“महा–शिवरात्रि पर्व मनावे के उदेश्य, ईन्द्रिय नियन्त्रण के अभ्यास द्धारा मन बिचार भावना के शुद्ध बनावेके खातिर केन्द्रित करेके ह”

सन्दर्भ ः महा–शिवरात्रि पर्व ।

हिन्दू धर्म अन्तरगत मनावल जाएवाला एगो बहुती बडका महत्व के पर्व हउवे “महा–शिवरात्रि” । जेकर नाम से ही जानल बुझल जा सकता की ई धार्मिक महत्वता रखेवाला महान पवनी, भगवान, “शिव” से सम्बन्धित रहल महान पर्व ह ।

रात्री(रात) मध्ये मे सबसे महान रात भईला के कारण फागुन कृष्णपक्ष त्रयोदशी तिथि मे मनावल जाएवाला एह दिन के ई पर्व के “महा–शिवरात्रि” कहल जाला । काहेकी शिव पुराण लगायत शिव महिमा ईत्यादि शिव से सम्बन्धित धार्मिक पौराणीक ग्रन्थसब मे भईल वर्णन मुताविक इहे दिन तिथि मे जगत मे पहिलका बेरी शिवालय पहिलका “शिवलिङ्ग” प्रकट भईल रहे ।

साउक्त दिन के सृष्टि के सुरुवात भईल दिन के रुपमे आ जगत संरक्षण खातिर उक्त लिङ्ग प्रकट भईल मानल जाएके बात के धार्मिक वर्णन रहल भी मिलेला ।

अतः एहतरे भगवान शिवद्धारा लिला रचत सृष्टि के कल्याण खातिर जगत मे उनकर प्रादुभाव (उदय) भईला के कारण ई दिन अति पवित्र दिन हउवे । साथे इहे कारण एहरात के कल्याण कारक रात के रुपमे मनावल जाएके भईला से “महा–शिवरात्रि” कहल जाला ।

निराकार परब्रम्ह परमात्मा स्वरुप भगवान “शिव” सृष्टि के आदी तथा अन्त्य भी बानी । जे आवश्यक्ता मुताविक जगत मे सृष्टि आउरी अन्त्य भी करिने । उहाँ चराचर विश्व जगत के सम्पूर्ण प्राणी जन के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता एवं संहारकर्ता बानी । अर्थात जे ब्रम्हा–विष्णु तथा महेश तिनो रुपके एके स्वरुप ॐकार मय बानी । जे देव दानव आ मानवजन तिनो वर्गद्धारा मानल जाएवाला परम पूज्य देवता रहल बानी ।

ओ  देवता अर्थात “महादेव” कहके उनका पुकारल जाला । बाघम्बर (बाघ के छाला) कमर मे पहिरल, त्रिशुल आ डमरु तथा मृदङ्ग हाथ मे रखे आ बजावेवाला, घेंट मे साँप के माला लटकावत रुद्राक्ष धारण सहित भष्म (राखी) घोंसेवाला, त्रिपुण्डधारी कमण्डलयुक्त साँढ मे वाहन (सवारी) करेवाला, समसान मे समेत रमावेवाला (रमेवाला) भगवान भोलेबाबा शिवजी के ओइसन अजिव किसिम के हुलिया सामान्य अज्ञानी जन खातिर (सामान्य भक्त खातिर) समझ पावे के मुस्किल रहल बात बा ।

साथे शिर मे चन्द्रमा एवं जटा मे गंगा धारण जइसन बात भी रहस्यमयी बा । माकिर उ सबके भितर अवश्यही उनकर आपन आपन भितरी शाब्दिक अर्थ भाव छिपल महत्वपूर्ण उपयोगी बात सब भईल जानल आ बुझल जा सकता । इहवाँ जाने बुझेवाला बात ई बाटेकी त्रिशुल सत्व, रजो, तमो गुण के प्रतिक रहल बा । जे सत्य, रजो आ तमोगुण के दर्शावेला ।

साथे समसान मे रमावेके तथा भष्म लेपन लगावेके मतलब जे नश्वरता एवं वैराग्य भाव के जनावेला । काहेकी ई संसार अनित्य बा, जनम के बाद मरण जरुर होखेला । देह मृत्यु के बाद आगी से जरके खरानी (ष्म) हो जाला । ओहिसे ओइसन देह आ संसारिक माया मोह मे ना रहत संसार मे रहके प्रभु चिन्तन मनन मे रहत ईन्द्रिय नियन्त्रण करत आपन कर्तव्य निभावत सतकर्म करत जीनगी के आगा बढावे के चाहिं । इहेवाला शन्देस देहल मिलेला ।

जहवाँ चन्द्रमा (चंदा) मन के देवता बानी, जे चाँदनी छिटत विश्व मे सतके अँधेरा मे उजाला देत शितलता प्रदान करेनी त नदी स्वरुप मे बहेवाली देवी गंगा आपन जलद्धारा विश्व ब्रम्हाण्ड प्रकृति जगत मे संचारित होत प्रणी जन के कल्याण करेली । जे प्राणीजन के जीवन दायिनी बानी । मन के नियन्त्रित कर सकेवाला ओईसन देवता चन्द्रदेव आ प्राणी मात्र के जीवन दायिनी गंगा जईसन देवी देवता भगवान शिव के शिर जुटजटा मे विराजमान भईल बात भी “शिव” के कृपा रहल बा ।

एह दिन भगवान भोलेबाबा “शिव” पृथ्वी मे आदमी के सबसे नजिक रहेलें, अइसन शाष्त्रिय वर्णन कहनाम रहल बा । ओहिसे एह रात मे शिवरात्रि के दिन उनकर कृपा पावे तथा बरत उपवास कईल सफल होखो एवं मनोकामना ईच्छा पुरा होखो तथा सुख, शान्ति, आरोग्य उन्नति प्रगति होखो, साथे जीनगी धन्य सफल होत मुक्ति प्राप्ति होखो कहे खातिर भी इहे उपरोक्त उदेश्य सहित शिवरात्रि मे रात मे शुद्ध भाव से मन मे बढिया सोंच जागृत करावे भजन, किर्तन, उपवाश सहित भगवान शिव के उपाशना बन्दना कईल जाला ।

उनकर बहुती पसन्द के वस्तु जल, बेलपत्र आ दूध भी अर्पण तथा धुप दिप, चन्दन सहित पंचामृत से स्नान एवं विशेष पूजा सृगार आरती भी कईल जाला । बेलपत्र संसार के हराभरा करेवाला बनस्पती हउवे । बनस्पती के माध्यम से ही प्राणी जन खातिर आवश्यक जीवन जिएवाला प्राणवायू अक्सीजन मिलेला त दोसर ओरी दूध पुष्टिदायक पौष्टिक तत्वयुक्त खाद्य वस्तु हउवे । एहतरे बुझल जाँव त भगवान शिवद्धारा धारण कईल वस्तु होखो भा उनकर पसन्द के वस्तु उ विभिन्न वस्तु, जेसब हमनी मानव लगायत के प्राणी जन खातिर कल्याण कारक हितकारी, मार्गदर्शक एवं बहुती उपदेशक सन्देश मुलक रहल बा ।

“शिव”द्धारा हजारो बरिस के ध्यानमग्न अवस्था से एकबेरी आँख खोलला पर उनकर आँखी से कुछ अश्रु (आँसु) के बुन्द ई पृथ्वी मे गीरल । जउना ई पृथ्वी मे “रुद्राक्ष” के गाछ बृक्ष के रुपमे उत्पन्न होके उगल । अतः उहे बृक्ष फलेवाला फल के दाना ही “रुद्राक्ष” कहलाईल । जउना भगवान रुद्र (शिव) के आँसुद्धारा उत्पन्न होखे के कारण “रुद्राक्ष” बहुते महत्व के शक्तिशाली मनोकामना पूर्ण करेवाला अती पवित्र बस्तु मानल जाला ।

ओहीसे भगवान शिवजी के अनेक नाम मध्ये एगो नाम “रुद्र” भी हउवे । महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव से सम्बन्धित आ उनका से एकाकार होत सत्यतत्व के अनुभुति प्राप्ती करेवाला रात हउवे । काहेकी सत्य सबदिन शुभ मंगलदायक होला । सत्य ही ईइश्वर ह, ईश्वर शुभ मंगल कल्याण कारक एवं सुन्दर रुप ह । अतः ओइसन कल्याण कारक “शिव” तत्व के समझे बुझे पावे खातिर ही शिव ज्योतिर्मयरुप मे प्रकट भईल ई शिवरात्रि के शुभ दिन के महान रात मे अन्हार रुपी मन के कुबिचार नष्ट करत ज्ञानरुपी सुबिचार जगावे खातिर प्रेरणा मिलो कहे के उदेश्य सहित जेमे सफलता मिलो कहे खातिर ही “महा–शिवरात्रि” पर्व उत्सव मनावल जाला ।

दोतर्फ शिव तत्व, अमृत समान अमर तत्व ह । एहदिन भगवान शिव के गुणगान, ब्रत उपवास, भजन किर्तन, रात मे जाग्रम के मतलब मन बिचार सोंच भावना मे सुविचार जगावत जनहित के कार्ज मे सबदिन जुटेलागे खातिर प्रेरणा मिलो कहके उदेश्य खातिर ही ह । जेसे हृदय पवित्र बनावत ईन्द्रिय नियन्त्रण के अभ्यास सहित मन आत्मा पवित्र बने बनावे के ओरी “शिवारत्रि” पर्व प्रेरणा प्रदान करेला ।

पूर्विय बैदिक धर्म संस्कृति के मे ही ना, विश्व के अन्य धर्म संस्कृति के अनुयायी जनद्धारा भी निराकार परमात्मा (ईश्वर) रुपमे भगवान शिव के स्विकार कईल गईल बात विभिन्न धार्मिक ग्रन्थ मे रहल वर्णन अध्ययन से उक्त बात ज्ञात होखेमे आवेला । एह दिन विधिसम्मत शुद्ध भावना साथ श्रद्धा भक्ति निष्ठापूर्वक कईल बरत उपवास सफल होखेके आ कर्ता के सम्पूर्ण पाप नाश होत मनोकांक्षा पुरा आ सुख, शान्ति, आरोग्यता, उन्नति प्रगति सहित अन्त मे भुक्ति सहित प्राप्ती होला । अइसन धार्मिक वर्णन रहेके साथे साथ विश्वास भी रहते आईल बा । एहदिन भक्तजन सबेरही उठके नहान धोवान से शुद्धहोत विभिन्न शिव मन्दिर (शिवालय) मे जाके श्रद्धाभक्ति भगवान शिव के पूजा उपाशना, दर्शन, परिक्रमा सहित जल आ बेलपत्र दूध लगायत क सामगृ सहित अर्पण करत धन्य होजालें ।

अतः उपपरोक्त उदेश्य सहित भगवान भोलेबाबा महादेव शिव के कृपा पावे आ जीवन के धन्य बनावे खातिर “महा–शिवरात्रि” के महान एवं पावन अवसर मे एह दिन भगवान “शिव” के ब्रत उपवास, पूजा उपाशना विशेष रुपमे करते आवेके धार्मिक परम्परा यूगो युग से चलते आ रहल बा । “महा–शिवरात्रि” पर्व के पावन अवसर मे सम्पूण जन मे हार्दिक मंगलमय शुभकामना । जय शिव शम्भो, ॐनमः शिवायः ।। – मुर्ली बगैचा–१२, वीरगंज

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