बारा–पर्सा औद्योगिक करिडोर के उद्योगसब मे २४ घण्टा भितर विद्युत् लाइन जोडेके माग
बारा–पर्सा औद्योगिक करिडोर के उद्योगसब मे २४ घण्टा भितर विद्युत् लाइन जोडेके माग

वीरगंज १७ पुस
वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ बारा–पर्सा औद्योगिक करिडोर के आधा दर्जन उद्योगसब मे २४ घण्टा भितर पुनः विद्युत् लाइन जोडेके माग कईले बा ।
संघ मंगर के दिने आयोजना कईल पत्रकार सम्मेलन मे अध्यक्ष अनिलकुमार अग्रवाल उद्योगसब के विद्युत् लाइन काटला के चलते देशभर हो रहल भौतिक पूर्वाधार निर्माण लगायत के कामसब भी अवरुद्ध हो रहला से उद्योगसब मे २४ घण्टा भितर आपूर्ति करेके माग कईनी । ‘अईसन ना कईला मे मन्दी के मार से सुरु कईल उ उद्योगसब हरदम के खातिर बन्द होखे सकेके आ उहाँ कार्यरत २० से २५ हजार श्रमिक रोजगारी गुमावेके दिन दुर नईखे,’ कहत उ, ‘उ उद्योगसब मे लगानी कईल बैंक भी समस्या मे परी आ समग्र अर्थतन्त्र मे एकरा से गम्भीर नकारात्मक असर परेके निश्चित बा ।’
अभी के समस्या के निकास के खातिर पूर्वन्यायाधीस के संयोजकत्व मे आयोग बनावेके आश्वासन अईला से ई विवाद के तत्काल सुल्झावेके माग भी अग्रवाल कईनी । उ विद्युत् महसुल मे नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के असान्दर्भिक आ अव्यवहारिक नीति के चलते ई समय औद्योगिक ग्राहकसब अन्याय आ अन्योल मे परल कहत प्राधिकरण अभी तक २३ गो उद्योग के लाइन काटल आ उ मेसे पर्सा÷बारा औद्योगिक कोरिडोर के बडका उद्योगसब भी रहल बतवनी ।
‘लाइन काटल उद्योग के उत्पादन बन्द भईला पर कामदार कर्मचारीलोग सडक मे उतरल अवस्था बा,’ कहत उ , ‘आर्थिक मन्दी से उद्योग व्यापार धराशायी होखेके अवस्था मे पुगल समय एकरा से एक ओरी उत्पादन के आउर अनिश्चित बनवले बा आ दोसर ओरी औद्योगिक वातावरण बिगाडेके जोखिम बढल बा ।’
संघ के द्वितीय उपाध्यक्ष माधव राजपाल उद्योगीलोग डेकिकेटेड आ ट्रंकलाइन से खपत कईल महसुल कभो ना तिरेम ना कहल बतवनी । उपभोग हि ना कईल विद्युत् के महसुल जबर्जस्ती तिरारेवे खोजल अन्यायपूर्ण ह कहके निजी क्षेत्र के अडान रहल उ बतवनी ।
राजपाल लोडसेडिङ के समय मे नेपाल विद्युत् प्राधिकरण २०७० कातिक ३ गते डेडिकेटेड÷ट्रंक फिडर से विद्युत् लेवे खातिर इच्छुक ग्राहक के प्रिमियम महसुल मे दैनिक २० घण्टा से बेसी विद्युत् आपूर्ति देवेके कहके सूचना जारी कईल बतवनी । ‘प्राधिकरण के तत्कालीन सञ्चालक मनोजकुमार मिश्र के संयोजकत्व मे बनावल गईल अध्ययन समिति के सिफारिस के आधार मे प्राधिकरण के सञ्चालक समिति के ०७२ असाढ १२ गते बईठल बईठक से प्रिमियम शुल्क तोकला पर भी महसुल तोकेके आधिकारिक निकाय विद्युत् महसुल निर्धारण आयोग २०७२ पुस २९ गते नयाँ शुल्क निर्धारण कईले रहे,’ कहत उ, ‘तत्कालीन उर्जा सचिव दिनेश घिमिरे संयोजक रहल समिति महसुल निर्धारण अयोग शूल्क तोकेसे पहिले (२०७२ पुस २९ से पहिले) आ देश लोडसेडिङमुक्त भइला के बाद (२०७५ जेठ १ के बाद) महसुल मे प्रिमियम शुल्क लेवे ना मिलेके सुझाव देहले रहे ।’ डेडिकेटेड आ ट्रंक लाइन के महसुलसम्बन्धी मूल विवाद इहे समय के रहल उ बतवनी ।
संघ के पूर्वअध्यक्ष एवम् नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के केन्द्रीय सदस्य सुबोधकुमार गुप्ता ०७२ पुस २९ से पहिले आ ०७५ जेठ १ गते के बाद के महसुल आ डेडिकेटेड÷ट्रंक ना मागल आ लोडसेडिङ पालन कईल उद्योग ना तिरेम कहल शतप्रतिशत उचित रहल बतवनी । उ लोडसेडिङ पालना कईल उद्योग प्राधिकरण से टीओडी मिटर के डाटा से लोडसेडिङ मे विद्युत् खपत कईल प्रमाणित कईला पर महसुल तिरेम कह रहल अवस्था मे सरकार आ प्राधिकरण तत्काल समस्या के समाधान के रास्ता मे ना लागके अँझुरावेके काम मात्र कर रहल आरोप लगवनी ।
‘प्राधिकरण से २०७२ सावन महिना से आ २०७५ जेठ १ गते लोडसेडिङ अन्त्य घोषणा भइला के बाद भी २०७७ असाढ तक प्रिमियम महसुल के बिल पठावल हि अभी के विवाद के जड ह,’ कहत उ, ‘समस्या के निकास के खातिर पूर्वन्यायाधीस के संयोजकत्व मे आयोग बनावेके आश्वासन अईला से ई विवाद के तत्काल सुल्झावेके पडि ।’
संघ के महासचिव आशीष लाठ उद्योगसब के विद्युत् लाइन काटला के चलते देशभर हो रहल भौतिक पूर्वाधार निर्माण लगायत के कामसब भी अवरुद्ध हो रहल बतवनी ।
उ देश के पूँजी बजार के सूचकांक हरेक दिन अधोगति ओरी अग्रसर रहल आ बैंकसब से लगानी करेके पईसा प्रशस्त भईला पर भी लगानीकर्ता के कमी बजार मे व्याप्त रहल बतवनी । ‘आर्थिक अवस्था ओरालो लागल समय आर्थिक क्रियाकलाप के निर्बाध चलायमान बनावे खातिर देश मे चल रहल उद्योगसब के सरकार आउर सुविधा प्रदान करके उद्योग के क्षमता अभिवृद्धि कईला के बदले औद्योगिक क्षेत्र के हि धराशायी बनईला पर देश के आर्थिक अवस्था कहाँ जाई आ एकर जिम्मेवार के होखी ?,’ उ कहनी, ‘ई विवाद तत्काल समाधान करत उद्योग सञ्चालन के वातावरण बनावे खातिर समस्या के निकास मे सहजीकरण के खातिर नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, नेपाल उद्योग परिसंघ, नेपाल चेम्बर अफ कमर्स, नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के भी सहभागिता रहेवाला किसिम से एगो अलगे उच्चस्तरीय समिति गठन करेके पडि ।’
उ उद्योगी व्यवसायी के कमीकमजोरी भईला पर कारबाही करेके माकिर हजारों परिवार पोसल उद्योगसब हचुवा के भर मे बन्द करके मजदुर आ उलोग के परिवार के सदस्य के मुस्किल मे पारल अनुचित भईल बतवनी ।





