गृहिणी के महत्व…..

पहिला बार खुद आपन कीमत जनली।बी

मार परला के बाद खुद के पहचनली।

घर परिवार तनिको भाव नाहीं देत रहे।

हम अनमोल बानी आज ससुई भी मनली।

बानी हम अस्पताल में एगो बाई खोजाइल।
बहुते भाग दौड़ कइला के बाद भेंटाइल।
तई तापर भइल एक महीना के तनखाह के।
अलग अलग काम के लंबी लिस्ट बनली।

झाड़ू पोंछा करे खातिर रेट लागल दू हजार।
तीन हजार में कपड़ा धोवे प भइल तैयार।
खाना बनावे खातिर चालिस गो सौ टकिया।
चाय नाश्ता बनावे के हजार रुपइया ठनली।

इहो देला पर बाई टिके ना छव माह से बेसी।
बीस बरिस से इहे सब काम करीला हरमेशी।
सभे कहत रहे कि हम कुछउ ना कमाईला।
हम दिल पर ना लिहनी कबहूं बुरा ना मनली।

कमात ना रहीं बाकिर घर के पइसा बचवनी।
परिवार के सहेजे के आपन करतब निभवनी।
बरमेसर कहेले कि आदर करीं सब गृहिणी के।
दिन रात मेहनत के कबहूं पइसा ना गनली।

ब्रह्मेश्वर नाथ पांडेय, ग्राम+पो-महुआंव, जिला-भोजपुर, बिहार।

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