एमसिसी संसद् से अनुमोदन के बाद मात्र कार्यान्वयन होखी : अर्थमन्त्री

काठमाण्डु१९ जेठ
अर्थमन्त्री डा युवराज खतिवडा अमेरिकी सहजोग मिलेनियम च्यालेन्ज कर्पाेरेशन (एमसिसी) सम्झौता से सम्बन्धित बजेट आ कार्जक्रम संसद् से अनुमोदन कईला के बाद मात्र कार्यान्वयन मे जाएके स्पष्ट कईले बानी ।
प्रतिनिधिसभा के आजु के बईठक मे आर्थिक बरीस २०७७÷०७८ के बजेट मे सांसद से उठावल विषय उपर स्पष्ट करत मन्त्री डा खतिवडा उ विषय मे प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली इहे जेठ ६ गते स्पष्ट कईला से उहे मुताविक होेखेके बतवनी ।
उ सम्झौता के विषय मे इहे जेठ १६ गते भईल सत्तारुढ नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के सचिवालय बईठक मे संसद् से सम्झौता पारित ना भईल अवस्था मे उ अन्तर्गत के बजेट आ कार्जक्रम राखल गईला मे सवाल उठला के बाद अर्थमन्त्री सोबमोजिम स्पष्ट करेके सहमति भईल रहे ।
नेकपा सचिवालय विस्तृत छलफल करके उ सम्झौता के बारे मे निर्णय करेके जनावल गईल बा ।
मन्त्री डा खतिवडा स्वदेशी जरुरत, राष्ट्रिय प्राथमिकता आ हित के ध्यान मे राख के वैदेशिक सहायता नीति मुताविक वैदेशिक सहजोग लेके कार्यान्वयन करेके भी स्पष्ट कइनी ।
उ कोभिड–१९ के संक्रमण के चलते विश्व अर्थतन्त्र हि संकट मे पडला से अब क्रमशः आर्थिक क्रियाकलाप शुरु करत जनजीवन के क्रमशः गतिशील बनावेके आ कोरोना रोकथाम आ नियन्त्रण मे विनियोजित बजेट अपुग भईला पर बाद मे रकमान्तर करे सकेके बतवनी ।
रोग आ भोक से बँच के पडोसी देश के अनुभव समेत के आधार मे क्रमशः आर्थिक क्रियाकलाप सञ्चालन करत औसत आर्थिक वृद्धिदर हासिल करे सकेके उ बतवनी ।
बजेट भौगोलिक हिसाब से सन्तुलित भईल तथा सङ्घ आ प्रदेश के बजेट विनियोजन प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग के सुझाव के आधार मे कईल जनावत उ श्रम आ सीप के रुपान्तरण करके नयाँ अवसर सिर्जना करेके कार्जक्रम बजेट मे उल्लेख भईल बतवनी ।
उ कोरोना महामारी के चलते खर्च मे मितव्ययिता अपनावत प्रशासनिक आ कार्यालयगत खर्च मे २८ प्रतिशत कटौती कईल बतवनी ।
मन्त्री डा खतिवडा बजेट के कार्यान्वयन के खातिर सभी पक्ष के सहजोग जरुरी रहला मे भी जोड देहनी ।
बजेट मे उल्लेखित ‘एक निजी विद्यालय एक सामुदायिक विद्यालय के गुणस्तर सुधार के खारित जिम्मेवारी वहन’ के बारे मे स्पष्ट करत उ निजी विद्यालय के एक प्रतिशत शिक्षा सेवा शुल्क के रकम सामुदायिक विद्यालय के पूर्वाधार विकास मे खर्च करावे के सोंच मुताविक ओकर सामाजिक उत्तरदायित्व आ सहकार्य के वातावरण विकास के खातिर उ प्रस्ताव कईल बतवनी ।
उ सामुदायिक विद्यालय के स्तर सुधारेके आ मावि तक निःशुल्क अनिवार्य बनावत जाएके कहके द्विविधा ना रहल आ सामुदायिक विद्यालय निजी क्षेत्र के हस्तान्तरण करेके ना खोजल स्पष्ट कइनी ।






