रौतहट के श्रीराम सुगर मिल बन्द होखे ना देवे खातिर किसान के माग

रौतहट १६ सावन

रौतहट के गरुडा नगरपालिका– ५ मे रहल जिल्ला के सबसे बडका उद्योग श्रीराम सुगर मिल्स बन्द भईल सूचना से किसान चिन्तित बनल बाडन ।

सावन ११ गते उद्योग सञ्चालक समिति एक सूचना जारी करत महम्मदपुर गरुडा मे रहल उ चिनी मिल बाध्यात्मक परिस्थिति के चलते स्थायी रुप मे बन्द भईल घोषणा कईले रहे ।

२०४९ साल मे स्थापना भईल मिल सञ्चालक समिति के बईठक से बन्द करेके निर्णय कईला के बाद मिल मे कार्यरत ३२५ कर्मचारी बेरोजगार भईल बाडन आ उहे उद्योग मे बिक्री करेके आशा से ऊँख खेती कईल किसान समस्या मे पडल बाडन ।

उद्योग बन्द भईला पर जिल्ला मे रहल १८ हजार ऊँख किसान १२ हजार बिगहा मे कईल खेती अब का होखी कहके अन्योल बढल बा ।

हरेक बरीस ऊँख खेती से रौतहट के किसान सवा दु अरब रोपेया आर्जन कईले रहलन ।

उद्योग व्यवस्थापन से किसान, श्रमिक तथा सरोकारवाला से छलफल हि ना करके मिल बन्द कईल कहत ऊँख उत्पादक संघ रौतहट आपत्ति जनवले बा । एकतर्फी तरिका से कईल उद्योग बन्दप्रति सरकार भी चासो देखावे के संघ के कहनाम बा ।

उ चिनी मिल मे बारा आ सर्लाही के किसान भी ऊँख बेंचत रहलन ।
८ बिगहा मे ऊँख खेती कईल वृन्दावन नगरपालिका ४ के किसान होसनारायण राय यादव मिल बन्द भईल सूचना से चिन्तित बा ।

‘२०७१ साल से ऊँख के पाँच लाख रोपेया लेवेके बाँकी बा । अब उ पईसा कहिया, के दि जानकारी नइखे’ उ कहनी ।
गरुडा २ के फेकन सहनी के पीडा भी अईसने बा । ४ बिगहा मे ऊँख खेती कईल सहनी से भी चिनी मिल से २ लाख रोपेया से बेसी लेवेके बाँकी बा ।

चिनी मिल बन्द होखे ना देवेके आ किसान के रकम भुक्तानी करा देवे खातिर सरकार से पहल करेके किसान के कहनाम बा ।

स्थापनाकाल के ६ बरीस तक मुनाफा मे चलल उद्योग ओकरा बाद निरन्तर ओरालो लागल । हरेक बरीस व्यवस्थापन परिवर्तन के चलते एकर घाटा बढे लागल रहे ।

आर्थिक बरीस २०७५÷०७६ तक मे मिल के कुल घाटा २ अरब १७ करोड ७५ लाख ५८ हजार ३७६ रोपेया बा ।

श्रीराम सुगर मिल्स करिब ७४ बिगहा क्षेत्रफल मे रहल बा । उद्योग स्थापना के समय बहुते सस्ता मे खरिद भईल जमिन के दाम अभी बढल बा ।

व्यवस्थापन से मिल के जमिन बेंच के अरबो रोपेया निकालेके आ रकम के दोसर जगहा व्यापार मे प्रयोग करेके बदनियत रहल गरुडा के उद्योगी बृजकिशोर यादव बतवनी ।

‘आजु से चार बरीस पहिले १३० करोड रोपेया किसान के मात्र बाँकी रहे । माकिर उ समय मिल बन्द ना भईल’ गरुडा के यादव कहनी कि, ‘आजु ३२ करोड मात्र बाँकी बा ।

मिल से राखल नयाँ पार्टनर से मिल के जमिन मे आँखा गलवले बा ।’
उद्योग के ७४ बिगहा मेसे १० बिगहा जमिन मुख्य बजार आ सडक से जुडल बा जेकर चलनचल्ती के मूल्य १ बिगहा के २० करोड से बेसी बा ।

मिल व्यवस्थापन खुदे १२५ करोड रोपेया ना होखे तक उद्योग चले ना सकेके कहले बा’ कहत यादव, ‘मुख्य सडक के जमिन बेंचके रोपेया अईला के बाद १२५ करोड रोपेया तिर के फेनु उद्योग चलाई कहके ग्यारेन्टी सरकार से करेके पडि ।’

उद्योग कलकारखाना न्यून संख्या मे रहल रौतहट के सब से बडका उद्योग के बन्द होखे ना देवे खातिर सरकार से पहल करेके संघ के अध्यक्ष अशोकप्रसाद यादव बतवनी ।

मिल ई बरीस कार्यरत कर्मचारी के चार महिना से तलब तथा सञ्चयकोष के रोपेया भी देवे सकल नइखे ।

नगदे बाली के रुप मे रहल ऊँख उधार मे किन रहल मिल किसान के ३२ करोड रोपेया भुक्तानी देवे खातिर बाँकी रहल ऊँख उत्पादक संघ जनवले बा ।

अवकाश प्राप्त कर्मचारी के ७० लाख रोपेया से बेसी रोपेया भुक्तानी देवेके बाँकी बा ।

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