निषेधाज्ञा के बीच घरघर मे इद आ अक्षय तृतीया मनावल गईल
वीरगंज ३१ बैशाख
इस्लाम धर्मावलम्वी आपन मुख्य चाड इद–उल–फितर (बोलीचाली मे इद कहेवाला) आ हिन्दू धर्मावलम्बी से अक्षय त्रितीया पर्व आजु शुक के दिने एकसाथ मनावत बाडन । कोभिड–१९ सङ्क्रमण से बँचे खातिर जिल्ला मे जारी निषेधाज्ञा भितर पर्सा के सभी पालिका, बस्ती मे इस्लाम धर्मावलम्बी आ हिन्दूलोग घरपरिवार भितर चाड मना रहल बाडन ।
इस्लाम धर्मावलम्बीलोग आजु आपन आपन घर मे इद के नमाज (प्राथना) अदा (समर्पण) करत पर्व मनईले बाडन । वैशाख–१ गते नयाँ बरीस के दिन ई पालि हिजरी सम्बत के रमजान (रमदान) महिना शुरु भईल रहे । प्रारम्भ के कुछ दिन मस्जिद मे नमाज करत रोजा (व्रत) सुरु कईल इस्लाम धर्मावलम्वी वैशाख–१० एने कोविड–१९ सङ्क्रमण देखाई देवे लागला के बाद रमजान के नमाज (प्रार्थना) अदा (समर्पण) भी घर घर मे भईल रहे ।
हिजरी सम्बत् के रमजान महिना मे दिनभर रोजा (उपवास) करके मस्जिद मे करेवाला नमाज ई पालि जिल्ला के इस्लाम धर्मावलम्बी कोभिड–१९ के माहामारी रोकथाम के खातिर घरघर मे कईले बाडन । रमजान महिना समाप्त होके हिजरी सम्बत् के १० वाँ महिना सब्बाल शुरु भईल दिन इद मनावेके इस्लाम परम्परा बा ।
इस्लाम परम्परा मे रमजान महिना शुरु भईला के बाद दिनभर अन्नजल कुछ ना खाके रोजा (उपवास, व्रत) रहेके आ ब्रह्मचर्य मे रहेके धार्मिक परम्परा बा । हरेक दिन सबेरे ४ः५ बजे से पहिले ‘सेहरी’ (सामूहिक रूप मे खाएवाला सबेरे के खाजा) आ सँझिया ६ः३५ बजे के बाद ‘इफ्तार’ (सँझिया के नमाज के बाद खाएवाला खाना) खाईल जाला । ‘सेहरी’ आ ‘इफ्तार’ तथा दिनभर पाँच बेर अल्लाह (ईश्वर) के पुकारा करेवाला ‘नमाज’ सामूहिक रूप मे करेके एकरा से पहिले के परम्परा भईला पर भी ई पालि फेनु कोभिड–१९ के सन्त्रास से घरघर मे आपन परिवार के सदस्यबीच मात्र रमदान पुरा करके इस्लाम धर्मावलम्वी आजु इद मना रहल बाडन ।
इस्लाम परम्परा मे रमजान महिना भर रोजा आ नमाज करत अन्त्य मे ईद–उल–फित्र पर्व मनावल जाला । रमजान मे आपन आम्दानी के २.०५ प्रतिशत गरीब दुःखी के खातिर इद मनावे खातिर ‘जकात’ छुट्यावे के परम्परा बा । ई पालि ई ‘जकात’ कोरोना रोकथाम कोष मे आउर बेसी मन खोल के जम्मा करे खातिर जिल्ला के इस्लाम धर्मगुरुलोग निहोरा कईल जिल्ला के भङ्गाहा नगरपालिका–४ रामनगर के ८५ बरीस के इस्लाम धर्मावलम्बी हाजी बिहारी अन्सारी बतवनी ।
एहितरे आजु वैशाख शुक्ल त्रितीया के दिन हिन्दू धर्माबलम्बीलोग अक्षय त्रितीया पर्व मनावत बाडन । भुखा आ पियासल बटोही के शीतल मानेवाला जौ आ चना के सतुवा एवम् ठण्डा पानी के सर्बत खियावे के अनेकन जगहा मे परम्परा बा । पर्व के दिन बहुते आदमी के आवतजावत होखेवाला रास्ता मे रहके भुखा आ पियासल बटोही के जौ आ चना के सतुवा, सख्खर आ ठण्डा पानी मे बनावल सर्बत खियावे के हिन्दू परम्परा रहला पर भी अभी निषेधाज्ञा के चलते घरपरिवार भितर हि ई पर्व मनवले बाडन ।
ई पर्व मे गरीब आ कमी भोगी, सहत आईल के सतुवा राखल थैला आ सर्बत राखल घडा सहित दान करेके परम्परा भी रहल याज्ञबल्क्य लक्ष्मीनारायण संस्कृत क्याम्पस (विद्यापीठ) के उपप्राध्यापक ध्रुव राय बतवनी ।
अक्षय त्रितीया पर्व के वर्णन भविष्य पुराण मे उल्लेख रहल बा । भगवान शिव आ देवी पार्वती के वियाह भईल दिन भी मानेवाला ई पर्व मे ब्राह्मण, कूल पुरोहित तथा गरीबलोग के स्वर्ण (सोना), शीतल खाद्य परिकार आ बस्त्र दान कईला पर कभो भण्डार खाली ना होखेके भविष्य पुराण मे उल्लेख रहल मैथिल कर्मकाण्ड के ज्ञाता महेशकुमार झा बतवनी ।
गर्मी मे पसेना बहुते आके देह शिथिल होखेवाला भईला से देह मे चिनी के मात्रा सन्तुलन राखे खातिर सख्खर आ चिनी मे बनावल गईल शीतल सर्वत आ पुष्टिबद्र्धक अन्न जौ के सतुवा के प्रयोग मे अक्षय त्रितीया पर्व जोड देहले बा । सुुख आ समृद्धि के प्रतीक भईला के साथे ई पर्व से स्वास्थ्य सन्देश देवेवाला रहल जनावल गईल बा ।






