उजालों का वो सपना नहीं छोड़ा
उजालों का वो सपना नहीं छोड़ा

परिचय दास
राह में टूटा जो मैं तो खुद को नहीं छोड़ा,
सुनो ऐ हौसलो, मैंने तेरा दामन नहीं छोड़ा।।
कई तूफ़ान आए, नाव मेरी डगमगाती थी,
मगर मैंने भरोसे का कभी तिनका नहीं छोड़ा।।
अँधेरों ने कहा अब लौट जा, थक जाएगा तू,
मगर मैंने उजालों का वो सपना नहीं छोड़ा।।
हर इक ज़ख़्म ने मुझे मज़बूत ही बनाया,
मगर खुद पर यक़ीं मैंने कभी पूरा नहीं छोड़ा।।
जो अपने थे वही अक्सर बदलते ही चले आए,
मगर मैंने कभी इंसान का रिश्ता नहीं छोड़ा।।
कभी हालात ने मुझसे निवाला छीन डाला था,
मगर मेहनत का मैंने अपना रस्ता नहीं छोड़ा।।
कई आवाज़ें आईं, छोड़ दे ये राह झंझट है,
मगर दिल ने जो जाना, वो संभावना नहीं छोड़ा।।
मैं टूटा भी, झुका भी पर बिखर कर रह नहीं पाया,
मगर खुद को खुद के साथ रखने का जज़्बा नहीं छोड़ा।।
अकेलेपन को मुझसे बहुत कुछ माँग लेना था,
मगर मैंने खुद से बात करने का तरीक़ा नहीं छोड़ा।।
जो पाया है उसी में शुक्र करना सीखता आया,
मैंने उससे आगे बढ़ने का इरादा नहीं छोड़ा।।
हर मुश्किल ने मुझको और भी मज़बूत ही बनाया,
मगर वहां भी मैंने मुस्कुराने का सलीका नहीं छोड़ा।।
गिरी हर बार उम्मीद, उठकर फिर चला हूँ मैं,
मगर ऐ ज़िंदगी, मैंने तेरा पीछा नहीं छोड़ा।।





