बजेट से राष्ट्रिय समस्या के समाधान ना होखी : पूर्वप्रधानमन्त्री भट्टराई

काठमाण्डु १८ जेठ
पूर्वप्रधानमन्त्री डा बाबुराम भट्टराई बजेट के सत्तारुढ दल बहुते बढिया कहके समर्थन करेके आ विपक्षी से आँखा बँचाके विरोध करेके प्रवृत्ति से देश के वास्तविक हित ना करेके भईला से तथ्य मे आधारित रह के बजेट मे बहस करेके जरुरत रहल बतवनी ।
प्रतिनिधिसभा के आजु के बईठक मे आर्थिक बरीस २०७७÷७८ के राजश्व आ व्यय के वार्षिक अनुमान उपर के सामान्य छलफल मे भाग लेत उ बजेट परम्परागत तवर से अईला से राष्ट्रिय समस्या के समाधान होखे ना सकेके बतवनी ।
राष्ट्रिय औद्योगिक पूँजीवाद के पक्षपोषण करत समाजवाद के आधार तइयार करेके मूल्य आ मान्यता के बजेट से ध्यान देवे ना सकल तर्क करत उ सभी क्षेत्र बजार के छोडेके आ सभी विषय राज्य से हि केन्द्रीकृत करेके कहके विषय अपनेमे ना मिलेवाला रहल उल्लेख कइनी ।
सङ्घीय समाजवादी पार्टी के नेता भी रहल उ नेपाल बाह्य सहयोग मे हि चलेके अवस्था मे रहल, आन्तरिक राजश्व से खर्च हि चलावे ना सकेके अवस्था मे पुगल, विकास खर्च बढे ना सकल आ कर्जा भुक्तानी मे भी सुधार होखे ना सकल स्पष्ट कइनी ।
वित्तीय सङ्घीयता कार्यान्वयन मे भी सरकार से ध्यान देवे ना सकल आ स्रोत के विनियोजन मे भी कन्जुस्याइँ कईल उ जनावत सङ्घीयता के बरियार बनावेके ओरी ख्याल ना कईल आरोप लगवनी ।
स्वास्थ्य क्षेत्र मे न्यूनतम १० प्रतिशत लगानी करेके भईला पर भी ओकरा ओरी ध्यान ना देहल, निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य मे व्यापार करेके ना होखी आ राज्य से हस्तक्षेप करेके उ तर्क कइनी ।
उ कोरोना से पारल प्रभाव न्यूनीकरण के खातिर तत्कालीन आ दीर्घकालीन राहत के प्याकेज लियावे के आ विदेश से फिर्ता कईल लोग के उचित तवर से काम देवेके ओरी ध्यान देवेके सुझाव देहनी ।
उ राहत के खातिर एकीकृत तरिका से काम करेके आ स्थानीय तह से हि राहत देवे खातिर तथ्याङ्क तइयार करके न्यूनतम १० लाख गरिब जनता के मासिक रु पाँच हजार के दर से नगद हि देवेके व्यवस्था करेके बात मे जोड देहनी ।
सम्पत्ति के अभिलेखीकरण करके कर लगावेके, जमिन पारता राखेवाला के कानूनी दायरा मे लियावे के आ सभी के अभिलेखीकरण करे सकला पर राजश्व के स्रोत बढे सकेके उनकर कहनाम बा ।
पूर्वाधार क्षेत्र के विकास मे विशेष ध्यान देवे खातिर निहोरा करत उ सङ्घीय सरकार से योजना आ नीति देके प्रदेश के सवल आ सक्षम बनावे लागेके तथा द्रुतमार्ग निर्माण करके काठमाण्डु मे हि थप शहर बनावेके विषय ग्राह्य ना भईल बतवनी ।
उ प्रशासनिक क्षेत्र मे उल्लेख्य सुधार करके केन्द्र मे कर्मचारी के सङ्ख्या घटावे के तथा सेना पुलीस के आउर सवल बनावे मे लागेके पडि कहनी ।
सांसद दुर्गा पौडेल कोभिड–१९ के महामारी नियन्त्रण करे खातिर सरकार के तइयारी अपुग देखल गइला से प्रकोप रोकथाम करे खातिर विनियोजन बजेट अपुग भईल बतवनी ।
उ सर्वोच्च अदालत से विदेश मे अलपत्र पडल कामदार के तत्काल प्राथमिकता के आधार मे स्वदेश फिर्ता करेके आदेश देहल गईल अवस्था मे उ नागरिक के उद्धार करेके विषय मे बजेट से सम्बोधन करे सकल नइखे कहनी । सांसद प्रेम सुवाल बजेट से समाजवाद के आधार सिर्जना करे ना सकेके बतवनी ।
भूकम्प के बाद के पुनःनिर्माण, विकास निर्माण के मूर्तरुप देवे खातिर बजेट से कउनो आधार पेश ना कईल, कर्जा आ अनुदार के भर मे बजेट लिया के सरकार गलत कईल उ उल्लेख कइनी ।
सांसद पम्फा भुसाल बजेट तथा नीति कार्जक्रम मे देखल गईल कमजोरी हटाके सकारात्मक बात के समेटे खातिर सरकार के ध्यानाकर्षण करवनी ।
आकार मे बितल बरीस से कुछ छोट भईला पर भी बजेट यथार्थ परक भईल उ टिप्पणी कइनी ।
सांसद डा मीनेन्द्र रिजाल कोरोना से सिथिल बनल अर्थतन्त्र के उठावेवाला किसिम से बजेट आवे ना सकल आरोप लगवनी ।
स्थानीय तह के देवेवाला सशर्त अनुदानबाहेक आउर बजेट घटला से उ बजेट घटाके सङ्घीयता बलियार ना होखी कहनी ।
स्वास्थ्य क्षेत्र मे विनियोजन कईल बजेट से कोरोना से पारल स्वास्थ्य सङ्कट टारे ना सकेके आ जनता के स्वास्थ्य सुरक्षा करे खातिर यथेष्ट बजेट विनियोजन करे खातिर निहोरा उ कइनी ।
सांसद मातृकाप्रसाद यादव समय मे पूँजीगत खर्च होखे ना सकला पर जनता लाभ लेवे ना सकला से पूँजीवाद मे आधारित उत्पादन सम्बन्ध के अन्त्य करेके पडि कहनी ।
सत्ता पक्ष बजेट के समर्थन करेके आ विपक्षी विरोधमात्र करेके प्रवृत्ति से निकास देवे ना सकेके आ बजेट के बारे मे स्वतन्त्र तरिका से छलफल करे खातिर उ निहोरा कइनी ।






