नेशनल मेडिकल कलेज सहित २६ गो निजी अस्पताल मे स्वास्थ्य बीमा सेवा बन्द

काठमाण्डु ८ भादो
स्वास्थ्य बीमा अन्तर्गत के स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहल २६ गो निजी स्वास्थ्य संस्था के सूची से हटावल गईल बा । स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के ३२ सावन मे बईठल बईठक से सूची से हटावेके निर्णय कईले बा ।
सरकार के आर्थिक बरीस २०७९÷८० के बजेट के बाद अस्पताल के सम्झौता के अवधि समाप्त होके फेनु नवीकरण ना भईल भा स्वास्थ्य बीमा के सेवा बन्द भईल निजी स्वास्थ्य संस्था आ लम्हर समय तक भी नवीकरण प्रक्रिया मे ना आईल स्वास्थ्य संस्था के सूची से हटावेके निर्णय कईल बीमा बोर्ड जनवले बा ।
सरकार निजी अस्पताल तथा मेडिकल कलेज मे स्वास्थ्य बीमा कार्जक्रम सञ्चालन ना करेके घोषणा कईले रहे । प्रतिनिधिसभा से १३ असाढ मे पास भईल आर्थिक बरीस २०८०÷८१ के बजेट के बुँदा नं. २३८ मे ‘सरकारी, सामुदायिक आ सहकारी अस्पताल से स्वास्थ्य बीमा कार्जक्रम सञ्चालन करेके’ उल्लेख बा । ओकरा सँगे मेडिकल कलेजसब भी खुद से देत आईल सेवा बन्द कईले रहलन । सरकार सरकारी, सामुदायिक आ सहकारी से संचालन भईल अस्पताल मे बीमा मे कार्जक्रम संचालन करेके उल्लेख भईला के बाद बोर्ड निजी अस्पताल के फेनु नवीकरण रोकके सूची से हटावे लागल बा ।
सरकार बजेट वक्तव्य मार्फत निजी आ मेडिकल कलेज से सेवा सञ्चालन करेमे रोक लगईला सँगे निजी अस्पतालसब स्वास्थ्य बीमा कार्जक्रम से हाथ घिंचले बा ।
बोर्ड बीएण्डसी टिचिङ हस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर (बिर्तामोड), लाइफ लाइन अस्पताल (झापा), मेची नेत्रालय (झापा), नोबेल मेडिकल कलेज (विराटनगर), विराट मेडिकल कलेज एण्ड रिसर्च सेन्टर (विराटनगर), चितवन मेडिकल कलेज (भरतपुर), नेशनल मेडिकल कलेज (वीरगंज), शुभस्वस्तिक अस्पताल (बर्दिवास) आ नेपाल आँखा प्रतिष्ठान (भैरहवा) के सेवा सूचि से हटवले बा ।
एहितरे, राप्ती आँखा अस्पताल (दाङ), नेपालगञ्ज मेडिकल कलेज (बाँके), फत्तेवाल आँखा अस्पताल (बाँके), फुलकुमारी मेमोरियल हस्पिटल (सिरहा) आ सगरमाथा चौधरी आँखा अस्पताल (सिरहा), लाल रत्न अस्पताल (कैलाली) लगायत के स्वास्थ्य संस्था के सूचि से हटवले बा ।
बीमा बोर्ड के तथ्यांक मुताविक स्वास्थ्य बीमा के खातिर देशभर ४६४ गो स्वास्थ्य संस्था सूचीकृत बा, जउना मेसे ५२ निजी स्वास्थ्य संस्था रहे आ बीमा कार्जक्रम मे उलोग के योगदान ३० प्रतिशत हाराहारी रहे ।
बीमा बोर्ड के निर्देशक दामोदर बसौला बजेट वक्तव्य भी ऐन जईसन होखेके भईला से अब निजी अस्पताल तथा मेडिकल कलेज से सेवा देवे ना सकेके बतवनी ।
माकिर एकरा से बीमा कार्जक्रम के प्रभावकारीता मे असर परेके उनकर कहनाम बा । ‘सरकार से कईल निर्णय के बोर्ड से कार्यान्वयन करेके पडि’ कहत उ, ‘माकिर हमनी के सभी स्वास्थ्य क्षेत्र पर्याप्त रूप मे सेवा प्रदान करे खातिर सक्षम नईखे । अईसन अवस्था मे निजी क्षेत्र के भी हटईला पर बीमा कार्जक्रम के प्रभाव आउर कमजोर होत जाई ।’ उनका मुताविक अब निजी तथा मेडिकल कलेज के सम्झौता अवधि ओरईला के बाद सूची से हटावत जाईल जाई ।
सरकार के निर्णय से सरकारी संस्था नजिक ना रहल बिमित सेवाग्राही के आउर मार परेके विज्ञ बतावेलन । बीमा बोर्ड के पूर्वअध्यक्ष डा. सेनेन्द्रराज उप्रेती भी लहडबाजी मे लागके निजी अस्पताल से सेवा बन्द करेके ना चाहिं कहके बतवनी ।
सरकारी तथा सामुदायिक अस्पताल मे बिमित दवाई तथा समय मे स्वास्थ्य सेवा ना मिलेके, सेवा प्राप्त करे खातिर लम्हर समय लाइन लागेमे बाध्य होखेके, बीमा कईल आ बीमा ना कईल मरेजी के सेवा मे विभेद होखेके, अस्पताल मे बहुते जईसन दवाई ना मिलला पर निजी फार्मेसी से किनेके जईसन समस्या भोगेके परल बीमाकर्ता के सिकाईत बा ।






