“गम्भीर अपराध मे संलग्न बाहेक आउर के हिरासता मे ना राखल जाँव” महान्यायाधिवक्ता खरेल

काठमाण्डु १४ चईत,
महान्यायाधिवक्ता अग्नि खरेल अनेकन कारागार मे कैदी जीवन बिता रहल जेष्ठ नागरिक आ बालसुधार गृह मे रहल लईकालइकी के कोरोना भाइरस संक्रमण के जोखिम से जोगावे खातिर निवेदन के आधार मे रिहा करेके प्रक्रिया अगाडि बढा रहल बतवले बाडन ।
सञ्चारकर्मी से बात करत महान्यायाधिवक्ता खरेल कानुन के द्वन्द्व मे परके कैदी के रुप मे रहल देशभर के ८ गो बाल सुधार गृह के करिब ९ सय लईकालइकीसब रहल बतवनी । उलोग सभी १८ बरीस से कम के बाडन ।
उ मेसे ९० जने के गारजियन के निवेदन के आधार मे रिहा कईल आ आउर भी इहे प्रक्रिया से रिहा होखेके बतवनी ।
सम्बन्धित जिल्ला अदालत के आदेश से गम्भीर प्रकृति के अपराध मे संलग्न बाहेक आउर लईकालइकी के सुधारगृह से मुक्त करेके निर्णय भइल बा । उहे मुताविक सर्वोच्च अदालत भी सम्बन्धित जिल्ला अदालतसब के आदेश देहले बा ।
महान्यायाधिवक्ता खरेल जेष्ठ नागरिक सम्बन्धी विशेष ऐन आ सर्वोच्च अदालत के आदेश के भी आधार बनाके ६५ बरीस से बेसी के जेष्ठ नागरिकलोग के भी जेलमुक्त करेके कहल बतवनी । कानुन से तोकल न्यूनतम सजाय काटल सभी जेष्ठ नागरिक के जेलमुक्त करेके बतवनी ।
कारागारसब मे कैदी के संख्या घटाके संक्रमण के जोखिम कम करेके रणनीति मुताविक महान्यायाधिवक्ता खरेल बितल हप्ता सरोकारवाला के बईठक राख के जघन्य अपराध आ न्यूनतम सजाय भुक्तान करके ना ओराईल बाहेक आउर कैदी के रिहा करे खातिर सर्वोच्च अदालत के भी निहोरा कईले रहलन ।
खरेल गम्भीर अपराध बाहेक आउर सामान्य घटना के अभियुक्त के अभी के संक्रमण के जोखिम के समय मे पकड के हिरासत मे राखे से भी हाजिरी जमानी भा तारेख मे छोडेके आदेश देहले बाडन ।
उहे मुताविक सरकारी वकिल आ पुलीस से हिरासत मे भीडभाड ना करेके नीति मुताविक काम कर रहल उ बतवनी ।





