पुराना पुस्ता से कईल अविष्कार नयाँ पुस्ता भोर पार रहल
मेवालाल यादव
रौतहट ०१ फागुन
आधुनिक प्रविधि ओरी के बढल आकर्षण आ सुविधाभोगी प्रवृत्ति के चलते रौतहट मे अनेकन किसिम के घरेलु प्रविधि लोप होत गईल बा । परम्परागत रूप मे प्रयोग करत आईल घरेलु मेसिन तथा लोहा के औजारसब लोप होत गईल बा ।
करिब दु दशक अगाडि तक बहुते चलनचल्ती मे रहल घरेलु मेसिन के प्रयोग धिरे धिरे घटत गईला के बाद स्थानिय पुरनियालोग चिन्ता करे लागल बाडन ।
घरेलु मेसिन लगायत के परम्परागत साधन भी लोप होत गईाल के बाद ई क्षेत्र के मौलिक सभ्यता हि संकट मे पडल मर्यादपुर के राम प्रवेस यादव बतवनी ।
हमनी के सभ्यता का ह कहके बात के बोध करावेवाला ई चिजसब हि भुलाए लागला के बाद हमनी के मौलिक संस्कृति आ सभ्यता भी संकट मे पडल बा ।
स्थानीय स्रोतसाधन एवं स्थानीय सीप से बनल घरेलु मेसिन से ई क्षेत्र के परम्परागत जनजीवन, कला आ सामाजिक अवस्था के विषय मे भी अध्ययन कईल जा सकता ।
लोप होत जा रहल ई मेसिन के संरक्षण आ प्रवद्र्धन करके ईसब के प्रयोग के बढावा देवेके बात मे स्थानीयलोग के जोड रहल बा । खास करके सामूहिक रूप मे प्रयोग करेवाला घरेलु उपकरण के विशेषता सामाजिक सद्भाव मे अभिवृद्धि कईल भी रहल जानकारलोग के तर्क बा ।
सामूहिक प्रयोग के माध्यम से घरेलु उपकरण आपसी सम्बन्ध मे निकटता लियाके सामाजिक सहजोग एवं सद्भावना आ भाइचारा मे अभिवृद्धि करेके उलोग के कहनाम बा । परम्परागत ज्ञान के उपयोग के आधारशिला मे वर्तमान विश्व ई छलाङ मरले बा । उहे चलते भी ई ज्ञान तथा सीप के संरक्षण करेके जरुरत बा ।
परम्परागत ज्ञान के अभिलेखीकरण भईल अभी के समय मे बहुते महत्व भइल बा । समुदाय मे रहल परम्परागत ज्ञान के संरक्षण के महत्व दिनपर दिन बढ रहल अवस्था मे राज्य से उचित नीति निर्माण करत कार्यान्वयन ओरी जाएके देखल गईल बा । राज्य से परम्परागत ज्ञान संरक्षण के वातावरण तईयार करके सभी समुदायसब से साथ देवेके पडि ।
परम्परागत ज्ञान के फायदा लेवे खातिर आ आपन सीप तथा ज्ञान सुरक्षित राखे खातिर समुदाय सजक भईल जरुरी बा । परम्परागत ज्ञान लोप भईला पर समुदाय से मात्र नोक्सानी ना बेहोर के देश के हि नोक्सानी सहेके पडि ।
हमनी के छरपष्ट रहल परम्परागत तौर तरिका, सीप, कला, सिर्जना, आ प्रविधि के संरक्षण कईल हमनी सभी के साझा दायित्व ह आ आजु के जरुरत भी ह ।






