धान दिवस से पहिले हि गण्डक नहर मे आईल पानी

धान दिवस से पहिले हि गण्डक नहर मे आईल पानी

वीरगंज १२ असाढ

भारतीय पक्ष ई बरीस तोकल मिति मे धानबाली सिजन के खातिर गण्डक नहर मे पानी देवेके भईल बा । नारायणी सिँचाई व्यवस्थापन कार्यालय के सूचना अधिकृत एवम् इन्जिनियर सुरेश साह के मुताविक, भारतीय पक्ष के ई बरीस राष्ट्रिय धान दिवस के दिन किसान के रोपाइँ करेके तोकल कार्जक्रम के लक्षित करके पानी देवे खातिर पत्राचार कईला मे सकारात्मक जवाफ आईल बा ।
‘ई बरीस धान दिवस के दिन किसान से रोपाइँ करे मिलेके कहके हमनी के प्रयास रहे,’ साह कहनी, ‘एमे भारतीय पक्ष भी सकारात्मक बा, गण्डक नहर नेपाल मे प्रवेश करेवाला शून्य आरडी अर्थात् पर्सा के जानकीटोलास्थित नेपाल–भारत सीमा तक नहर मे पानी आइल बा, भारतीय पक्ष असाढ १४ सँझिया तक नेपाल ओरी नहर मे पानी देवेके सम्भावना बा ।’
अभी नहर मे शून्य आरडी तक करिब ४ सय क्युसेक पानी उपलब्ध रहल आ सुरु मे ओतना पानी पर्याप्त होखेके साह बतवनी । किसान धिरे धिरे रोपाइँ के क्रम बढईला के बाद उहे मुताविक पानी के जरुरत भी बढत जाएके आ भारतीय पक्ष पानी के परिमाण भी बढईला पर लेजाएके विश्वास बा ।
भारत सँगे के गण्डक सम्झौता मुताविक, हरेक बरीस धानबाली के खातिर असाढ १५ आ गहुँबाली के खातिर पुस १० से नहर मे ८ सय ५० क्युसेक पानी भारतीय पक्ष से देवेके पडि । नवलपरासी के भैंसालोटन स्थित नेपाल–भारत सीमा मे निर्मित व्यारेज से भारतीय पक्ष नहर मे पानी छोडेला । भारत मे ९२ किमि यात्रा करके ई नहर पर्सा के जगरनाथपुर गाँवपालिका के जानकीटोल से नेपाल मे प्रवेश करेला । पर्सा, बारा आ रौतहट मे करके १५ ब्लक मे विभाजित गण्डक नहर के लम्बाई नेपाल ओरी ८१ किमि रहल बा । गण्डक व्यारेज के निर्माण भारत खुदे कईल आ संचालन भी भारतीय पक्ष खुदे करी । उ व्यारेज से नेपाल से भारतीय भूमि मे बेसी पानी लेजाएवाला किसिम से नहर के संरचना निर्माण कईले बा ।
सन् १९७५ आ ७६ मे दु चरण मे भारत सरकार नेपाल सरकार के गण्डक नहर हस्तान्तरण कईले रहे । गण्डक नहर से पर्सा, बारा आ रौतहट करके तीन गो जिल्ला मे करके ३७ हजार ४ सय हेक्टर जमिन सिंचित करेके लक्ष्य भईला पर भी हरेक बरीस कउनो ना कउनो समस्या देखावत भारत नेपाल के सम्झौता मुताविक ८ सय ५० क्युसेक पानी ना देरहल बा । उल्था ईकान्तिपुर

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