डिजे बाजा के चलते भोजपुरी के लोक भाका मे गावल जाएवाला बियाह गीत लोप हो रहल

मेघराज राय

जिराभवानी १८ फागुन

बैशाख आ असार महिना के बियाह लगन महिना के रुप मे लेहल जाला । सब से उपयुक्त मानल गईल फागुन मे सबसे बेसी बियाह होखेला । दहेज सँगे तडकभडक आ बेसी आवाज मे बजावेवाला डिजे बाजा बजावेके फैसन हि भईल बा ।

डिजे के कडा आवाज स्वास्थ्य आ वातावरण मे नाकारात्मक असर पर रहला से एकरा के बन्द करेके आवाज उठे लागल बा । भारत के विहार से आईल डिजे विकृति अब हद पार कईले बा । एकर नियन्त्रण जरुरी रहल स्थानीय बुद्धिजिवी बुढपुरनिया अगुवालोग के माग रहल बा ।

बुद्धिजिबिलोग कहेनी बियाह मे हो रहल तडकभडक, अनावश्यक खर्च त बढल बा हि ओमे डिजे मे साउन्ड बेसी करके बजावेवाला अश्लील गीत से खराब प्रभाव परले बा । का गाँव का सहर चारु ओरी बन्द होखेके आवाज उठला पर भी एकर नियणत्रण होखे सकल नइखे ।

सामाजिक, धार्मिक आ सांस्कृतिक रुप मे देखल गईल नाकारात्क असर से स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी उपयुक्त नइखे । बियाह मे सामाजिक प्रतिष्ठा आ हैसियत देखावे खातिर तकडकभडक करेके काम बढल बा । टेण्ट सजावे खातिर दस लाख से बेसी करेवाला खर्च के रोकला पर धनी सम्पन्न आदमी से करेवाला खर्च के देखासिखी करके गरीव विपन्नलोग के खर्च करेके अवस्था मे डिजे बाजा के खर्च आउर तानव हो रहल बा ।

जिराभवानी गाँवपालिका के स्वास्थ्य शाखा के प्रमुख सफिकुल अन्सारी के मुताविक बेसी साउन्ड मे बजावेवाला डिजे से ध्वनिप्रदुषण होके मुटु आ तनाव जईसन मानसिक स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होखी । ई विकृति के भारत के विहार उत्तरप्रदेश के सरकार से प्रतिवन्ध लगा चुकल अवस्था मे तराई मधेश के जिल्लासब मे भी डिजेबाजा रोकल जरुरी देखल गईल बा ।

खास करके भोजपुरी भाषा बोलेवाला ग्रामीण क्षेत्र मे बियाह के खातिर गावल जाएवाला बियाह गीत, लोक संस्कृति के गीत डिजे बाजा अईला के बाद लोप होखे लागलल नागरिक समाज के अगुवा तथा मानव अधिकारवादी अगुवा लोग के कहनाम रहल बा ।

अश्लिल डिजे गीत से जनानी हिंसा आ बलात्कार के घट्नासब भी बढ रहल ओरी सचेत करवनी । पहिले से हि चलत आईल परम्परा मुताविक बियाह के एकदिन पहिले होखेवाला कुमरौन (मटकोर) के रात जलाजय आ पोखरा तक जाए खातिर गाँव आ सहर परिक्रमा करेके समय मे घण्टो अबेररात तक बेसी साउन्ड मे डिजे बजाके नाच गान से त आउर हैरान कईला से रात भर सुतेमे भी समस्या हो रहल जिराभवानी ५के मुक्ति दास थारु के सिकाईत रहल बा ।

तराई क्षेत्र मे राम सीता के बियाह मे अयोध्या आ जनकपूर के वर्णन लोकाचारी व्यवहार मधुर सुन्दर बियाह गीत आ पवित्र आचरण सामाजिक मार्यादा अनुशासित व्यवहार बियाह संस्कृति के अमूल्य निधिसब लेप होखे लागल आ डिजे से लियावल विकृति से छाडा संस्कृति अईला से बडका विकृति आईल महादेवपट्टि के पुर्होती जटाशन्कर मिश्र कहनी । साथे डिजे अबिलम्ब बन्द होखेके माग भी कइनी ।

ध्वनि प्रदुषण से मानवीय स्वास्थ्य आ सामाजिक वातावरण मे पारल नाकारात्मक अभ्यास रोके खातिर पुलीस प्रशासन आ स्थानीय सरकार से बेर बेर बितल बरीससब मे कैयन बेर लिखित मौखिक सम्झौता भईला पर भी पुलीस कार्यालय के अगाडि से बेसी साउन्ड मे डिजे बजाके आवेजाएके भईला पर भी पुलीस प्रशासन मौन भईला से चिन्तित बनावल पुर्हित मिश्र के सिकाईत रहल बा ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: यो समाग्री सुरक्षित छ ।