सप्लायर्स से रासन ना देवेके बतईला पर नारायणी अस्पताल मे समस्या

वीरगंज ११ जेठ

‘नारायणी अस्पताल के कोभिड किचेन मे मरेजीलोग के खातिर खाना पाकेला । रासन सप्लाई करेके जिम्मेवारी मिलल महानुभाव अचानक बिहान से रासन ना देवेके कहेलन, बक्यौता रकम रहल बा त लेखा से क्लियर करी कहला पर भी सहजोग ना करेके मनसाय भईल के का कहेके ? सहजोगीलोग से एक बेर फेनु सहजोग के अपेक्षा बा । कोभिड विरुद्ध के ई लडाइँ जरुरी जितेम ।’

मंगर के सबेरे नारायणी अस्पताल के डा. उदयनारायण सिंह सामाजिक सञ्जाल फेसबुक मे स्टाटस लिखलन ।

‘सँझिया अचानक कुक के फेनु करके रासन के सामान सप्लाई करे ना सकल जानकारी करवनी’ डा. सिंह कहनी, ‘पईसा नईखे मिलल त लेखा से बात कईल जाई, अईसन परिस्थिति मे हाथ ना निकालीं कहेके ना मानलन । ओहिसे सामाजिक सञ्जाल मार्फत दाता खोजले बानी ।’

२०७७ चईत से हि नगनारायण गुप्ता अस्पताल के भान्सा के रासन सप्लाई करत आईल रहलन । नारायणी मे एक सय जने कोभिड के मरेजी ईलाज करा रहल बाडन । ईलाज मे खटेवाला चिकित्सक नर्सलगायत कर्मचारी भी सय के हाराहारी मे होखेलन । उलोग सभी के अस्पताल हि खाना के प्रबन्ध मिलवले बा । अस्पताल मे मरेजी आ चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी लगायत कर्मचारी के खातिर करके दु गो भान्सा चल रहल बा ।

मरेजी के खातिर अण्डा पाउरोटी, भेज तथा ननभेज सुप, हरिहर सागसब्जी, खाना आ चिकित्सक, आउर स्वास्थ्यकर्मी आ कर्मचारी के खातिर खाना–नास्ता के खातिर जरुरी सामान के प्रबन्ध सप्लायर्स से करत आईल रहे । अचानक सप्लायर्स रासन के सामान सप्लाई ना करेके कहला के बाद तरंग आईल स्वभाविक ह । अस्पताल के भान्सा देखेवाला एक कर्मचारी के मुताविक सप्लायर्स जउन–जउन सामान मँगला के बाद भी उपलब्ध करावत आईल बा ।

पर्सा मे वैशाख १६ गते से निषेधाज्ञा बा । सप्लायर्स गुप्ता के मुताविक अस्पताल मे २० लाख रोपेया बक्यौता बा । पईसा के कमी भईला के चलते कठोर निर्णय करेमे बाध्य भईल उनकर कहनाम बा ।

‘दु रोपेया कमाएके उदेश्य राख के काम कईले नईखन, चईत से हि सामान देहले बा, दु दु गो किचेन चल रहल बा,’ कहत उ, ‘हम भी सामान आउर से खरिद करके देवेके ह, अस्पताल से मिलेवाला रोपेया २० लाख पुगल बा । घर बेच के सामान देवे ना सकल जाई ।’

निषेधाज्ञा के समय मे घर चलेमे मुस्किल पडेके समय मे अस्पताल मे कउनो सामान के कमी होखे ना देहल उनकर दाबी बा । एकरा से पहिले के मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट डा. सञ्जय ठाकुर के भी रोपेया देवे खातिर बेर बेर निहोरा कईला पर सुनुवाइ ना भईल उ बतवनी ।

‘मेसु डाक्टर सञ्जय सर पईसा ना देके काठमाण्डु गईनी, ओकरा बाद ना अईनी,’ कहत उ, ‘नयाँ मेसु सर अईला के बाद भी पईसा मिलत नईखे, ना सकेके स्थिति भईला के बाद सामान देवे ना सकेके कहले बानी ।’

निमित्त मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट डा. वीरेन्द्र प्रधान कृत्रिम समस्या सृजना करके रासन के सामान देवे ना सकेम कहल गलत भईल टिप्पणी कइनी । ‘विषम परिस्थिति बा, कैयन संघ संस्था अलपत्र परल तथा विपन्न आदमी के मात्र ना, सडक के कुुकुर के भी खाना खिया रहल बाडन,’ कहत उ, ‘दु महिना से रासन देत आईल सप्लायर्स अचानक सामान देवे ना सकेके कहल गलत ह । दोसर पाँच दिन रुके ना सकल जाई ?’

विशेष काम से काठमाण्डु जा रहल कहत डा. प्रधान आपन हस्ताक्षर से खाता सञ्चालन के खातिर कागजपत्र छोडके अइला से कुछ दिन के बाद पईसा निकासा करे सकेके बतवनी ।

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