सर्वोच्च के फैसला से संविधान मजबुत बनल बा : पूर्वराष्ट्रपति यादव

जनकपुरधाम १३ फागुन
पूर्वराष्ट्रपति डा. रामवरण यादव संसद विघटन बदर करेके सर्वाेच्च अदालत के फैसला से संविधान मजबुत बनावल बतवले बाडन । उ लोकतन्त्र रहे तक अब केहु भी ५ बरीस तक संसद भंग करे ना सकेके उनकर कहनाम बा ।
महेन्द्रनारायण निधि के ९९ वाँ जन्मजयन्ती के अवसर मे बियफे के दिने जनकपुरधाम मे आयोजना कईल कार्जक्रम मे डा. यादव सर्वोच्च अदालत के फैसला से लोकतन्त्र मे विश्वास करेवालालोग के खुसी देहल बतवनी ।
‘अदालत के निर्णय एकदमे बढिया भईल बा,’ कहत उ, ‘लोकतन्त्र, गणतन्त्र, संघीयता मे विश्वास करेवालालोग, समावेशिता मे विश्वास करेवाला लोग खुसी भईल बाडन ।’
संसद विघटन भईला के बाद धर्मवादी, क्षेत्रवादी, तानाशाहीवादी जुर्मुराईल स्मरण करत उ, ‘देश मे अब का होखी कहके अन्यौलता छवले रहे । ई सभी अन्यौलता अदालत हटवले बा । अदालत के सम्मान करत नमन करेके चाहत बानी ।’
न्यायालय आ निर्वाचन आयोग सक्षम आ निष्पक्ष ना भईल देश मे लोकतान्त्रिक व्यवस्था ना चलेके कहत डा. यादव अमेरिका मे ट्रम्प तानाशाही भईला पर अदालत आ निर्वाचन आयोग बँचावल उल्लेख कइनी ।
मधेशी दल सरकार मे गईला के बाद संविधान जारी कईल ठीक बुझलें
खुद संविधान जारी कईला पर देश के सभी नागरिक खुसी होखस कहके चाहला पर भी सम्भव ना भईल डा. यादव स्मरण कइनी । ‘मधेशवादी दल छोड के एमाले, कांग्रेस, माओवादी सभी करके ९० प्रतिशत के सहभागिता रहे,’ कहत उ, ‘ओहिसे शिरोधार्य करत अगाडि बढत संविधान जारी कईल गईल ।’
ई संविधान मुताविक भईल निर्वाचन के बाद मधेश के दल से भाग लेहला के बाद खुद ठीके कईल अनुभूति भईल उ बतवनी । ‘मधेशी दल भी सरकार मे गईल । चुनाव भईल आ अगाडि बढ रहल बा’ उ कहनी ।
भारत मे संविधान घोषणा होखे लागला पर भीमराव अम्बेडकर संविधान बढिया आ खराब ना होखेके आ अगुवा ठीक रहला पर संविधान बढिया रास्ता से जाएके कहल स्मरण करत डा. यादव भारत के संविधान १२२ बेर संशोधन भईल आ अमेरिका मे २२ बेर संशोधन भइल उदाहरण देहनी ।
उ आर्थिक अनुशासन कउनो भी दल मे ना भईल बतावत विधान मुताविक पार्टी ना चलेके, नेता, कार्यकर्ता के आचरण ठीक ना भईला पर लोकतन्त्र हिले लागल बतवनी । ‘अभी सभी मे ईहे हालत बा’ कहत डा. यादव, ‘लोकतन्त्र के बारे मे पढी । बुझी आ खुद के लोकतान्त्रिक आचरण मे लेजाई ।’






