दहेज के अन्त करी

रोपया पईसा के लालच मे फस के ,अधर्म के रास्ता मत धरी !

समाज के कडा जहर बा दहेज ,जड से एकर अन्त करी!!

केतना बहु जलावल गईली ,केतना भईली बे घर ,

केतना सहत बा लोग भारी दुःख केतना गईली मर !

ऐतना सब कुछ जानला पर भी , पाप के कुवा मे मत परी,

समाज के कडा जहर बा दहेज, जड से ऐकर अन्त करी!!

स्वर्ग से सुन्दर बन्धन बा ई , शादी आपना समाज के

दहेज के खुन से मत रडी , दुर करी ई रिवाज के !!

दहेज के गन्दा ई गठरी से ,आपन घर मत भरी ,

समाज के कडा जहर बा दहेज, जड से ऐकर अन्त करी!!

खेत बारी सब बिका जाता , औरी बिका जाता घर ,

बाल बच्चन के तक्लीफ हो जाता , तबहु ना लागत बा डर !

एक बार शादी करके जिवन भर , दहेज के आग मे मत जरी,

समाज के कडा जहर बा दहेज, जड से ऐकर अन्त करी!!

समय एगो उहो रहे , जेमे रचावल जाय स्वयम्बर ,

पुष्पमाला पहना के नारी लोग ,चुने आपन मन चाहा बर !

त्रेता के दुनिया ईहा फिर से बसाई , सोचू बर !

त्रेता के दुनिया ईहा फिर से बसाई , सोची मत ऐको घरी,

समाज के कडा जहर बा दहेज, जड से ऐकर अन्त करी!!

दहेज ओराई शान्ति आई , हो जाई सबकर कल्याण ,

धनीक गरिब मे फरक ओराई , बढजाई सबकर मान सम्मान ,

आजे से ऐकर अन्त खातिर कुरान ,रामायण के शपथ करी!

समाज के कडा जहर बा दहेज, जड से ऐकर अन्त करी!!

 

जड से ऐकर अन्त करी !

जड से ऐकर अन्त करी !!

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