कोरोना के कहर किसान के उपर

विश्व एक महामारी के चपेटा मे कोरोना भाइरस (कोभिड–१९)के कारण पड चुकल बाटे ।

बिश्व पुर्ण रूप मे कोरोना से तबाही होके लगभग दु लाख पच्पन हजार मानव के जान त लेचुकल बाटे आ सैतिस लाख से जादे मानव सभन ई रोग से ग्रसित बाडन ।

ई महामारी से मानव सभन के डाढ सेक रहल बाटे ।

पूरा नेपाल देश भर लगायत पडोसी देश भारत मे लक डाउन लागला से हरेक जनता से लेके देश भी आर्थिक समस्या से जुध रहल बाटे ।

ओकरा साथे महँगाइ के चपेटा के जाल मे जनता सभन फँसरहल बाडन ।

जे बिपन्न परिवार सभन के जियल मुस्किल हो चुकल बा ।

दोसरा ओर देखल जाई त मौसम भि किसान जनता सभन के पताल के पथर खियावे खतिरा अपन कहर अभि तक नइखे छोडले ।

हरेक दिन मेघ बरसला से भा पानी परला से किसान सभन के मकई के बर्बाद हो रहल बा ।

हरेक दिन पथर परला से हवाहुरी आइला से जनता भा किसान सभन के खेतीपाती लगायत घर के उपर के छना उडा के लेगइला से ओ लोग आउर पिडित हो के घर बिहिन्न होचुकल बाडन ।

उ सभन के सहजोगी हाथ ना भईला के बजह से खुल्ला अकास मे अपन जीवन ई महामारी के समय मे बिता रहल बाडन ।

बहुत दिन से कामकाज के हडताल भईला से देश भर के गरिब किसान सभन दुःखदायी जीवन बितावे मे मजबुर होचुकल बा लोग ।

हरेक दिन पानी परला से किसान सभन के मकई, गँहु खेत मे भिज के सड के बर्बाद होचुकल बाटे ।

दोसर ओर देखल जाए त किसान सभन जवन तरकारी खेत मे लगावल गइल रहे उ बजार मे खपत ना भइला के कारण से खेत मे हि सड रहल बा ।

पशुपालन करेवाला जनता सभन के दुध बजार मे खपत ना होला से दूध के भि सडक मे फेंक रहल बालोग ।

एकर छतिपूर्ती के दि ? कह के स्वाल भि उठ रहल बाटे ।

नेपाल सरकार भी जनता के स्वास्थ खतिरा हि बन्द करावल गईल बा ।

लेकिन मौसम भि किसान सभन के साथ ना देहला से दोहरो मार मे पर चुकल बाडन ।

बि.स.२०६८ साल के जनगणना तहत हरेक दिन जनता सभन एक बेर खाना ना खाके करिब करिब ५० हजार जनता सभन भुखे गिरबी के कारण से सुतला लोग ।

लेकिन आजु के समय मे लगभग तीन करोड जनता भा २,६४,९४,५०४ सभन मे से १९५ लाख जनता सभन एक छाक ना खाना खा के अपन गुजारा जेन तेन कर के काट रहल बाडन ।

ओमे से करिब करिब ५०लाख जनता सभन के हालत एक दम नाजुक बनचुकल बाटे ।

जदि ए अवस्था मे नेपाल सरकार तत्काल कवनो निचोड ना निकाला पर समस्या आउर गम्भीर ओर जाए के सम्भावना प्रष्ट देखाई दे रहल बा ।

जदि राहत बितरण ना कइला पर कोरोना भाइरस से जादे भुखमरी से आम जनता सभन छटपटाके ना मरी लोग कहल ना जा सकता ।

जनता के जनभवना न बुझला पर देश के दिशा दोसर ओर जा सकता । देश एक दयनीय अवस्था से गुजलरहल समय मे देश के कुछ नेता सभन अपन पदिये मर्यादा खातिर ओका बोका खेल रहल बाटेलोग ।

लेकिन जनता के उपर कवनो आस्था ना राख के अपन पद खातिर खेल मे त कभो पार्टी फुटावेके खातिर विभिन्न प्रकार के अध्यादेश पारित कईल इ महामारी मे कवनो जरुरत नईखे देखाई देत ।

ई अवस्था मे अध्यादेश लियावल कवनो तिर मारल त नईखे गईल ।

देश के जनता के भविस्य के उपर खेलवाड करेके ई त राष्ट्र बिरोधी जनता बिरोधि काम भईला से पूरा देश भर के जनता सभन के अधिकार भा मतदान के कुलचित कर के एक पूरा देश के बदनाम करे खतिरा ओका बोका खेल रहल बाटे ।

किसना के जीवन मे का गुजर रहल बाटे कवनो जनप्रतिनिधि सभन के ध्यान ए प्रति ना गइला से निरास भइले हि बा ओकरा साथे अपन अधिकार, अपन दैनिक जीवन चलावेवाला खाद्य बस्तु, खेत मे छिटेबाला खाद, स्वास्थ सुरक्षा के प्रत्याभुति ना देहला पर देश मे आम जनता सभन सडक पर उतरे के योजना बनारहल देखाई देवे के प्रवल, उच्च अवस्था देखाई देरहल बाटे ।

अभि तत्काल किसान सभन के बालीनाली के क्षतिपूर्ति देहल उपयुक्त बा ।

लेकिन प्रकृित हरेक दिन कृषक सभन के कृषि नोकसान पहुँचारहल बा जवन कहर से कृषक भा किसान सभन शारीरिक, मानसिक, भौतिक रुपसे चिन्ताजनक देखाला से कुछ आउर सामाज मे बडका दुर्घटना घटेके सभ्भवना जादे देखला से सरकार सरोकारबाला ए प्रति सजग रहला से ठिक हो ई कह के सामाजसेवी, किसान बारा जिल्ला के श्री पतिराम महातो कोईरी जी बतईनी ।
उहाँ के कथनी अनुसार किसान सभन लकडाउन, पानी परला के मार मे परला के बजह से ना घर के ना घाट के जईसन भेईल बा लोग ।

कुछ लोग के खेत पईसावाला सभन के त कमर सेकागईल बा ।

जे हरेक दिन काम कर के, मजदुरी कर के खाए वाला लोग के हाल बेहाल होचुकल बाटे ।

ए लोग अभि कईसे अपन जिविका चलारहल बाटे कह के एक अपने आप मे प्रशन सरकार के उपर उठे एक आम बात बाटे ।

जनता, किसान हरेक तरह से तबाह भइला से सरकार तुरुन्त रहात देवे के रास्ता भि एक दम आवशयक देखाई दे रहल बा ।

अभि कोरोना भाइरस आइला के कारण से खेत मे जे उब्जल बस्तु किसान सभन के बा उ बस्तु के अच्छा मुल्य ना मिलला से आउर अनाज किनमेल मे कमि होला से उलटे दैनिक उपयोग करेवाला समान सभन के महँगाई होखला से किसान दुनु ओर कष्ट भोग रहल बाडन ।

देश भी आर्थिक मारमे जुधरहला से आउर तकिलफ किसान के उठावे के पर रहल बाटे ।

ओहि से कहल गईल बा कोरोना के कहर किसान के उपर हि होरहल बा ।

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