अस्पताल मे ईद मनवले कोरोना संक्रमित

वीरगंज १२ जेठ

वीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल मे ईलाज करा रहल कोरोना संक्रमित ४० बरीस के अदाफ आ १६ बरीस के सफिक (दुनु जने के नाम परिवर्तन) सोमार के दिने सबेरे उठलें ।

दुनु जने पालहा से नहाधोवा के सबेरे के नित्यकर्म कईलें । ओकार बाद दुनु जने आइसोलेसन वार्ड के जमिन सफा करके रुमाल बिछवलें ।

ओकराबाद अल्लाह (भगवान) के नाम मे दुनु जने नमाज (प्रार्थना) पढल सुरु कईलन । अईसन कर रहला पर अस्पताल के बेड मे रहल आउर संक्रमित उलोग के क्रियाकलाप देखत रहलन ।

वीरगंज–३ छपकैया के अदाफ आ रफिक नमाज पढला के बाद मुस्लिम समुदाय के मुख्य पर्व इदुलफित्र (ईद) के अवसर मे एक आपस मे शुभकामना देहले । ओकरा बाद मात्र जानकारी भईल आउर संक्रमित के भी आजु ईद पर्व बा कहके ।

हरेक बरीस परिवार के साथ मे ईद मनावत आईल दुनु जने ई बेर अस्पताल मे मनवले बाडन ।

ईद पर्व मे नयाँ कपडा पहिरेके प्रचलन रहला पर भी ई बेर उलोग पुराने पहिरन मे ईद मनवले बाडन ।

लकडाउन के चलते परिवार के सदस्यलोग भी ई बेर नयाँ पकडा पहिरे ना मिलल उलोग बतवले बाडन ।

ईद के अवसर मे अस्पताल सेवइ के व्यवस्था करत बा कहके जानकारी मिलल अदाफ कहनी।

आजु के दिन मासु, खिर, मिष्ठान्न लगायत के परिकार खाए खियावे के चलन रहला पर भी ई बेर ओकरा से वञ्चित होखेके पडल उ बतवनी ।

अदाफ कहनी, “इस्लाम समुदाय के मुख्य धार्मिक ग्रन्थ कुरान मोल्वी (धर्मगुरु) से वाचन करके सदविचार आ सत्कर्म मे रहे खातिर प्रेरित करेलन ।

मस्जिद मे सभी पुरुष भेला होके सामूहिक नमाज पढेके परम्परा बा । मा

ई बेर कोरोना संक्रमण के जोखिम के चलते घर मे रहके सभी से ईद मना रहल बाडन कहके अस्पताल से जानकराी मिलल बा ।”

उ कहनी कि, “सबेरे घर मे फुन करके परिवार के सदस्य के सम्झवले बानी ।

घर मे जउन बा ओकरा के बना के खाएके आ ईद मनावे के ।

बाहर ना निकले खातिर कहले बानी । कोरोना के हम जित के आएम हमर चिन्ता लेवेके ना पडि ।

दोसर बरीस सँगे ईद मनावल जाई कहले बानी ।

माकिर घर के मुली भईला से परिवार के सदस्य कईस पर्व मना रहल बाडन कहके चिन्ता बढल बा ।”

खुद पहिलका बेर के ईद भी परिवार सँगे रहके मनावे के ना मिलल स्मरण करवनी ।

“पिछिलका बरीस बाबु बेमार भईला के चलते भारत के एक अस्पताल मे ईद मनवले रहे ।

माकिर ई बेर खुदे बेमार होके अस्पताल मे ईद मनावेके पडल बा,” अदाफ कहनी ।

१६ बरीस के सफिक कहनी कि, माई बाबु सँगे पहिलका बेर दुर रहके ईद मनईला पर बेसी दुःखी बानी कहनी ।

उ “घर मे परिवार के सदस्य, साथीभाइ सँग रहके मनइला के अलगे मज्जा रहे ।

नयाँ कपडा पहिरेके, सेवई, मिस्ठान्न, मासु लगायत के परिकार खाईल जात रहे ।

साथीभाइ सँगे गले मिला के शुभकामना दिआत रहे ।

माकिर ई बेर अस्पताल मे परिवार, आफन्त तथा साथीभाइ सँगे दुर रहके मनावेके पडल बा ।

ना मिलल लागत बा” कहके बतवनी । उलथा अनलाईन

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