खतरनाक प्राण घातक बेमारी “केन्सर”

सन्दर्भ ः विश्व केन्सर दिवस
एहतरे बेमारी से डर होखेला ही । बेमारी पकडल अपने मे डरावन, दुःखदायी आ कष्टपूर्ण अवस्था हउवे । जेसे धनजन के क्षती भी हो सकेला ही । बे
छोट बड होला जेमे कउनो सामान्य किसिम के रहेला त कउनो ज्यान लेवेवाला खतरनाक भी होला । अइसन बहुती डरावन आ खतरनाक बेमारी मध्ये मे रहल एगो नाम हउवे “केन्सर” अर्थात “अर्वुदरोग” ।
“केन्सर” के बेमारी अनेकन कारण से लागेला । जेमे धुमम्रपान, मध्यपान सेवन, दुषित वातावरण साथे दुषित भोजन (खानपान) ईत्यादी रहल बा। विशेषतः तम्बाखु, बिंडी, सिगरेट, सूर्ति आदी सूर्तिजन्य पदार्थ के साथे साथ गुटखा, पानपराग, जर्दा लगायत दारु शराब जइसन वस्तु के सेवन से आ ज्यादा मात्रा मे खास मे लाल रंग के आ धुँवा आगी मे सकेंकल आ ज्यादा तेलगर भुजल मास खाएसे, विकिरण भईल तथा व्यवसायीक प्रदुषण भईल जइसन जगह मे रहला से भा ढेर समय बितावेसे भी “केन्सर” (अर्वुदरोग) लागेके ज्यादा सम्भावना रहल बात भी विज्ञजन के कहनाम रहल बा ।
साथे डिब्बा बन्द खाद्य वस्तु जइसन जंकफुड से भी ओइसन खराबी हो सकेला । ओहिसे ओइसन अवस्था ना आवेदेवे आ उक्त बेमारी से बँचे एवं सुरक्षित रहे खातिर उपरोक्त बात उपर ध्यान देत शुद्ध वातावरण मे रहत शुद्ध खानपान (शुद्ध आहार बिहार) मे रहेके चाहीं ।
क) का हउवे कैन्सर ?
विज्ञजन के मुताविक मानव के देहमे करोडौं संख्या मे कोषिका रहेला । जउना मेसे ओइसन कुछ कोषिका मरजाला त कुछ दैनिक नयाँ बनेला । ओइसन दैनिक नयाँ बनेवाला कोषिका (कोष) आदमी के जीनद्धारा नियन्त्रित होखेला । माकिर प्रतिकुल अवस्था मे ओइसन कोशिका के बृद्धि असामान्य होजाला आ जउना कोष धिरे धिरे छोट छोट गुल्ठी (ट्युमर) मे परिणत होखेला । जउना गुल्ठी (ट्युमर) दु किसिम के होला जे एगो शरिर के हानी पहुँचावेला त दोसर ना पहुँचावेला । ओइसन हानी करेवाला “गुल्ठी” (ट्युमर) केही “केन्सर” कहल जाला ।
ख) लक्ष्मण ः
आवाज (स्वर, बोली) मे परिवर्तन होखेके, शरिर मे गुल्ठी गाँठ (गिर्खा) देखल जाएके, देह मे होखेवाला कोठी (तिल) आ मुस के आकार तथा रंग मे बदलाव एवं परिवर्तन होखेके, थकान बेसी लागल महसुस होखेके, लम्बा समय तक घाव ठिक ना होखेके, जनानी जन के महिनावारी के समय मे ज्यादा रक्तश्राव तथा खोंकी लगातार लागते रहत जलदी ठिक ना होखेके लगायत जइसन लक्षण होखेके बात रहल विज्ञजन के कहनाम बा ।
ग) देखे, सुने आ विज्ञजन के कहनाम मुताविक “केन्सर” रोग बाल–बृद्ध–युवा (लईका–बुढ पुरनिया–जवान) कउनो भी उमर के व्यक्तिजन के हो सकेला । केन्सर के बेमारी लागे के मुख्य कारण मे धुम्रपान एवं मध्इपान ही रहल बा । माकिर विभिन्न अन्य कारण से भी होला आ जे सुरु मे बिना लक्षण भी अचानक देखाई परेला अइसन विज्ञजन के कहनाम बा ।
साधारणतः “केन्सर” ः अधिकतर मुह, फेंफडा, अँतडी, जनानी के स्तन मे, बच्चादानी तथा बच्चादानी के मुह के केन्सर, रक्त केन्सर (बोनम्यारो) ल्युकेमिया आ साथे करेजी (कलेजा), नाक, कान, घेंट लगायत के अंग मे भी केन्सर होखेला ।
विभिन्न संचार माध्यम से जानकारी होखेमे आवे मुताविक विश्व मे सालो साल एक करोड से ज्यादा केन्सर रोग के बेमारी के संख्या मे बृद्धि होते जा रहल बा । साथे मृत्युहोखेवाला के संख्या करिबन करोड के हराहारी संख्या रहेला । जेसे विश्व मे केन्सर के रोगी के संख्या मे हरसाल बढते गईल बात प्रष्ट होला ।
पिछलका प्रकाशित जानकारी आ विज्ञलोग के कहनाम एवं अनुमान मुताविक वार्षिक किरबन ५० हजार के संख्या मे नेपाल मे केन्सर रोगी थपात जाएके बात रहल बा, माकिर जेकर कउनो आधिकारिक तथ्यांक ना रहल बा । साथे विज्ञजन के कहनाम आ देश के विभिन्न केन्सर अस्पताल के तथ्यांक मुताविक करिब वार्षिक ९ हजार के संख्या मे केन्सर के नयाँ रोगी पत्ता लागेके बात रहल प्रकाशित संचार माध्इम से जानकारी होखेमे आवेला ।
प्रकाशित तथ्यांक मुताविक धुम्रपान आ सुर्तिजन्य पदार्थ के सेवन से दुर रहला से अर्थात ओइसन वस्तु त्याग कईला पर ३० प्रतशित केन्सर से होखेवाला मृत्यु के रोकल जा सकेला आ ४५ प्रतशित रोकथाम होसकेला । साथे समय मे ही रोग लागल जानकारी भईला पर आ रोगी उपचार मे गईला पर एक तिहाई “केन्सर” उपचार से ठिक होसकेके तथा ओइसन केन्सर पिडित के जीवन आरामदायी एवं लम्बा बन सकेके बात भी विज्ञजन के कहनाम रहल बा ।
माकिर एह खातिर केन्सर पिडित लगायत समाज के सम्पूर्ण वर्गद्धारा जनचेतना कार्ज क्रम सहित सतकर्ता आ एकर नियन्त्रण के प्रभावकारी उपाय अपनावल आ से कार्जमे सहजोग जरुरी रहल बा ।
घ) रोकथाम के उपाय ः
धुम्रपान, मध्यपान एवं सुर्तिजन्य पदार्थ त्याग, खानपान एवं आहारविहार तथा जीवन शैलि मे परिवर्तन, शारिरिक व्याम, स्वच्छ वातावरण, फास्टफुड आ ईनर्जि ड्रिंक्स त्याग, शारिरिक अंग के सरसफाई तथा समय समय मे जाँच परिक्षण, तेलगर आचर्बियुक्त मास जन्य भोजन कम करेके, ताजा सागसब्जी, फलफुल तथा ताजा स्वच्छ भोजन करेके चाहिं । जेसे केन्सर रोग लागेसे बँचल जा सकेला ।
अतः उपारोक्त बात उपर मनन करत “केन्सर” के बेमारी लागेसे बाँचल आ बँचावल जाँव । “विश्व केन्सर दिवस” मनावे के खास उदेश्य भी इहे ओइसन उपरोक्त बातसब रहल मिलेला । “सर्वेभवन्तु सुखिन” ।।
– मुर्लीबगैचा–१२, वीरगंज







