कातिक के नहान आजु से सुरू

प्रभु यादव

बारा १५ कातिक

हरेक साल कुवार अजोरिया पूर्णिमा के दिन से शुरु होखेला कातिक नहान जवन शनिचर के दिन से सुरु होगईल बा । आकाश के दीया जरा के देखावे के आ तुलसी के विशेष पूजाराधना कईल जाला ।

कुआर के अजोरिया के पूर्णिमा से कातिक अजोरिया के पूर्णिमा तक कातिक स्नान सहित तुलसी के विशेष पूजा आ आकाश के दीया देखावल जाला जवना से सुख शान्ति सम्पत्ति आ श्रेय प्राप्ति होखेला कहके धार्मिक विश्वास रहल बा ।

अकाश के दिया जलावेला बाँस के, पिपर के, केरा के पाता पर बतिहर उठा के जलावल जाला । आकाश के दिया भगवान् विष्णु के समर्पण कर के जलावल जाला ।

कुवार के अजोरिया पूर्णिमा से कातिक अजोरिया के पूर्णिमा तक कातिक स्नान कर के घरघर मे विशेषरुप से कईल तुलसी पूजा से मनोकामना पूरा होखे के धार्मिक विश्वास रहल बा ।

तुलसी पूजा सूर्योदय से पहिले स्नान कर के करे के मान्यता रहल बा ।

कातिक स्नान करेवाला शनिचर के दिन से कातिक के अजोरिया के पूर्णिमा तक दु दाल भईल अन्न खाए के ना होई कहके शास्त्रीय मान्यता रहल बा ।

कातिक स्नान के अवसर पर बारा के बहुते नदि पोखरा पर मेला लागल बाटे । सुबह मे कातिक स्नान करेवाला लोग नदि पोखरा मे स्नान कर के आशस के दिया देखावले रहल आ तुलसी के पुजा कर के शुरूवात कईले बाडन ।

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