१० बरीस से साँप से ईयारी लगवलें बोडें देवनारायण मण्डल

श्रवण साह

वीरगंज २८ सावन

साँप देखते मातर हमनी डरा जानी । साँप देखते मातर मारेके पडि कहके बहुते आदमी के मन मे आजाला ।
धनुषा मिथिलाबिहारी नगरपालिका–३ मिथिलेश्वर मौवाही के ३२ बरीस के देवनारायण मण्डल साँप के संरक्षण मे १० बरीस से दिनरात एक करके खटल बाडन ।

उ गाँव–गाँव मे पुग के साँप मारेवाला आदमी के साँप के महत्व सम्झावत आईल बाडन । साँप संरक्षण मात्र ना होके धनुषा के धनुषाधाम मे रहल वन संरक्षण करेके अभियान मे भी मण्डल लागल बाडन ।

मण्डल एक दशक के समय मे ३ हजार से बेसी साँप के उद्धार कईले बाडन । ई समय मे उ कैयन लोपोन्मुख प्रजाति के साँप के भी उद्धार कईले बाडन ।

सूर्यनाग, घोरकरैत कहेवाला व्यान्डेड करैत लगायत लोपोन्मुख साँप के उद्धार करके धनुषाधाम वन मे पुर्नवास करावल मण्डल बतवले बानी । फोर्सटेन्स क्याट स्नेक, कमन टी स्नेक आ वाइन स्नेक के दु गो प्रजाति व्राउन आ ग्रिन स्नेक (जउना के तराई मे सुगवा साप कहके चिन्हल जाला) के भी उ उद्धार कईले बाडन ।

केहु के घर मे साँप बा कहके खबर मिलते मातर मण्डल तुरून्त जरुरी स्रोत साधन लेके उहाँ उद्धार करे पुगेलन । उ हरहमेशा आपन झोरा मे साँप पकडेवाला हुक (साँप पकडेमे प्रयोग होखेवाला स्रोत साधन ) रखले रहलन ।

सन् २००८ पहिलका बेर भारत के आग्ररास्थित रोनाक्सा नामक जगहा मे एक जने के घर से अजिङगर साँप पकडले रहनी । उ समय उनकर कार्यालय साँपसब के संरक्षण करेके कार्जक्रम रखले रहे ।

आपन कार्यालय मे व्यवस्थापन ओरी काम करत आईल देव साँप पकडे जाएवाला आउर कर्मचारीलोग सँगे जात रहनी । उ साँप पकडेके कायदा मण्डल भी सिखनी ।
एकदिन एगो घर मे अजगर साँप बा कहके रोनाक्सा से फुन आईल । उ दिन मण्डल भी साथे गईनी । आजु हम पकडेम कहनी । सहकर्मीलोग से सिखल कला प्रयोग करके पहिलका बेर अजगर साँप पकडल उ बतवनी ।

‘उ हमर खातिर जिन्दगी के सबसे खुसी के क्षण रहल,’ कहत उ, ‘हरदम साँप के दुर से देखले रहनी । पहिलका बेर अजगर हि पकडेके पडल । हम त सुरुमे बहुते काँपल रहनी ।’
उनकर अजगर पकडेके कउनो तइयारी ना रहे । ‘हमर काम देख के यु डिड वेल कहत हमर सहकर्मी पिठी थपथपईले रहलन,’ मण्डल कहनी ।

मण्डल अभी धनुषा, सिराहा, महोत्तरी लगायत के जगहा मे साँप पकडे जालन । कउनो भी समय काठमाण्डु भा आउर कउनो जगहा मे गईल समय साँप देखला पर उहाँ से भी उद्धार कईल कैयन अनुभव उनका लगे बा ।

केहु आपन घर मे साँप बा कहके फुन कईला पर उ सब से पहिले कहेलन साँप के ना कहुँचाई, बँचा के राखी ।
‘हमनी के समाज मे जहरीला प्रजाति के साँप होखो भा बिना जगहरीला देखते मातर मारेके चलन बा । कभोकाल त हमरा उद्धार करे पुगे से पहिले हि आदमीसब साँप के मुवा देले रहेलन,’ कहके बतवनी ।

वितल १० बरीस से साँप संरक्षण मे लागल मण्डल ओहिमे सीमित नइखन । उ साँप जईसन आउर जीवजन्तुसब के संरक्षण करेके मर परावेलन । मण्डल गरूड, लाटोकोसेरो, कछुवा, निलगाई, अजगर साँप लगायत के पशुपंक्षी चराचुरूंगी के उद्धार मे खटेलन ।

मण्डल के मुताविक धनुषाधाम जंगल मे २५ से ३० के संख्या मे निलगाई बा । ई विश्व मे लोपोन्मुख प्रजाति के जनावर मेसे एक ह । साँप उपर मण्डल के माया आ ओकर संरक्षण मे दिनरात खटल देखला पर उनका के कैयनलोग साँप के साथी कहत आईल बाडन ।

‘कउनो कउनो समय जहरीला साँप के सहजे पकडके सुरक्षित जगहा मे लेगईला पर उहाँ के स्थानीयलोग अपने त हमनी दुश्मन मानल जीव के भी साथी बनावल कहेलन,’ मण्डल हँसत कहेनी, ‘साँप के असल साथी बानी अपने कहेलन ।’

साँप के मारेवाला हमनी के प्रवृत्ति आपन वार्ड के मण्डल संरक्षण कईल देखके परिवर्तन कईल वार्ड अध्यक्ष श्यामबाबु मण्डल बतवनी । ‘जहाँ हमनी साँप मारत रहनी । अभी आके कईसनो जहरीला साँप भईला पर भी मण्डल के फुन करके बोलावेन, मण्डल भी तुरून्त पुगेलन,’ कहत उ ‘बडका गर्व के विषय ह हमनी के खातिर कि हमनी के वार्ड के एक युवा प्रकृति के संरक्षण मे लागत ओकर महत्व बुझावेके काम कर रहल बाडन ।’

प्राकृतिक संरक्षण मे जुटल मण्डल के खुदसब हरसमय सहजोग करे खातिर तइयार िरहल उ बतवनी । ठेरास्थित विद्यालय मे पढत समय से हि मण्डल के जंगल आकर्षित करत रहे । स्कुल ओरईला के बाद गाँव लगे रहल धनुषाधाम जंगल मे जात रहनी ।

‘जंगल भितर रहेके आ घुमेमे खुब मजा आवत रहे,’ उ कहनी । एसएलसी के बाद उ कमर्स पढेके चाहत रहनी । आर्थिक अवस्था बढिया ना भईला से पढाइ छोडेके पडल । उ काम के खोजी मे भारत के दिल्ली गईनी । उहाँ पुग के इन्कम टेक्स अफिस मे काम करे खातिर एक जने वकिल के कार्यालय सहजोगी बनलें ।

पईसा कमाए लागला के बाद उ दिल्ली के एक क्याम्पस मे भर्ना भईनी । आइकम उत्तीर्ण करके बिकम मे भर्ना भइनी । इन्कम टेक्स आ सेल्स टेक्स अफिस मे काम करत गईला पर मण्डल के चिनजान एक जने चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट से भईल । उ चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट दिल्ली क्षेत्र मे वाइल्ड लाइफ एसओएस ‘सेभ आवर सोल’ नाम के संस्था चलावत रहनी ।

मण्डल के ई क्षेत्र मे काम करे खातिर अफर कइनी । बाल्यकाल सपना पूरा होखेके सोंच के खुसी भईनी । ‘उनकर उ अफर सुन के हमरा चाहल काम मिलल महसुस भईल,’ कहत उ, ‘जंगल सँगे के नाता फेनु जुडेवाला भईल कहके हम खुसी भइनी ।’ ओकरा बाद उ उ संस्था मे काम करे लगनी ।

सन् २००६ से मण्डल आगरा मे रहल उ संस्था मे २४ घण्टा काम करे लगनी । करिब १ हजार जंगली जनावर के बीच मे रहेके, खाना खाएके, जनावर सँगे उनकर भावनात्मक सम्बन्ध जुडल । धिरे धिरे उ उलोग के हाउभाउ, व्यवहार बुझे लगनी । उहाँ मुख्य रूप मे भालु, निल गाई, हरिण, बाँदर, लंगुर, खरायो, हाथी आ अनेकन प्रजाति के साँपसब रहे ।

‘उलोग के बीच मे रहके काम कईला पर जंगली जनावर के गतिविधि के बारे मे हम बढिया ज्ञान हासिल कइनी,’ कहके बतवनी । पशुपंक्षीलोग घायल भईला पर उलोग के ईलाज कईसे करेके, अनेकन प्रजाति के साँपसब के कईसे उद्धार करेके कहके कला उहें ससे सिखनी ।

आगरा मे रहला पर हरेक बरीस २८ दिन के छुट्टी मनावे खातिर उ आपन गाँव मिथिलेश्वर मौवाही आवत रहनी । सन् २०१२ मे उ छुट्टी मे घर आईल समय धनुषाधाम जंगल देखे गईनी । बाल्यकाल मे जईसन घना जंगल उहाँ ना रहे । उनका पहिले के ईयाद झल्झल आईल ।

उहे बरीस से परदेश मे रहके प्राकृतिक वस्तु संरक्षण कईला से भी आपन देश के छोटा छोटा जीवजन्तु के जोगा के संरक्षण करेके अठोट लेहनी । ‘भारत के खातिर काम कईला से सभी आपन देश, आपन जिल्ला के जंगल आ जनावर के खातिर काम करेके पडि कहके सोंचके उहाँ के सभीकुछ छोड के इहाँ आके रहेके निर्णय कइनी,’ मण्डल के कहनाम बा ।

उ समय मे धनुषा के यदुवंश झा वन मन्त्री आ धनुषा सबैला के वज्रकिशोर यादव वन विभाग के महानिर्देशक रहनी । मण्डल उ दुनु जने से भेटकरके धनुषाधाम के जंगल के बारे मे छलफल कइनी । मन्त्री भी धनुषाधाम जंगल के संरक्षण करेके पडि कहके सकारात्मक रहनी । उ आउर उत्प्रेरित भइनी ।

बाद मे जिल्ला वन कार्यालय धनुषा के उ धनुषाधाम वन के संरक्षण करे खातिर सहजोग कइनी । ओकरा बाद मण्डल २०६९ फागुन २० गते वातावरण तथा वन्यजन्तु संरक्षण के खातिर मिथिला वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट नामक एगो संस्था जिल्ला प्रशासन कार्यालय धनुषा मे दर्ता करवनी ।

वातावरण आ वन्यजन्तु सम्बन्धी जनचेतना कार्जक्रम, २४ घन्टा वन्यजन्तु उद्दार आ पुनर्वास के कार्जक्रम, धनुषाधाम संरक्षित वन के दिगो विकास लगायत के काम उहे ट्रष्टमार्फत संचालन करे लगनी । आ अभी उहे ट्रष्टमार्फत उ जीवजन्तु के संरक्षण मे खटत आईल बाडन ।

साँप काटला के बाद ओझा के बोला के जहर हटावे के कुप्रथा तराई मे अभी भी बा । ओईसन जगहासब मे मण्डल खुदे पुगेनी । आ साँपदंश से बँचे सकेवाला उपाय सिखईला के साथे साँप के पारिस्थितिक प्रणाली मे रहल महत्व के विषय मे बतावेनी ।

४ प्रतिशत जहरीला साँप से मात्र आदमी आ आउर जन्तु के काटेलन । उ मेसे भी ९७ प्रतिशत जहरीला साँप मात्र काट रहल तथ्यांक रहल उ बतवनी । उनका मुताविक साँप के संरक्षण करे सकला पर मानव सभ्यता के हि फायदा पुगाई ।

जहरीला साँपसब के जहर एण्टी स्नेक भेनम, मर्फिन से भी कारगर पेन किलर, ब्रेस्ट क्यान्सर लगायत के खातिर उपयोगी रहल उ बतवनी । ‘साँप बसोबास करेवाला क्षेत्र मे २७ प्रतिशत तक किराफट्यांग्रा नष्ट करेवाला भईला से एकरा से बालिनाली मे किरा के प्रकोप कम करेला, खेत मे मुस लागे ना दि,’ कहके बतवनी ।
अईसे देहला पर जहरीला साँप के मारेके नाममे हमनी आउर साँप के संख्या मे वृद्धि करेमे सहजोग करत आईल मण्डल के कहनाम बा ।

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