भोजपुरी आन्दोलन लेके लुम्बिनी प्रदेश के मुख्यमन्त्री कुल बहादुर केसी के बुझावल गईल ज्ञापन पत्र

लुम्बिनी ३१ भादो
भाषा आयोग द्वारा लुम्बिनी प्रदेश में भोजपुरी के सरकारी कामकाज के भाषा के रूप में सिफारिश ना कईला के वजह से लुम्बिनीवासी आन्दोलित भईल बाडन ।
आन्दोलन सामाजिक संजाल आम संचार के माध्यम पर वायरल बन गईल बा ।
आन्दोलन के ही दौरान भोजपुरी भाषा आन्दोलन संघर्ष समिति लुम्बिनी प्रदेश के मुख्य संयोजक शिवनंदन जयसवाल मंगलवार लुम्बिनी प्रदेश सरकार के मुख्यालय पर जा के मुख्यमन्त्री कुल बहादुर केसी के एक ज्ञापन पत्र बुझइले बानी । उ ज्ञापन पत्र भाषा आयोग काठमाण्डु आ नेपाल सरकार तक पहुंचावेके जयसवाल आग्रह कइले रहनी ।
ज्ञापन पत्र बुझत लुम्बिनी प्रदेश सरकार के मुख्यमन्त्री कहनी की भाषा आयोग काठमाण्डु के आ नेपाल सरकार के हम ध्यानाकर्षण करवाएम, प्रक्रिया आगे बढ़ाएम । अन्य मन्त्री भी एकदम सकारात्मक रहल बाडन ।
भौतिक पूर्वाधार विकास मन्त्री साहस राम यादव बतइनी की भोजपुरी भाषा के लुम्बिनी प्रदेश में सरकारी कामकाज के भाषा के रूप में समावेश करावे खातिर आगे हम प्रदेश सरकार से आ ऊपर तक भी लगातार प्रयास करेम ।
कृषि, खाद्य प्रविधि तथा भूमि व्यवस्था मन्त्री सुमन शर्मा रायमाझी बतइनी की उनकर घर बीरगंज में रहले के कारण से उनकर भी मातृभाषा भोजपुरी रहल बा ।
एह नाते भोजपुरी भाषा के स्थापित करे खातिर मंत्री रायमाझी सदन आ मन्त्रालय मे आवाज उठाके योगदान देवेके वादा कइनी ।
ज्ञापन पत्र बुझावे के क्रम में उपस्थित नवल परासी जिला के सांसद आ मन्त्री अजय शाही बताइनी की नवलपरासी रुपन्देही के भाषा भोजपुरी हवे ।
एह नाते लुम्बिनी प्रदेश में भोजपुरी के सरकारी कामकाज की भाषा बनावल जरूरी बा । मौजूदा वक्त पर भोजपुरी भाषा आन्दोलन संघर्ष समिति लुम्बिनी के सदस्य गण पूनम जयसवाल, सीताराम मौर्या विद्यार्थी, शैलेन्द्र धरिकार, शिवम जयसवाल आदि लोग सहभागीता रहल रहे ।






