पर्सा के ग्रामिण क्षेत्र मे धान रोपाई धमाधम हो रहल, खाद के हाहाकार

मेघराज राय

जीराभवानी ०३ असाढ

सामान्य अवस्था मे जीराभवानी गाँवपालिका १ के धर्मराज राय भारत मे मजदुरी करत रहलन । तलब बुझ के घर पईसा पठावत रहलन ।

घर के बुढ आ जनानी खेती किसानी करत आईल बाडन । उ महिनो दिन लगाके रोपाई करत रहलन ।

माकिर सपरिवार रोपाई मे लागला पर धान रोपाई करेवाला दिन कम भईल राय बतवनी । ई समय अवस्था बदलल बा । धर्मराज के मात्र ना ।

रोजगारी के खातिर भारत पलायन यूवा घर फिर्ता भईला के बाद महिनो दिन लागेवाला धान रोपाई मे समस्या दु हप्ता मे पुर्ण बिराम लागेके देखल गईल बा । भारत से फिर्ता भईल युवा मे धान रोपाई धमाधम कर रहल स्थानीय शिक्षक रामप्रीत महतो बतवनी ।

‘महिना दिन लागेवाला रोपाई दु हप्ता मे ओराई,’ कहत उ, ‘बैदेशिक रोजगारी के खातिर गईल यूवा कृषि कर्म मे फिर्ता भईल बाडन ।

एकरा से धान के उत्पादन बृद्धि करेके विश्वास कईल बा ।’
रोजागारी के खातिर भारत गईल महादेवपट्टी के सुनील थारु खुसी के बदले आसु लेके फिर्ता भईलन ।

१४ दिन क्वारेन्टिन मे रहलन । कोरोना ना देखला के बाद घर मे आईल उ पुर्खोली पेशा खेती किसानी मे संलग्न बाडन ।

सामान्य अवस्था मे उ घर फिर्ता भईला पर कमाईल पईसा लेके आवत रहलन । माकिर धान रोपाई मे उनकर सहभागिता ना होत रहे ।

भारत मे काम करेवाला यूवा ई समय धान रोपाई मे व्यस्त बाडन । ई समय जहाँतहाँ धान रोपाई के समय के साथे धान रोपाई मे जनशक्ति भी बहुते बाडन ।

‘भारत से आवेवाला आशु लेके आईल रहलन, अभी देश के श्रम के उपहार देहले बाडन’, एक स्थानीय कहनी ।

पर्सा के ग्रामीण क्षेत्र आ मध्य तराई के नगदे बाली उत्पादन अब्बल मानल जगहा ह धान उत्पादन मनग्य होखेला । पिछिलका समय यूवा पुस्ता पलायन भईला सँगे कृषि पेशा मे आर्कषण घटत गईल रहे ।

ई समय कृषि बिकल्प मे आउर पेशा मे छानेके भी कृषि कर्म मे लागल स्थानीय बतावेलन ।

‘पिछिलका बरीस कृषि कर्म हेला भईल रहे’, कहत उ, ‘आउर पेशा से पलायन भईल कृषि कर्म मे वाध्य होके लागल बाडन ।’

पर्सा मे अनदाजी ५० हजार हेक्टर मे धान खेती कईल जाला । अन्नभण्डार के रुप मे परिचित पर्सा के ग्रामिण क्षेत्र देशभर मे परिचित बाडन ।

जिल्ला उत्पादित आधा धान जिल्ला मे खपत भईला पर भी आधा धान बाहरी जिल्ला मे खपत हो रहल रेर्कड मे देखल गईल बा ।

किसान के नइखे मिलत खाद
जीराभवानी १ के किसान प्रभु चौधरी वितल दु हप्ता से धान बाली के खातिर जरुरी युरिया, डिएपी खाद के खोजी मे बाडन ।

डेढ बिगहा धान खेती करे खातिर तत्काल जरुरी रहल एक क्विन्टल डिएपी आ एक क्विन्टल युरीया किने ना मिलल प्रभु चौधरी के सिकाईत बा ।

खेत मे धान रोपाई करे से पहिले हि खाद के ब्यवस्था करे खातिर सोंच भी गाँव से लगभग २५ किलोमिटर पोखरिया मे रहल मल बिक्री करेवाला दोकानसब मे दउडला पर भी खाद सहज रुपमे मिले ना सकल उ बतवनी ।

कउनो दोकान मे युरिया, डिएपी रहला पर भी दोकानदार ओकरा के वास्तविक दाम से हरेक क्विन्टल हजार रोपेया तक थप के महँगा मे बिक्री कईला के बाद खुद सँगे महँगा मे खाद किनेके रोपेया ना रहल सिकाईत कइनी ।

कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड डिएपी प्रति क्विन्टल ४३ सय २०, यूरिया प्रति क्विन्टल १४ सय २० मे किसान के खातिर बिक्री कईला पर भी किसानलोग अभी सहज तरिका से किने ना सकल अवस्था बा ।

जिल्ला मे ५० हजार हेक्टर क्षेत्रफल खेती योग्य जमिन रहल कृषि ज्ञान केन्द्र बीरगंज पर्सा जनवले बा ।

खेती क्षेत्रफल बेसी रहला पर भी सरकार हि जरुरत से कम जिल्ला मे खाद के कोटा कायम कईला के चलते किसानलोग के जरुरी मुताविक के मल के आपूर्ति करे ना सकल कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड बीरगंज पर्सा जनवले बा ।

जिल्ला मे आठ हजार मेट्रिय टन डिएपी, ११ हजार मेट्रिय टन युरिया आ पाँच सय मेट्रिक टन पोटास के खपत करत अईला पर भी सरकार तीन हजार मेट्रिय टन डिएपी, पाँच हजार मेट्रिय टन युरिया आ दु सय मेट्रिक टन पोटास के कोटा मात्र निर्धारण कईला से धान खेती के खातिर खाद के कमी भईल कृषि सामग्री कम्पनी लिमिटेड पर्सा जनवले बा ।

खपत के आधा से कम कोटा निर्धारण करके खाद बिक्री वितरण करे खातिर देहला के बाद किसानलोग जरुरत मुताविक खाद मिले ना सकल बतवनी ।

धान बाली के खातिर अभी पाँच सय टन डिएपी, पाँच सय टन युरिया आ ७० मेट्रिक टन पोटान के जरुरत रहल आ जरुरत मुताविक खाद उपल्बध करावे खातिर उपरला निकाय मे पहल कईल कृषि ज्ञान केन्द्र बीरगंज जनवले बा ।

लकडाउन के चलते भारत से अवैध रूप मे आवेवाला खाद ना अईला के चलते भी धान बाली के खातिर बहुते समस्या खडा भईल बा ।

पहिले कृषि समाग्री कम्पनी लिमिटेड से महँगा मे खाद किने से भी किसानलोग भारत से लियावल अवैध खादसब सस्ता मे किन के खेत मे छिटला से बहुते सहज रहे कहके स्थानिय किसानलोग के कहनाम रहल बा ।

अभी भारत से खाद आवे ना सकेके अवस्था अईला पर सभी किसानलोग कृषि समाग्री कम्पनी लिमिटेड से आयात कईल खाद उपर हि आश्रित रहल बाडन ।

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