तर गईली

पुनम फोन कर के फफक उठली,”जल्दी आई सभी, माई बुझाता गड़बड़आ गई ल”।

ई क्इसे हो गई ल? सभी पुछत रहे।
अब का कहे के बाद, एहे संयोग ह, हंसते-खेलते आदमी चल गई ल।

सांच पूछी त, एगो पवितर आत्मा होखेला, जाकर अइसन मौत होखेला। भीड़ में जुटे लोग के मुंह से एक तरह के बात निकलत रहे।

ओही में से केहू कहत रहे”आजकल एको घंटा अस्पताल जाए पर लाख रुपया साफ रहे, खासकर बुढ लोग के, तुरंत आई सी यू में डाल के बिल बना दिहित”।

धन-जन दूनो लूटा जाता, खूब स्थिति हो गई ल बा, आखिर का करो आदमी। कपारे पड़ गई ला प कुछ बुझातो न्इखे।
हां! भाई! सांच पूछी त, अपना से तर गई ली। सभी कुछ न कुछ कहत रहे। जतना मुंह ओतने बात।

ई सब सुन के पूनम मन में सोचे लगली”हमार घर-दुआर मन सभ सुन हो गई ल, हम क्इसे कह दी, माई मुई के तर गई ल”।आपने एह प्रश्न के उतर ऊ आजो ले ढूंढते बाडी”।माई मू के क्इसे तर गई ल?

पूनम आनंद
पटना

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