देश के निकास देवे खातिर अगाडि बढेके समय आईल बा : पूर्वराजा शाह

देश के निकास देवे खातिर अगाडि बढेके समय आईल बा : पूर्वराजा शाह

वीरगंज १३ माघ

पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह बढल बेथिति आ अन्यौलता से देश के निकास देवे खातिर अगाडि बढेके समय आईल उदघोष कईले बानी । शनिचर के दिने वीरगंज मे आयोजना कईल स्वागत आ नागरिक अभिनन्दन समारोह के सम्बोधन करत पूर्वराजा शाह घुमाउरो पारा मे अब देश मे फेनु राजतन्त्र के जरुरत रहला उदघोष कईले बाडन ।

देश मे विद्यमान राजनीतिक अन्यौलता आ अस्थितरता उपर लक्षित सम्बोधन मे पूर्वराजा शाह कहनी, ‘२०६५ जेठ २९ मे आपन गरिमापूर्ण राजपाठ से वियुक्त होखेके पडला पर हम उ समय राखल बात राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रियता, प्रजातान्त्रिक प्रतिवद्धता तथा देश आ जनता के उत्थान मे क्रियाशील होखेके भावना के हम अभी सान्दर्भिकरूप मे सम्झ रहल बानी ।’

राजतन्त्र के विदाई के बाद गणतन्त्र स्थापना भईल एनेके पिछिलका १५ बरीस के समय मे जनता मे असन्तोष, चिन्ता आ आक्रोश छताछुल्ल भईल बतवनी । उ कहनी, ‘राजदरबार परित्याग कईला पर २०६५ जेठ २९ गते हि हम कहले रहनी– देश मे रहके नेपाल के बृहत्तर हित आ शान्ति के खातिर योगदान पुगावेके चाहत बानी । स्वाभिमानी नेपाली के समग्र हित होखो कहके कामना बा । हमनी के राष्ट्रप्रेम आ राष्ट्रिय सदाशयता कायम ना रहला पर देश मे विषम परिस्थिति बढत जाई । ओईसन विकृति से आम जनाता मे आक्रोश उत्पन्न होखी कहके उ समय के आँकलन ह । वितल १५ बरीस के बाद आजु उहे असन्तोष, चासो, चिन्ता आ आक्रोश चारुओरी बढल बा । आजु भी हमनीसब देश मे रहके देश के गौरवगाथा गारहल तथा अभी भी देश के उन्नति, सभी देशबासी के विकास होत जाओ कहके भावना हमनीसब मे कायम रहल उ बतवनी । आपन मौलिकता आ पहिचान गुमाके देश के विभाजन के खाडल मे लेजाके देश मे सनातन से रहत आईल सुमधुर सामाजिक सम्बन्ध के बिथोल के देश के भलो ना होखेके उनकर कहनाम रहे । ओहिसे राज्यव्यवस्था, राजनीतिक, अर्थ व्यवस्था आ राजनीतिक दूरावास्था सभी के मूल्यांकन करके उ सभी के सुधार करके सभी के विकास आ सभी समस्या के निकास के रास्ता मे अब अगाडि बढेके समय आईल बतवनी ।

पूर्वराजा शाह राजदरबार हत्यकाण्ड के बाद हम ७ बरीस तक राष्ट्र प्रमुख के हैसियता मे आपन दायित्व निर्वाह कईल जिकिर कईनी । तत्काल के मुस्किल विषम परिस्थिति मे भी देश के आउर बर्बादी ना होखो आ प्रजातन्त्र के मान्यता कायमे राखके हम उ समय राष्ट्रप्रमुख के जिम्मेवारी निभावल उ बतवनी ।

उ कहनी, ‘२०५८ मे घटल विनाशकारी घटना हमनी के परिवार के खातिर कहालाग्दी रहे । माकिर उ समय राजनीतिक जालझेल करके हमनी उपर नेपाली के मन मे अनेक भ्रम आ नकरात्मक भवाना फईलावल गईल । हमनी के परिवार उपर घातक प्रहार भी भईल । माकिर, सत्य हरदम सत्य हि रहेला । असत्य के विजय कभो भी ना होखेला ।’

पिछिलका दु तीन दशक एने अवसर आ रोजगारी के कमी से तराई–मधेस के जनशक्ति कम होत गईल कहत चिन्ता व्यक्त कईनी । उ कहनी, ‘मधेस उजाड बनत जा रहल बा । मरुभूमीकरण ओरी अग्रसर देखल गईल बा । ई गम्भीर बात ह । रोजगारी आ अवसर देवे ना सकला पर हमनी के जमिन, स्रोतसाधन सभी सुकत जनशक्ति कम होत गईल बा । ई दुःख के बात ह । ओकरा खातिर अब सभी सोंचल जाँव, समीक्षा कईल जाँव ।’

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