पईसा से ना निष्ठा से जितल जाला निर्वाचन’ : प्रमुख निर्वाचन आयुक्त थपलिया

काठमाण्डु १२ सावन
प्रमुख निर्वाचन आयुक्त दिनेशकुमार थपलिया अब के निर्वाचन प्रणाली कईसन होखेके चाहिं कहके नीति अध्ययन प्रतिष्ठान से गृहकार्य अगाडि बढावल जानकारी देहले बानी ।
प्रतिनिधिसभा, राज्यव्यवस्था तथा सुशासन समिति मे निर्वाचन आयोग के कार्यप्रगति सम्बन्धी वार्षिक प्रतिवेदन उपर के छलफल मे उ प्रणाली बदलेके मात्र ना होके अभ्यास मे रहल निर्वाचन प्रणाली के कईसे मितव्ययी बनावे के कहके गृहकार्य करेके बतवनी ।
बईठक मे सदस्यलोग बहुते महँगा वर्तमान निर्वाचन प्रणाली से लोकतन्त्र आ राजनीतिक मूल्य मान्यता मे असर परेके देखल गईला से विकल्प के खातिर छलफल चलावेके सुझाव देहले रहनी ।
आयोग छिटा के रहल निर्वाचन सम्बन्धी कानून के एकीकृत करेके तथा निर्वाचन आचारसंहिता के वस्तुनिष्ठ आ व्यावहारिक बनावे खातिर राजनीतिक दल से छलफल के तइयारी हो रहल जानकारी देहले बा ।
आचारसंहिता विपरित निर्वाचन के मौन समय मे सबसे बेसी प्रचारप्रसार आ आर्थिक चलखेल होरहला से ई समय मे सामाजिक सञ्जाल लगायत के प्रयोग करके होखेवाला प्रचार के रोके खातिर प्रभावकारी संयन्त्र जरुरी रहल बारेमे आयोग समिति के ध्यानाकर्षण करवलख ।
निर्वाचन पईसा से ना निष्ठा से जितल जाला कहके मान्यता अगाडि बढावत आयोग निर्वाचन के कम खर्चिलो बनावे खातिर मतदानस्थल मे मतगणना करेके व्यवस्था व्यावहारिक होखेके सुझाव देहलख ।
एकरा से पहिले बईठक मे सदस्यलोग आयोग के स्वतन्त्र आ सार्वभौमरूप मे काम करे खातिर स्वचालित आवधिक निर्वाचन के मिति घोषणा करेके अधिकार देवेके तथा निर्वाचन के कम खर्चिलो बनावे खातिर अभी के निर्वाचन प्रणाली के विकल्प खोजल जरुरी रहल बिचार रखनी ।
कउनो भी राजनीतिक दल कानून से उपर ना होखेलन कहत सदस्यलोग भ्रष्टाचार बढावे के वर्तमान खराब निर्वाचन प्रणाली मे सुधार के गुञ्जायस बा कि कहके सवाल रखनी ।
कुछ सांसदलोग देश मे निष्ठा के राजनीति भुलात गईल कहत पईसा आ दल के नेतृत्व सँगे के पहुँच के आधार मे अवसर प्राप्त करेके प्रवृत्ति बढला से ओईसन विसङ्गति हटावे खातिर निर्वाचन प्रणाली मे सुधार के जरुरत रहल बतवनी ।
सांसद लालबाबु पण्डित कहनी कि, “निर्वाचन आयोग सिकुडल बा, राजनीतिक दल छाडा भईल बाडन, कानून से उपर केहु नइखे, सभी के कानून से बान्हेके पडि, चुवाव हारला के बाद आउर उपरला पद मे पुगावे के प्रवृत्ति से कहाँ लोकतन्त्र फस्टाई ।”
सदस्य यशोदा सुवेदी मिश्रित निर्वाचन प्रणाली बडका नेता आ पहुँचवाला से मात्र अवसर प्राप्त करेके देखल गईल बतवनी । उ कहनी कि, “निर्वाचन प्रणाली बदलेके पडि, नीति से नियत खराब देखल गईल बा, एमे सुधार लियावे के पडि ।”
सांसद दिलेन्द्रप्रसाद बडू निर्वाचन प्रणाली सुधार के खातिर दलीय सहमति जरुरी रहल तथा निर्वाचन के खर्च ना बुझावेवाला राजनीतिक दल आ उम्मेदवार के नाम सार्वजनिक करे खातिर आयोग के सुझाव देहनी ।
सदस्य पम्फा भुषाल राजनीतिक दल के केतना लोकतान्त्रिक कईल जाज सकता कहके उदाहरण के रूप मे निर्वाचन प्रणाली जुडल बतावत ‘जनानी कहल समानुपातिक आ समानुपातिक कहल जनानी’ जईसन बनल निर्वाचन प्राणाली मे सुधार के जरुरी रहल बतवनी ।
सांसद छक्कबहादुर लामा उत्कृष्ट संविधान आ कमजोर अर्थव्यवस्था से देश मे अनेको समस्या देखल गईला से सांसद मन्त्री होखेके व्यवस्था मे हि सुधार जरुरी बा कहनी ।






