गौर मे राइस मिल के जमिन विवाद से स्थानीय आन्दोलित
गौर मे राइस मिल के जमिन विवाद से स्थानीय आन्दोलित

रौतहट २३ फागुन
गौर नगरपालिका–३ स्थित गौर राइस एन्ड फ्लोर मिल के जमिन विवाद से तीन दिन से सदरमुकाम गौर मे विरोध तथा प्रदर्शन हो रहल बा । शुक के सबेरे स्थानीय सडक मे टायर बारके प्रदर्शन कईले बाडन ।
मिलधनी (सेयर सदस्य) आ गौरवासीबीच ४८ बरीस से जमिन के विषय मे द्वन्द्व होत आईल बा । मिलधनी कहललोग मिल के जमिन बिक्री करेके खोज रहल बाडन । स्थानीय कउनो भी हालत मे ना देवेके पक्ष मे आन्दोलन करत आईल बाडन । इहे विषय के लेके सदन मे भी बात उठल बा । नगरपालिका कुछ जमिन आपन नाम मे पास कराके बाँकी के धनी के हि देवेके सहमति कईल खबर बाहर अईला के बाद गौर के स्थानीय आन्दोलित बनल बाडन ।
मिल के नाम मे रहल ५ बिगहा जमिन मेसे मिल सञ्चालक समिति से वार्ता करके गौर नगरपालिका के नाम मे ५५ कठा निःशुल्क कर देवेके सहमति भईल नगरप्रमुख शम्भु साह पत्रकार सम्मेलनमार्फत जानकारी करईला के बाद विवाद सतह मे आईल बा । नगरप्रमुख साह नगरवासी के हित मे राखके निःशुल्क जमिन नगरपालिका के नाम मे करावे लागल दाबी कईनी । ‘जग्गाधनी के मुअब्जा स्वरुप करोडो रोपेया देवेके कह रहल बानी,’ उ कहनी, ’अभी निःशुल्क देहेम कहला पर भी छलकपट कईलख । जमिन बेंचे लागल कहके बदनाम कईलन ।’
इहे विषय के लेके बुध से गौर मे नाराजुलुस सुरु भईल बा । स्थानीय प्रमुख जिल्ला अधिकारी आ नगरपालिका के ज्ञापनपत्र बुझवले बाडन । मिल एकधुर जमिन भी बिक्री करे ना देवेके कहत मिल बचाउ संघर्ष समिति विरोध के कार्जक्रम अगाडि बढवले बा । मधेश प्रदेश सांसद नागेन्द्र साह मिल अधिग्रहण के खातिर जरुरी रोपेया प्रदेश सरकार देवेके आ ओकरा खातिर हम पहल करेके बतवनी । नगरपालिका के नाम मे ५५ कठा पास करके बाँकी के जमिन फुकुवा करेके निर्णय सार्वजनिक भईला के बाद स्थानीय आक्रोशित बाडन ।
मधेश प्रदेश के मुख्यमन्त्री सतिषकुमार सिंह विज्ञप्ती जारी करके रौतहटवासी के धरोहर के रुप मे रहल मिल के जमिन बिक्री होखे लागला मे गम्भीर ध्यानाकर्षण भईल बतवनी । राइस मिल के जमिन बिक्री होखे लागल कहत सामाजिक सञ्जाल गरमाईल बा । नगरप्रमुख साह विरुद्ध समाजिक सञ्जाल मार्फत् आक्रामक बनल बाडन ।
भारत के बजाज ग्रुप आ नेपाली के संयुक्त लगानी मे २००३ साल मे मिल स्थापना भईल रहे । मिल ३० बरीस तक सञ्चालन मे आईल रहे । अनेकन कारण से ०३३ साल मे मिल बन्द भईल । मिल सहित उ जमिन के १ सय से बेसी नेपाली तथा भारतीय नागरिक सेयरधनीलोग बाडन ।
अधिकांश के मृत्यु भईल आ भारतीय के अभी तक अत्तापत्ता ना रहल अवस्था मे नक्कली कागजपत्र के भर मे बिक्री करे लागल स्थानीय ओमप्रकाश मधेशिया के आरोप बा । मिल ४८ बरीस से बन्द होके अलपत्र अवस्था मे बा । मिल के कुछ सामानसब कबाड मे बेंचा गईल बा । २००३ साल मे गौर राइस एन्ड फ्लोर मिल के नाम मे स्थापना भईल मिल ५ बिगहा १९ कट्ठा १५ धुर जमिन छेकले बा । पिछिलका समय इहाँ स्थानीय खेलकुद के आयोजना, अनेकन मनोरञ्जनात्मक कार्जक्रम, मेला, महोत्सव, महायज्ञ करेके आ दलसब आमसभा करत आईल बा । २०६३ चईत ७ गते इहे मैदान मे तत्कालीन मधेशी जनअधिकारी फोरम आ माओवादीबीच झडप भईला पर २७ माओवादी के मृत्यु भईल रहे ।
भारतीय लगानीकर्ता दरभंगा के व्यापारी विजयप्रसाद बजाज, अरबिन्द बजाज आ गोपालप्रसाद बजाज के किर्ते हस्ताक्षर करके मिल के जमिन बेंचेके निर्णय कईल स्थानीय बिक्रान्त गुप्ता बतवनी ।
राइसमिल के नाम मे रहल कित्ता नम्बर १३९, १४०, १६३ आ ८०३ के क्रमशः ४ कट्ठा १५ धुर, १६ कट्ठा, ४ बिगहा १० कट्ठा, ९ कट्ठा करके ५ बिगहा १९ कट्ठा १५ धुर जमिन बारे स्थानीय आ जग्गाधनी कहललोग बीच ४८ बरीस से विवाद रहत आईल बा । स्थानीय जमिन अधिग्रहण करेके माग अगाडि बढावत आईल बाडन । जग्गाधनी कहललोग के कउनो हालत मे बिक्री करेके अडान राखत आईल बाडन । प्रमुख जिल्ला अधिकारी के संयोजकत्व मे गठित मुआब्जा निर्धारण समिति २०७२ वैशाख २४ गते जमिन के मुआब्जा रकम १३ करोड ५३ लाख ८२ हजार ६ सय ९७ रोपेया तोकले रहे । ओकरा खातिर गौर नगरपालिका प्रदेश सरकार से बजेट माग कईले रहे । अधिग्रहण के खातिर प्रदेश सरकार निति तथा कार्जक्रम के समय १५ करोड छुट्यवले रहे । प्रक्रिया देर भईला के चलते रोपेया ’फ्रिज’ भईल । अधिग्रहण के प्रक्रिया अभी तक अगाडि बढल नईखे । जग्गा प्राप्ति ऐन २०३४ से जग्गा प्राप्त करेके अधिकार सरकार के देहले बा ।
मिल के मुख्य सेयरधनी कहल प्रकाश शंकर श्रेष्ठ, अरबिन्द बजाज लगायत २०६६ असाढ १७ गते विरंजस्थित सिन्डिकेट हाउजिङ डेभलपर्स प्रालि के ४ करोड ५० लाख मे जमिन बिक्री कईल सार्वजनिक भईला के बाद स्थानीय निरन्तर आन्दोलन करत आईल बाडन । मिल के जमिन बिक्री करे लागल कहत स्थानीय २०६६ साल मे तत्कालीन प्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल आ सार्वजनिक लेखा समिति मे उजुरी देहले रहलन । उजुरी के बाद प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय तत्काल रोक्का करके छानबिन करे खातिर भूमिसुधार तथा व्यवस्था मन्त्रालय के निर्देशन देहले रहे । उ समय जमिन अधिग्रहण करेके निर्णय कईल रहे । अनुसन्धान के खातिर कहत अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग भी जमिन रोक्का कईले रहे । गौर नगरपालिका उ जमिन अधिग्रहण करके रंगशाला बनावेके कहत आईल बा ।






