नेपाली भाषा कमजोर ना होखेवाला किसिम से अगाडि बढेके चाहिं :- शिक्षामन्त्री

काठमाण्डु १९ माघ,
शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधिमन्त्री गिरिराजमणि पोखरेल नेपाली भाषा के कमजोर बनावेवाला किसिम से अङ्ग्रेजी भाषा के प्रयोग मे जोड देवेके ना चाहिं कहके बतवले बानी ।
विश्व निकेतन माध्यमिक विद्यालय काठमाण्डु के ७४ वाँ वार्षिकोत्सव समारोह मे बोलत उ दक्षिण एशिया के पुराना भाषा के रुप मे रहल नेपाली भाषा के बरियार बनावत अङ्ग्रेजी भाषा के प्रयोग मे जोड देवेके बतवनी ।
“अङ्ग्रेजी मात्र ना, चिनियाँ लगायत के आउर भाषा के सिकाइ आ प्रयोग करत जाएके चाहिं”, कहत उ, “अङ्ग्रेजी भाषा के प्रयोग बढत गईला पर नेपाली भाषा कमजोर बनत जाएके सम्भावना बढल बा ।”
मन्त्री पोखरेल शिक्षा से देश के समग्र विकास के खाका तइयार करेके बतावत शिक्षा क्षेत्र के विकास बिना सरकार अगाडि बढावल ‘समृद्ध नेपाल सुखी नेपाली’ के नारा से सार्थकता मिले ना सकेके बतवनी ।
उ नयाँ–नयाँ प्रविधि के उपयोग करे ना सकला पर देश विकास मे फड्को मारे ना सकेके बतावत राज्य से प्रविधिमैत्री शिक्षा मे जोड देहल बतवनी ।
“पहिले÷पहिले शिक्षक रआ पुस्तक के ज्ञान के केन्द्र मानल जात रहे” कहत उ, “प्रविधि के विकास सँगे अभी के विद्यार्थी से इन्टरनेट के प्रयोग से खुदे भी बेसी सिखे लागल बाडन ।”
उ शिक्षा के उत्पादनशील, सभ्य आ सुसंस्कृत बनावे खातिर विद्यालय के सबल बनावे के बतवनी । सामुदायिक विद्यालय मे सिकाइ केन्द्रीत सुधार के जरुरत रहला मे जोड देहनी ।
मन्त्री पोखरेल काठमाण्डु उपत्यका मे दश प्रतिशत सामुदायिक आ ९० प्रतिशत निजी विद्यालय रहल जानकारी देत सामुदायिक विद्यालय से निजी विद्यालय के पछाडि पारेके बतवनी ।
“अधिकांश सामुदायिक विद्यालय भौतिकरुप मे सबल बा” कहत उ “माकिर शैक्षिक गुणस्तर वृद्धि करे सकल नइखन ।” उ गणित आ विज्ञान के नजिता सन्तोषजनक आवे ना सकल बतावत सरकार विज्ञान विषय सञ्चालन के खातिर पर्याप्त बजेट विनियोजन करे लागल जानकारी देहनी ।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक हेरम्बराज कँडेल विश्व निकेतन मे अध्ययन कईल विद्यार्थी राष्ट्रियस्तर मे प्रतिष्ठित बनल बतवनी । उ कम्प्युटर के अतिरिक्त विषय के रुप मे अध्ययन करावे मे ई विद्यालय नेपाल के पहिलका भईल दाबी कईनी ।






