सीता–राम वियाह महोत्सव मनावल जा रहल

जनकपुरधाम, ४ पुस
प्राचीन मिथिला के राजधानी जनकपुरधाम मे आजु भगवान् सीता–राम वियाह महोत्सव–२०७७ हर्षोल्लासपूर्वक मनावल जा रहल बा ।
त्रेतायुग मे भगवान् सीताराम के वियाह भईल स्मरण मे मिथिलावासी इहाँ हरेक बरीस वियाह पञ्चमी के दिन प्रतीकात्मक सीता–राम के वियाह महोत्सव मनावत आईल बा ।
त्रेतायुग मे जनकपुरधाम मे राजा जनकद्वारा धनुष उठावेवाला से पुत्री सीता के वियाह प्रस्ताव कईल, अयोध्या के राजकुमार मर्यादा पुरूषोत्तम राम के गुरू विश्वामित्र सँगे जनकपुरधाम आईल आ माता सीता सँगे के वियाह के सेरोफेरो मे केन्द्रित रह के इहाँ वियाह महोत्सव मनावल जाला ।
उहे वियाह प्रसङ्ग के अनेकन पक्षद्वारा सजीव आ मूर्तरूप मे प्रस्तुत कईल महोत्सव के विशेषता मानल गईल बा । भगवान् राम के चरित्र लौकिक आ अलौकिकरूप मे लोकमानस मे अङ्कित बा ।
अलौकिकरूप मे राम के निर्गुण ब्रम्ह एवं सगुण विष्णु मानल गईल बा आ सीता के शक्तिस्वरूपा, बुद्धिरूपा, ब्रम्हमयी आ योगमाया के संज्ञा देहल गईल बा ।
सीता के बेटी–बहिन के रूप मे मानेवाला मिथिलावासी महोत्सव मे देवी–देवता के सहभागिता सशरीर ना भईला पर भी अदृश्यरूप मे उपस्थित होखेके विश्वास से हर्ष आ उल्लास के साथ प्रतिछायाँ जन्ती के आगमन से बियाह तक सहभागी होखेलन ।
मिथिला मे कउनो भी धार्मिक, सांस्कृतिक अनुष्ठान मे सीता–राम के चर्चा जरुरी मानल जाला । ओहिसे भी मिथिला मे हरेक दुलहा के राम आ हरेक दुलही के सीता के रूप मे वियाह करेके चलन बा ।
मैथिल संस्कृति मुताविक वियाह महोत्सव मनावे के क्रम मे राम मन्दिर आ जानकी मन्दिर से राम–सीता के प्रतिमा के विशेष सुसज्जित डोला मे राख के रङ्गभूमि मे लेजाके स्वयम्बर आ परीक्षण विधि भईला के बाद जानकी मन्दिर मे लियाके वियाह संस्कार पुरा कईल जाला ।
उ अवसर मे निकलेवाला भगवान् के डोला शोभायात्रा मे सहभागी होखेवाला महोत्सव दैवी वियाह भईल अनुभव करत खुद के धन्य सम्झेलन ।
महोत्सव मे बिदाइ के क्षण बहुते कारूणिक होखेला । महोत्सव मे सहभागी श्रद्धालुलोग प्रतीकात्मक सीता के आपन बेटी के बिदाइ कईल जईसन रोवेलन । उ दृश्य से सभी के हृदय विदीर्ण होखेला ।
उ समय सखीलोगद्वारा गावेवाला समदाउन गीत से प्रतीकात्मक वियाह वास्तविक वियाह जईसन अनुभूति होखेला । ई महोत्सव से भी मिथिला के प्राचीनस्वरूप आ त्ससबखत के सांस्कृतिक उत्कर्ष के प्रसङ्गसब के प्रस्ट करेला ।
मिथिलावासीद्वारा राम के ज्वाइँ आ भिनाजु के रूप मे श्रद्धा व्यक्त करत प्रतीकात्मक सीता–राम वियाह मे अईसे आशीष देवेलन ।
चलुसखी देव चुमाओन हे
जनक जीके अङ्ना ।
(सखीलोग जनक के आङन जाई, जहाँ राम के चुमाएम)
सीता हि राम के चरित्र के दिगो बनईला के चलते सीता–राम के आदर्श मानव सभ्यता संस्कृति के खातिर अनुुकरणीय मानल गईल बा ।






