श्रद्धा भक्तीपूर्वक मधेश मे चईती छठ मनावल गईल
श्रद्धा भक्तीपूर्वक मधेश मे चईती छठ मनावल गईल

वीरगंज १३ चईत
श्रद्धा,भक्ति आ सभी तराई मधेश के साझा सांस्कृतिक धरोहर के रुप मे मनावल जाएवाला चईती छठ पर्व के मुख्य दिन एतवार के दिने छठघाट मे पुगके ब्रतालुलोग डुब रहल सूर्य आ छठी माता के अर्घ देहले बाडन ।
चईत शुक्लपक्ष मे चार दिन तक मनावल जाएवाला चईती छठ पर्व के तिसरका दिन षष्ठी तिथि के छठ के मुख्य दिन मानल जाला । जउना के संझीया घाटे भी कहल जाला । छठ के मुख्य दिन एतवार के सँझिया ब्रतालु जनानी नदी, पोखरी, तलाउ लगायत के जलाशय मे तईयार कईल छठघाट मे पुगके डुब रहल सूर्य आ छठी माता के अर्घ देहल गईल बा ।
वीरगंज के घडीअर्वा पोखरी, रानीघाट के सिर्सिया नदी, नगवा, छपकैया लगायत के जहगा मे रहल छठघाट (जलाशय) सब मे एवतार के सँझिया सूर्य भगवान् आ छठीमाता के अर्घ देवे खातिर ब्रतालुलोग के भीड लागल रहे ।
सूर्य भगवान आ छठी माता के पूजापाठ आ अर्घ देवे खातिर गहुँ भा चाउर के पिसान से ठेकुवा बनावल जाला । एहितरे मरई, गाँजर, हरदी के हरिहर झार, ज्यामिर, नरिवल, समतोला, केरा, सेव, पानी सिंगडा, सुथनी, ऊँख लगायत के फलफूल भी सूर्य भगवान आ छठी माता के अर्घ देहल जाला ।
छठ पर्व के अन्तिम दिन सप्तमी तिथी के दिन सोमार के सबेरे ब्रतालुलोग फेनु छठघाट मे पुगके उग रहल सूर्य आ छठीमाता के अर्घ देहला के बाद छठ पूजा विधिवतरुप मे पुरा होखी । एकरा से पहिले शुक से निर्जला ब्रत लेहल ब्रतालुलोग शनिचर के सँझिया नहाके शुद्ध होके आपन कूल देवता के पूजा कोठरी मे नयाँ चुल्हा बनाके ओमे चाउर आ भेली के खीर रसीआव तथा गहुँ के रोटी प्रसाद के रुप मे पकाके चन्द्रोदय के बाद चन्द्रमा के चढाके पूजापाठ कईले रहलन ।
चईती छठ पर्व शुक से विधिवत रुप मे सुरू भईल बा । चईत शुक्लपक्ष मे चार दिन तक मनावेवाला चईती छठ पर्व के पहिलका दिन के नहाए खाएके दिन भी कहल जाला । चईती छठ के पहिलका दिन शुक के दिने ब्रतालुलोग खोला, नदी, पोखरी आ तलाउ लगायत के जलाशय मे नुहाधोवा के शुद्ध होके साकाहारी खाना खईले रहलन ।
सत्य आ अहिंसा उपर मानव के रुचि बढावेके आ सभी जीव उपर सहानुभूति राखे खातिर अभिप्रेरित करेवाला तराईबासी के महान् चाड छठ कातिक आ चईत मे करके बरीस मे दु बेर मनावल जाला । छठ पर्व मे व्रत कईला पर दुःख आ दरिद्रता से मुक्ति मिली कहके धार्मिक जनविश्वास रहल बा । पिछिलका समय मे छठ मनावेवाला के संख्या भी बढत गईल बा ।






