मधेश भवन मे ३ बरीस से राखल साढे ४ हजार साइकल कबाड बन रहल

मधेश भवन मे ३ बरीस से राखल साढे ४ हजार साइकल कबाड बन रहल

जनकपुरधाम ७ जेठ

मधेश भवन के गोदाम मे ३ बरीस से कबाड बन रहल साइकल संख्या अबगे यकिन भईल बा । गोदाम मे साइकल ४ हजार ५५७ गो यकिन भईल मुख्यमन्त्री कार्यालय जनवले बा ।
भवन मे ३ बरीस से कबाड जईसन राखल साइकल गिने खातिर बितल ४ फागुन मे मुख्यमन्त्री कार्यालय उपसचिव विपीन ठाकुर के संयोजकत्व मे ७ सदस्यीय समिति गठन कईल रहे । समिति सभी साइकल के संख्या यकिन करके प्रदेश सरकार के प्रतिवेदन बुझवले बा ।
प्रतिवेदन मे समिति २०७५÷०७६ से एने भईल साइकल खरिद आ वितरण आ मौजदात संख्या यकिन कईल बा । तीन चरण मे भईल साइकल खरिद, वितरण आ मौजदात सभी विवरण मिलान भईल समिति के एक सदस्य बतवनी ।
‘सुरु से खरिद आ वितरण आ बाँकी रहल साइकल के संख्या मिलान भईल बा । एगो भी उपर निचे ना भईल’, समिति के एक सदस्य कहनी ।
‘मुख्यमन्त्री बेटी पढाव, बेटी बचाव अभियान’ अन्तर्गत तत्कालीन लालबाबु राउत सरकार किलास ८ मे पढेवाला लईकी के वितरण करे खातिर साइकल किनले रहे । भ्रष्टाचार काण्ड मे पडला के बाद २०७८ मे अलपत्र परल । समिति प्रतिवेदन बुझईला पर भी साइकल का करेके कहके बारे मे मुख्यमन्त्री कार्यालय अभी भी अन्यौल मे बा ।
विशेष अदालत साइकल काण्डसम्बन्धी भ्रष्टाचार मुद्दा के बितल ११ माघ मे कईल फैसला के पूर्णपाठ आइल नईखे । अख्तियार से लेगईल साइकल सम्बन्धी फाइलसब भी अभी तक कार्यालय मे ना अईला पर बाँकी रहल साइकल आ ओकर आपुर्तिकर्ता के भुक्तानी का करेके कहके विषय निष्कर्ष ना लागल मुख्यमन्त्री कार्यालय के कामु प्रमुख सचिव लोकनाथ पौड्याल बतवनी ।
‘मुद्दा के फैसला के पूर्णपाठ आईल नईखे । कुछ फाइल भी अख्तियार मे बा । जब तक ई सभी कार्यालय मे ना अईहें, तब तक कुछ कहल ना जा सकता’, कामु प्रमुख सचिव पौड्याल कहनी, ‘अभी आपूर्तिकर्ता के भुक्तानी भी ना कईल जा सकता । वितरण कईल भी ना जा सकता ।
उ खुद एक महिना पहिले मात्र जिम्मेबारी मे अईला से ई विषय बुझेके काम कर रहल बतवनी ।
मधेश सरकार तिसरका चरण मे आर्थिक बरीस ०७७÷७८ मे १० हजार साइकल खरिद कईले रहे । ११ असार २०७८ मे ८ करोड ४४ लाख मे स्यान्यो इन्टरनेसनल प्रालि पुतलीसडक से खरिद कईल साइकल बाँट रहल समय अख्तियार १७ सावन २०७८ मे विशेष अदालत मे मुद्दा दायर कईले रहे ।
मुद्दा दुसरका चरण मे १७ हजार २३८ आ तिसरका चरण मे भईल १० हजार साइकल खरिद प्रकरण उपर रहे । सरकार आ कर्मचारी डरईला के बाद साइकल वितरण अन्योल बनल । १० हजार मेसे स्टोर दाखिला करके ३ हजार २६७ साइकल वितरण भईल रहे । जेकर आपूर्तिकर्ता कम्पनी के २ करोड ९३ लाख भुक्तानी भईल । बाँकी स्टोर दाखिला ना करके वितरण करेके काम चलत रहे ।
४ हजार ५५७ गो साइकल गोदाम मे रह गईल । आपूर्ति कम्पनी के ५ करोड ६८ लाख भुक्तानी बाँकी रहल कार्यालय जनवले बा ।
मोट रोपेया भुक्तानी अडकला के बाद आपूर्तिकर्ता घुम रहल बाडन । राखल साइकल रद्दी बन रहल बा । समिति से गणना करे खातिर पुगल समय गोदाम मे रहल साइकल पर धुरा आ मकरा के जाल से कबाड जईसन देखल गईल रहे ।
‘लगभग सभी साइकल के टायर हावा ना भईला से खराब भइल जईसन देखल गईल बा । समय मे मर्मत सम्भार करके वितरण भईला पर काम लागी ना त खराब होत जाई’, गन्ती मे पुगल मुख्यमन्त्री कार्यालय के एक कर्मचारी कहलन ।
सुरु मे मधेश सरकार के ब्राण्ड बनल साइकल वितरण अभियान भ्रष्टाचार मे पडला के बाद बहुते विवादित बनल रहे । कार्जक्रम विवादित बनला के बाद कर्मचारी भी डराईल बाडन । ओहिसे कर्मचारीलोग सावधानीपूर्वक राखल साइकल किनारा लगावेके मनस्थिति मे बाडन ।
अदालत से पूर्णपाठ आ अख्तियार से फाइल अईला के बाद प्राविधिक से साइकल के जाँच करके मात्र कउनो निर्णय लेवेके उनकर कहनाम बा । वितरण आ भुक्तानी के काम शिक्षा तथा संस्कृति मन्त्रालय अन्तर्गत रहल शिक्षा विकास निर्देशनालय से होखेके मुख्यमन्त्री कार्यालय जनवले बा ।
बोलपत्र मे गलती रहल कहत १० हजार सहित दुसरका चरण मे खरिद भईल १७ हजार साइकल ब्राण्ड बाहर के खरिद करके भ्रष्टाचार भईल दाबी सहित अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग १७ सावन २०७८ मे विशेष अदालत मे मुद्दा दायर कईले रहे ।
विशेष अदालत बितल ११ माघ मे १० थान हजार साइकल खरिद मुद्दा मे सभी के सफाइ आ १७ हजार थान खरिद मे प्रशासनिक गलती कहत मुख्यमन्त्री कार्यालय के सचिव यमप्रसाद भुषाल आ जलस्रोत तथा सिँचाइ विकास डिभिजन कार्यालय जनकपुर के तत्कालीन प्रमुख भगवान झा के दोषी ठहर कईले बा ।

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