ अमेरिक मे १७ हजार तक के मृत्यु हो चुकल बाटे । अभि भि केतना के जान लि कवनो ठेकान नइखे । नेपाल सरकार से निहोरा बा कि जे इ सँकट के समय मे कला बजारी कररहल बा ओके हद से जदा करवाहि करी कि आउर पूरा सम्पति जफत कर के गरिब जनता के बाट देहला मे ठिक रही ।
ओकरा साथे जेल मे राखल भि ठिक रहि । ओतनाहि ना देश के उच्च ओहदा पर रह के भ्रष्टाचार करे बाला के ओसे जादे सजाय देहल एक सशक्त जरुरी बाटे ।
देश के दिन रात खट के सेवा करहल पुलिस, सेना, डाक्टर सभन के सेवा, उतसाह बढावल एक दम जरुरी बाटे । बिश्व भर मे जवन टाँग पसार के बईठ रहल के आम मानव से लेके उच्च ओहदा तक के लोग सभन सामाजिक दुरी राख के भा लक डाउन ओके अङ्ग्रेजी मे कहल जाला ।
ओसन के होम सटेय के मतलब घर मे बईठे के कहल जाला । एकर ई हे एगो दवा बा कोरोना रोग के हरावे के तरिका । दुसरा नयाँ लोग होखो चाहे, अपन कुटुम काहे ना होखे दुर से प्रणाम करीं, हाथ साबुन से मल मल के धोइ, मुह भि धोइ , मास्क प्रयोग करी, समूह मे बईठेके कोशिस मत करीं, अपन बाल बच्चा के घर मे सम्हार के राखीं, सान देखावे के भुल मत करी । सेनटाइजर के प्रयोग करी, पानी धिका के पिये के कोशिस करि ।
हरेक पल मे सावधानी अपनावल जरुरी बाटे । अभि तक एकर रोग के दवा ना पत्ता लगला पर कुछ बडका समस्य होसकता भा होचुकल बाटे । मानव शरीर हि बडका धन बा भा स्वास्थ हि धन बा ।
हमनी के अपन शरीर उपर धयान दे के अपने बचि भा दोसर के भि बचावे के कोशिस करीं, ई रोग से डरे के नइखे, होम सटय छोडे के नइखे । तवहि जाके इ बिरामी से बच सकतानी आउर बचा सकतानी ।
अपने बचम त राष्ट्र बँची त अपन नाम रही । अपन नाम रहि त धर्म संस्कृत भि रहि । अपन मान सम्मान रहि त बिहान के भेला अपन देह आउर देश के बिकास होइ त अपन सनतान होइ त देश के नाम चलाइ ।
ओहि से आजु से हि अपन मनावता के परिचय दि काहे कि रोग कवनो धर्म ना देखेला, जात पात ना देखेला, धनी गरिब ना देखेला, ई सब के समान रुप से सतावेला जान लेवेला, दुख देवेला ।
हमनी के कभि अन्ध बिश्वास पर बिश्वास एक दम गलत बाटे ओहि से मानव के सेवा कइल सब से उचित बाटे । मानव सेवा हि धर्म बाटे । जे अभि दुखदायी से जुध रहल बाटे ओके बरु राहत दि, सेवा के मौका लेहल एक दम सुन मे सुगन्ध होखि ।
बिश्व जवन अवस्था से लड रहल बा ओ अवस्था मे आम जनता से लेके हरेक देश के जनता ओतनाहि अधिकार के चपेटा मे परल बा । ई महामारी रोग के भगावे खतिरा बिश्व भर के जनता सभन के एक जुट हो के निराकरण ओर जाएके जरुरी बाटे ।
देश के अपन जोगावे खतिरा खुद अपने आप के नियम के पालना कइल जरुरी बा ।
कुछ ई अइसन लक्षण सभन अइसन बाटे नटि सुखि, बोखार लागि, साँस लेवे मे दिकत होई, कमजोरी महशुस होखि, शिर दुखाइ जइसन लक्षण देखला पर तुरुन्त स्वास्थ चौकी मे जाके जाँच करावाइ भा इ रोग के डर से बँचि आउर मन के सँका हटावे साथे मानव जात के सभयता झलकाइ इहे मे आम मानव सभन के कलयाण बा ।






