विचार मे स्पष्टता ना भईला पर लक्ष्य प्राप्ति ना होखी :- अध्यक्ष दाहाल

काठमाण्डु ११ माघ,

नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ स्पष्ट वैचारिक राजनीतिक कार्यदिशा के आधार मे मात्र पार्टी अगाडि बढेके प्रष्ट कईले बानी ।
पार्टी केन्द्रीय कार्यालय धुम्रबाराही मे आजु गोपीरमण उपाध्याय आ मनहरि तिमिल्सिनाद्वारा सम्पादित ‘जनता के जनवाद के आधारसब’ नामक पुस्तक के लोकार्पण करत उ विचार आ कार्यदिश मे स्पष्टता आवे ना सकला पर अन्योल आ अराजकता बढके पार्टी ठिक तरिका से अगाडि बढे सकेके बतवनी ।

“विचार मे सहिपना आ स्पष्टता से पार्टी के विकसित करत लेजाई”, उ कहनी कि, “विचार मे स्पष्टता ना भईल आ पार्टी से आपन उद्देश्य आ लक्ष्य प्राप्ति करे ना सकी ।”
समाजवाद स्थापना के खातिर नेपाल मे मौलिक तरिका के क्रान्ति कईल उनकर कहनाम रहे ।

“हमनी नेपाल मे जउन उपलब्धि हासिल कईलख, उ दुनिया के कउनो किताब मे ना मिली”, कहत अध्यक्ष दाहाल, “विश्वभर के क्रान्ति के अध्ययन करके नेपाल मे मौलिक विचार निर्माण कईल गईल बा, समाजवाद के आधार तइयार करेके ‘हथियार’ के रूप मे जनता के जनवाद के देहल गईल बा ।”

पुस्तक से नेकपा के वैचारिक धरालत आ अब कउना रास्ता ओरी जात बा कहके आम जनमानस के बुझ्न सहज होखेके उनकर कहनाम रहे । “राजनीतिक आन्दोलन के बाद के सङ्क्रमणालीन परिस्थिति मे नेपाली राजनीति के आजु के अवस्था आ अब के लक्ष्य बुझे खातिर पुस्तक महत्वपूर्ण सन्देश देहले बा”, अध्यक्ष दाहाल कहनी ।

नेपाल मे कम्युनिष्ट आन्दोलन के उठान, सङ्घर्ष तथा वैचारिक विषयवस्तु समेटल ई पुस्तक से नेकपा के आधारिक दस्तावेज तइयार करेमे सहजोग पुगावे के उनकर विश्वास रहे । अध्यक्ष दाहाल नेकपा के इतिहास, कार्यदिशा विकास के शृङ्खला आ सन्दर्भ एवं पार्टी एकता के निर्णय तक के वैचारिक आधार के बारे मे पार्टी पङ्क्ति मे आउर प्रष्टता लियावे के मद्दत मिलेके बतवनी ।

कार्जक्रम मे पुस्तक उपर टिप्पणी करत नेकपा के स्थायी कमिटी सदस्य युवराज ज्ञवाली कम्युनिष्ट विचार विकास के शृङ्खला के पुस्तक मे समेटल गईला से सभी के खातिर अत्यन्त उपयोगी रहल बतवनी ।

जनता के सार्वभौम बनावेवाला राजनीतिक प्रणाली हि ‘जनवाद’ भईल उल्लेख करत उ पुस्तक मे समाजवाद के तइयारी के चरण ‘जनवाद’ ह कहके विषय के व्यापक विश्लेषण कईल बतवनी ।

पुस्तक के सम्पादक उपाध्याय नेकपा के ७० बरीस के इतिहास के पुस्तक मे समेटल गईल बतवनी । दोसर सम्पादक तिमिल्सिना नेकपा के ऐतिहासिक दस्तावेज के सङ्कलन करके नेता कार्यकर्ता के पार्टी कार्यदिशा के बारे मे जानकारी होखो कहके पुस्तक तइयार कईल बतवनी ।

नेकपा के पहिलका पर्चा से एमाले–माओवादी एकता तक पुस्तक मे नेकपा के स्थापना से एकीकृत के अवस्था, कम्युनिष्ट आन्दोलन के विभाजन के बाद अनेकन समूह होत पूर्वएमाले आ पूर्वमाओवादी के धारा के विकास के ऐतिहासिक निर्णय आ ओकर दस्तावेजीकरण एवं पार्टी एकता प्रक्रिया के बाद नेकपा से कईल निर्णय लिपिबद्ध कईल गईल बा ।

मुख्यतः चार खण्ड मे रहल पुस्तक के पहिलका खण्ड मे नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के पहिलका पर्चा, २०१५ साल के आम निर्वाचन मे नेकपाद्वारा जारी चुनावी घोषणापत्र, २०१७ साल के फैजी ‘कू’ के बाद नेकपा जनता के नाम मे कईल अपिल लगायत विषय समेटल गईल बा ।

दुसरका खण्ड मे झापा विद्रोह से नेकपा (एमाले) के गठन, मदन भण्डारी के जनता के बहुदलीय जनवाद के पृष्ठभूमि, ओकर संश्लेषण एवं विकास प्रक्रिया से सम्बन्धित दस्तावेज के मुल अंश समावेश कईल गईल बा । तिसरका खण्ड मे सेक्टर काण्ड से माओवाद के बारे मे संश्लेषण, जनयुद्ध के तइयारी, विकास होत २१ वाँ शताब्दी मे जनवाद के विकास, १२ बुँदे समझदारी, शान्ति सम्झौता, हेटौँडा महाधिवेदन मे संश्लेषण कईल समाजवादी क्रान्ति के कार्यदिशा लगायत दस्तावेजन समेटल बा ।

एहितरे चउथका खण्ड मे तत्कालीन नेकपा (एमाले) आ नेकपा (माओवादी केन्द्र) के चुनावी गठबन्धन से पार्टी एकता के घोषणा, पार्टी के राजनीतिक प्रतिवेदन लगायत विषय समावेश कईल गईल बा ।

नेकपा के समाजवाद उन्मुख जनता के जनवाद के वैचारिक आधार एवं अन्तर्वस्तु आ नेकपा के ७० बरीस के इतिहास बुझे खातिर पुस्तक से सहजोग पुगावे के सम्पादक तिमिल्सिना जानकारी देहनी ।

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