मधेश के उद्योगी व्यवसायी के माग : निजगढ विमानस्थल बनाव, भारत सँगे के व्यापारिक लाभ ली

मधेश के उद्योगी व्यवसायी के माग : निजगढ विमानस्थल बनाव, भारत सँगे के व्यापारिक लाभ ली

काठमाण्डु १६ अगहन

मधेश प्रदेश के उद्योगी व्यवसायीलोग केन्द्र सरकार सँगे रणनीतिक व्यापारीक आ आर्थिक लाभ के बडका कार्जक्रम अगाडि बढावे के माग कईले बाडन ।

शुक के दिने नेपाल आर्थिक पत्रकार संघ (नाफिज) से आयोजना कईल ‘मधेश प्रदेश के औद्योगिक÷व्यावसायिक समस्या विषयक नाफिज सम्वाद’ कार्जक्रम मे बोलत मधेश प्रदेश के उद्योगी व्यवसायीलोग अईसन बिचार रखले बाडन । मधेश के तत्कालीन आ दीर्घकालीन आर्थिक विकास के खातिर केन्द्र सरकार प्राथमिकतासब तय करेके नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ मधेश प्रदेश के अध्यक्ष अशोक टेमानी बतवनी । देश के आर्थिक व्यवस्था के मेरुदण्ड के रुप मे रहल मधेश प्रदेश आ उहाँ के आर्थिक सम्भावना के केन्द्र सरकार अवमूल्ययन कईल कहत उ असन्तुष्टि जनवनी ।

मधेस प्रदेश आ नेपाल भारत सीमा के अर्थ–वाणिज्य के अवस्था, ओकरा से नेपाल से लेवे सकेवाला लाभ आ उद्योगी व्यवसायी से भोग रहल समस्या केन्द्र सरकार के सुनावे खातिर काठमाण्डु आईल उद्योगी व्यवसायीलोग सम्मिलित सम्वाद मे हमनीसब उपेक्षा मे परल उनकर कहनाम बा । देश के अर्थ व्यवस्था चलावेवाला उद्योग आ व्यापार के ‘हब’ रहल मधेस प्रदेश केन्द्र सरकार (काठमाण्डु) के प्राथमिकता मे ना परला पर उद्योग धन्दा, व्यापार आ जनशक्ति पलायन भईल अध्यक्ष टेमानी बतवनी । मधेश के विकास के खातिर दीर्घकालीन बडका परियोजना के रुप मे तत्काल निजगढ विमानस्थल निर्माण करेके, भारत सँगे के व्यापारिक आ दु देश के नाका मे रहल जनशक्ति के लाभ के खातिर कानुन सुधार होखेके उ बतवनी ।

नेपाल भारत भन्सार पूर्वाधार स्तारोन्त्ती, व्यापारिक सहजीकरण के खातिर मधेश मे प्रर्दशनी केन्द्र निर्माण, सिमरा विमानस्थल के सुधार जईसन काम करे खातिर भी उलोग सरकार के ध्यानाकर्षण करवले बाडन ।

‘उद्योगसब पूर्ण क्षमता मे चले सकल नईखे, व्यापार करेवाला पलायन हो रहल बा, काम करेवाला जनशक्ति विदेश चल रहल बाडन,’ अध्यक्ष टेमानी कहनी, ‘अर्थ व्यवस्था के मेरुदण्ड बोर्डर मे बा माकिर, नीति निर्माता काठमाण्डु मे ।’

नेपाल के आर्थिक क्षेत्र के नेपाल–भारत सीमा क्षेत्र से नियन्त्रण कईल माकिर व्यापारी के नेता से राजनीतिक नेतृत्व आ नीति निर्माता से उ ना बुझल अध्यक्ष टेमानी बतवनी ।

मधेश के खास समस्या काथि–काथि बा कहके काठमाण्डु के बुझावे आईल कहत टेमानी कहनी, ‘हमनी नेपाली के रोजगार कईसे देवेके आ अर्थतन्त्र कईसे चलायमान बनावेके कहके बुझावे आईल बानी ।’

सरकार के अवैज्ञानिक कर तथा भन्सार नीति के चलते व्यापारी आ उपभोक्ता दुनु मार मे परल उ बतवनी । अभी सीमा क्षेत्र मे चोरी पैठारी बढला पर औपचारिक रुप मे उद्योग आ व्यवसाय करेवाला गम्भीर समस्या मे परल महासंघ मधेश प्रदेश समिति के निष्कर्ष बा ।

वाणिज्य आ व्यापार के नीतिसब अर्थतन्त्र से झुकाब रहल पडोसी देश से भी उन्नत देशसब युरोप, अमेरिका के उदाहारण से देखला पर समस्या भईल अध्यक्ष टेमानी बतवनी ।

‘नेपाल भारत वाणिज्य व्यापार आ एक दोसर के देश बीच सहकार्य के सम्भावनाबारे काठमाण्डु से सम्भवना ना खोजलख,’ अध्यक्ष टेमानी कहनी, ‘राज्य के साना उद्योग के सहजोग करेके नीति ना भईल दोसर समस्या ह ।’ कच्चा पदार्थ कम मात्रा मे लिअईला पर १५ प्रतिशत आ बहुते मात्रा मे आयात कईला पर १० प्रतिशत पारेके नीति से छोटा उद्योग मारा नीति से मदेश के उद्योग व्यवसाय चौपट भईल उनकर दाबी बा । संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवम् जनकपुर उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष जितेन्द्रकुमार महासेठ मधेश के कृषि, उद्योग, धार्मिक पर्यटन के सम्भावना केन्द्र सरकार के प्राथमिकता मे ना परल बतवनी ।

अभी मधेश प्रदेश आपन आर्थिक क्षमता आ सम्भावना से भी क्यासिनो आ दारु के खातिर प्रख्यात भईल माकिर उ व्यवसाय मे भी सरकार के अवरोध भईल उनकर बुझाइ बा । तराई मे उद्योग धन्दा आ व्यपारसहित कृषि समेत तहसनहस बनल कहत महासेठ कहनी, ‘पत्याई ना पत्याई मधेश के बढिया खेतीयोग्य जमिन भी पारता होखेके अवस्था पैदा होत बा ।’ उद्योग व्यापार आ मधेश के अर्थतन्त्रबारे केन्द्र सरकार के झकझक्यावे खातिर आ अन्तर प्रदेश आर्थिक सम्भावना खोजे खातिर काठमाण्डु आईल समिति सरकार के ध्यानाकर्षण पत्र भी बुझावल जनवले बा ।

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