वीरगंज भन्सार ६ बरीस से राजश्व संकलन के लक्ष्य पूरा करे ना सकल

वीरगंज ०२ सावन
देश के प्रमुख स्थल नाका मे रहल वीरगंज भन्सार कार्यालय बितल आर्थिक बरीस २०७७÷०७८ मे भी राजश्व संकलन के लक्ष्य पूरा करेमे असफल भईल बा । वीरगंज भन्सार कार्यालय लगातार ६ बरीस से राजश्व विभाग से देहल राजश्व संकलन के लक्ष्यपूरा करेमे असफल होत आईल बा ।
बितल आर्थिक बरीस २०७७÷०७८ मे भन्सार विभाग १ खरब ७० अरब ७६ करोड ५१ लाख ४५ हजार के लक्ष्य देहले रहे । माकिर वीरगंज भन्सार कार्यालय बितल आर्थिक बरीस के लक्ष्य से ७१ करोड ४ लाख ४४ हजार रोपेया कम राजश्व संकलन कईले बा ।
बितल आर्थिक बरीस मे वीरगंज भन्सार लक्ष्य के ९९.६ प्रतिशत मात्र अर्थात १ खरब ७० अरब ५ करोड ४७ लाख १ हजार रोपेया मात्र राजश्व संकलन कईल प्रमुख भन्सार अधिकृत हरिहर पौडेल जानकारी देहनी । पिछिलका आर्थिक बरीस २०७६÷०७७ मे भी वीरगंज भन्सार कार्यालय लक्ष्य के ६६.८९ प्रतिशत मात्र राजश्व संकलन कईले रहे ।
वीरगंज भन्सार कार्यालय आर्थिक बरीस २०७५÷०७६ मे लक्ष्य के ८५.९७ प्रतिशत, आर्थिक बरीस २०७४÷०७५ मे लक्ष्य के ९७.४८ प्रतिशत, आर्थिक बरीस २०७३÷०७४ मे लक्ष्य के ९८ प्रतिशत आ आर्थिक बरीस २०७२÷०७३ मे लक्ष्य के ७७.४२ प्रतिशत मात्र राजश्व संकलन कईले रहे ।
ओकरा से पहिले के आर्थिक बरीस २०७१÷०७२ मे वीरगंज भन्सार कार्यालयल लक्ष्य से बेसी हि अर्थात लक्ष्य के १०५ प्रतिशत राजश्व संकलन करेमे सफल भईल रहे । माकिर ओकरा बाद (आर्थिक बरीस २०७२÷०७३ ) से वीरगंज भन्सार कार्यालय लगातार, भन्सार विभाग से देहल राजश्व संकलन के लक्ष्यपूरा करे ना सकल प्रमुख भन्सार अधिकृत पौडेल बतवनी ।
पिछिलका २ आर्थिक बरीस मे विश्वव्यापी कोभिड महामारी के चलते मालवस्तु के निकासी पैठारी प्रभावित भईला के चलते विभाग से देहल लक्ष्यपूरा होखे ना सकल उ बतवनी । पौडेल कहनी, ‘कोभिड के चलते आर्थिक बरीस २०७६÷०७७ मे लक्ष्य से करिब ३४ प्रतिशत कम राजश्व उठल, बितल आर्थिक बरीस मे लक्ष्य के लगे मात्र पुगल गईल माकिर कम मात्र टार्गेट मिट ना भईल, कोभिड के चलते वितल २ आर्थिक बरीस मे लगातार राजश्व के टार्गेटपूरा होखे नईखे सकल ।
बितल दु आर्थिक बरीस मे भारत तथा तिसरका देश से बेसी राजश्व संकलन होखेवाला नयाँ सवारी गाडी लगायत के मालवस्तु के आयात घटला से ओकर प्रत्यक्ष असर राजश्व असुली मे पडल पौडेल बतवनी ।
६ महिने नाकाबन्दी के असर अभी तक
वीरगंज भन्सार के प्रमुख भन्सार अधिकृत हरिहर पौडेल २०७२ साल मे मधेसी दल के ६ महिना तक चलल नाकाबन्दी के असर वीरगंज भन्सार के राजश्व असुली मे अभी तक भी रहल बतवनी । पिछिलका दु आर्थिक बरीस मे लक्ष्यपूरा होखे ना सकला के मुख्य कारण कोभिड रहे, कहत उ, ‘माकिर ओकरा से पहिले लगातार ४ आर्थिक बरीस मे २०७२ साल के नाकाबन्दी के असर से राजश्व के लक्ष्यपूरा होखे ना सकल, अभी भी उ समय के नाकाबन्दी के असर पर रहल बा ।
२०७२ साल मे मधेसी दल राजनीतिक माग राख के कईल आन्दोलन मे ६ महिना तक वीरगंज रक्सौल नाका के मितेरी पुल मे धर्ना देके नाकाबन्दी कईले रहे । जउना के चलते वीरगंज नाका से मालवस्तु के निकासी पैठारी हि ठप्प भईल रहे । लगातार ६ महिना तक नाकाबन्दी भईला के चलते वीरगंज नाका से आयात निर्यात के कारोबार करत आईल बहुते उद्योगी व्यपारीलोग भैरहवा, विराटनगर लगायत के आउर नाका ओरी विस्थापित भईल रहे ।
उ समय आउर नाका ओरी विस्थापित भईल आयात–निर्यातकर्तासब, नाकाबन्दी खुलला के बाद भी वीरगंज नाका मे ना फिर्ता भईला से ओकर असर वीरगंज भन्सार के राजश्व मे अभी तक भी परप रहल पौडेल बतवनी ।
पौडेल कहनी, ‘नाकाबन्दी के समय इहाँ के बहुते आयातकर्ता आउर नाका मे विस्थापित भईल, बाद मे नाकाबन्दी खुलला के बाद कुछ त फेनु फिर्ता भईल, माकिर अधिकांश आयातकर्ता नाकाबन्दी खुलला के बाद ना फिर्ता भईल, ओकर असर अभी तक भी पर रहल बा ।
वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष सुबोध गुप्ता नाकाबन्दी के चलते दोसर जगहा के नाका मे विस्थापित भईल कुछ अयातकर्ता अभी भी वीरगंज नाका मे फिर्ता ना भईल बात सत्य रहल बतवनी ।
ओकरा चलते भी वीरगंज भन्सार के राजश्व असुली मे अभी तक प्रभाव पर रहल उ बतवनी । माकिर लगातार ६ बरीस से वीरगंज भन्सार के राजश्व असुली के लक्ष्यपूरा होखे ना सकला के मुख्य कारण दोसर भी रहल गुप्ता बतवनी ।
गुप्ता भन्सार विभाग से हरेक बरीस हचुवा के ताल मे वीरगंज भन्सार के राजश्व संकलन के लक्ष्य बढावत अईला के चलते भी कुछ बरीस से लगातार राजश्व असुली के लक्ष्य पुरा करेमे वीरगंज भन्सार असफल होत आईल बतवनी ।
गुप्ता कहनी, ‘हरेक बरीस वीरगंज भन्सार के राजश्व के लक्ष्य हचुवा के ताल मे बढावल जाला माकिर उ मुताबिक के राजश्व संकलन होखेके पुर्व योजना आ तईयारी कुछो ना कईल जाला, ओकर परिमाण कुछ बरीस एने लगतार वीरगंज भन्सार लक्ष्यपूरा करे नईखे सकल ।
कहत उ, ‘जदि वीरगंज नाका के राजश्व असुली बढईला पर सरकार ई क्षेत्र मे उद्योगकलकारखाना थपेके वातावरण मिलावेके पडि, भन्सार के जाचपास के प्रकृया सहज करेके पडि, तबे ई नाका के राजश्व बढी ना त अभी के नियति आवेवाला बरीस मे भी आई । उल्था अन्नपूर्णपोष्ट






