मुद्दा के फरक व्यवस्थापन पद्धति शुरु

काठमाण्डु १ सावन
सर्वोच्च अदालत जिल्ला आ उच्च अदालत मे आवेवाला मुद्दा के एकर प्रकृति के आधार मे बर्गीकरण करेवाला पद्धति शुरु कईले बा ।
सर्वोच्च अदालत न्यायपालिका के सुधार के प्रयाससब के संस्थागत करेके उद्देश्य के साथ आजु से लागू होखेवाला किसिम से पहिलका बेर मुद्दा के फरक व्यवस्थापन पद्धति शुभारम्भ कईले बा ।
प्रधानन्यायाधीश चोलेन्द्रशम्शेर जबरा तथा सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश, मुख्य रजिष्ट्रार, रजिष्ट्रार लगायत से देशभर के उच्च अदालत तथा जिल्ला अदालत मे भर्चुअल माध्यम से मुद्दा के फरक व्यवस्थापन पद्धति के आजु प्रारम्भ कइनी ।
सावन १ गते से जिल्ला आ आवेवाला भादो १ गते से उच्च अदालत मे ई पद्धति लागू होखेके तइयारी बा ।
उ अवसर मे प्रधानन्यायाधीश जबरा १० बरीस के योजना सफल भईला मे खुशी व्यक्त करत जलदी, गुणस्तरीय आ प्रभावकारी न्याय सम्पादन के माध्यम से न्याय मे सभी के सहज पहुँच के सुनिश्चितता करे खातिर ई पद्धति प्रभावकारी भईल बतवनी ।
उ अदालत उपर के आस्था एवं विश्वास अभिवृद्धि करेके उद्देश्य से ई पद्धति लागू कईल स्पष्ट करत अदालत मे आवेवाला विवाद के प्रकृति, विषयवस्तु, विवादित प्रश्न आ निरूपण होखेवाला विषय तथा विषयवस्तु के गाम्भीर्यता, कारवाही मे लागेवाला समय के आधार मे मुद्दासब फरक–फरक प्रकृति के होखेवाला भईला से फरक प्रकृति के मुद्दा के खातिर व्यवस्थापन पद्धति जरुरी पडल बतवनी ।
प्रधानन्यायाधीश जबरा मुद्दा के जरुरत एवं सूचनाप्रविधि मे आधारित प्रभावकारी व्यवस्थापन के माध्यम से काम कारवाही के पूर्वानुमान योग्य आ जलदी सहज बनावे के सैद्धान्तिक अवधारणा के जग मे ई पद्धति के विकास भईल भी जानकारी देहनी ।
उ सूचनाप्रविधि के प्रयोग आ समय के अनुशासन हि ई पद्धति के मूल आत्मा भईला से एकर सफल कार्यान्वयन के खातिर सरोकारवाला निकाय से सार्थक आ अर्थपूर्ण सहजोग के अपेक्षा कईल बतवनी ।
सर्वोच्च अदालत के मुख्य रजिष्ट्रार नृपध्वज निरौला मुद्दा के फरक व्यवस्थापन पद्धति के कार्यान्वयन से न्यायिक प्रक्रिया के पूर्वानुमानयोग्य, पक्षसब के सक्रिय सहभागिता के अवसर तथा सफट्वेयर प्रणाली से सञ्चालित भईला से न्यायिक काम कारवाही के नियन्त्रण आ निरन्तर अनुगमन के अवसर के भी सिर्जना करेके बतवनी ।
जिल्ला अदालतसब मे दर्ता होखेवाला सभी किसिम के मुद्दा मेसे शुरु कारवाही होखेवाला मुद्दा के खातिर सरल, सामान्य आ विशेष करके तीन गो आ जिल्ला अदालत मे दर्ता होखेवाला पुनरावेदन के खातिर दु गो करके मार्ग समूह निर्धारण कईल बा ।
जउना मुताविक जिल्ला अदालत मे शुुरु कारवाही होखेवालला मुद्दासब छ महिना से बेसी मे १८ महिना भितर आ पुनरावेदनसब मे छ महिना से बेसी मे १२ महिना भितर फैसला करेके पडि ।
उच्च अदालतसब मे दर्ता होखेवाला मुद्दा मेसे अनेकन किसिम के मुद्दासब के सरल, सामान्य आ खास करके तीन गो मार्ग समूह रहेके व्यवस्था कईल बा ।
एकरा से उच्च अदालत मे सरकारवादी पुनरावेदन आ सरकारवादी होखेवाला शुरु मद्दा छ महिना से बेसी मे १८ महिना भितर आ आउर मुद्दा छ महिना से बेसी मे १२ महिना भितर फैसला करेके व्यवस्था कईल बा ।
ई पद्दति कार्यान्वयन के खातिर सर्वोच्च अदालत के सूचना प्रविधि माहाशाखा से सफ्टवेयर निमार्ण कईले बा । उ सफ्टवेयर सञ्चालन के खातिर सीप हस्तान्तरण, जिल्ला तथा उच्च अदालत मे मुद्दा प्रवाह व्यवस्थापनसम्बन्धी एकीकृत सफ्टवेयर भी तइयार कईले बा ।
सञ्चालन होखेवाला पद्धति से मुद्दा के प्रकृति तथा विवाद मे निहित रहल कानुनी सवाल तथा विषयवस्तु के गाम्भीर्यता के आधार मे अनेकन मार्ग समूह मे विभाजन आ कार्यतालिका तइयार करके सम्बन्धित पक्ष के उपलब्ध करावे के आ उहे मुताविक न्याय सम्पादन काम कईल जाई ।






