खानेपानी आयोजना के अनुमतिपत्र मे आयोजना मुताविक समय तोकेके पडि’

काठमाण्डु ३० फागुन,

सरकार खानेपानी आयोजना सञ्चालन के खातिर अनुमतिपत्र देहला पर बडका आयोजना के बेसी आ छोटा आयोजना के कम समय तोकेके बात मे जोड देहल गईल बा ।

प्रतिनिधिसभा, विकास तथा प्रविधि समिति मे दफावार छलफल के समय मे रहल ‘खानेपानी तथा सरसफाइ सम्बन्ध मे व्यवस्थापन करे खातिर बनल विधेयक, २०७६’ सम्बन्ध मे दफावार छलफल मे सांसदलोग सकेभर अनुमतिपत्र देवेमे देरी करेके ना होखी कहके बतवले बानी ।

खानेपानी तथा सरसफाइ मन्त्रालय अनुमतिपत्र देवेके समय १२० दिन तोकेके प्रस्ताव कईला मे समिति के सदस्य एकरा के घटावे के बात मे जोड देहले बानी । उलोग अनुमतिपत्र देवेके समयावधी नियमावली मे तोकेवाला किसिम से जाए से ऐन मे हि स्प्रष्ट करेके बात मे जोड देहले बानी ।

समिति के सदस्य खगराज अधिकारी बडका आ छोटा आयोजना के अनुमतिपत्र देवे खातिर बराबर समय ना लागेवाला भईला से फरकफरक समय तोकेके बतवनी । मन्त्रालय से प्रस्ताव कईल १२० दिन लम्हर समय भईल उनकर कहनाम बा । सरकार बिजुली भा आउर पूर्वाधार मे अनुदान देहला सँगे खानेपानी मे भी अनुदान के व्यवस्था होखेके उ बतवनी । उ कहनी कि, “घँटी भिजावे के बात सबसे बेसी महत्वपूर्ण भईला से एमे भी अनुदान जरुरी बा ।”

समिति के सदस्य सञ्जयकुमार गौतम कानून बनईला पर दूरदृष्टि राखेके बात मे जोड देहनी । “कानून बनईला पर उ व्यावहारिक बा कि नइखे कहके विचार करेके आ ओकरा के कार्यान्वयन कईल जा सकता भा ना कहके बात मे भी ध्यान देहल जरुरी बा”, कहत उ, “अभी बनल नयाँ कानून छोट समय मे हि संशोधन होखेके देखल गईल बा ।”

समिति के दोसर सदस्य गणेशकुमार पहाडी विधेयक मे तोकल गईल मुताविक कहके अधिकार सभी सरकार के हि देवेके ना होखी कहके बतवनी । कानून बनावे के अधिकार संसद् के भईल आ जनता से भी संस्द से हि बनावे के कहके चाहल उनकर कहनाम बा । उ कहनी कि, “सभी बात नियमावली मे तोकला से भी ऐन मे हि स्पष्ट कईल जरुरी बा ।”

समिति के सदस्य रङ्गमती शाही खानेपानी के स्रोत मे बहुते विवाद रहल बतवनी । बहुते जनता से खानेपानी के स्रोत निजी जमिन मे भईला से समय समय मे विवाद आरहल उनकर कहनाम बा ।

सांसद डा विन्दा पाण्डे कउनो भी संस्था से निवेदन देवेसे पहिले हि स्रोत के बारे मे अध्ययन करेके बतवनी । पहिले हि अध्ययन भईला के बाद अनुमतिपत्र के खातिर ३० दिन पर्याप्त होखेके उनकर कहनाम बा ।

समिति के सभापति कल्याणीकुमारी खड्का सकेभर जलदी अनुमतिपत्र देवेके व्यवस्था मिलावे के बात मे जोड देहनी । ऐन मे तोकल मुताविक कहके नियमावली मे तोके से भी ऐन मे हि तोक के गईला पर ठीक होखेके उनकर कहनाम बा । उ कहनी कि, “बरु ई विषय मे आउर छलफल कईल जा सकता ।”

खानेपानी मन्त्रालय के सचिव माधव बेल्वासे आयोजना के अनुमति देवे से पहिले सरकार उहाँ खानेपानी स्रोत के बारे मे विस्तृत अध्ययन करेवाला भईला से एक महिना पर्याप्त ना होखेके बतवनी ।

अतक जलस्रोत के खातिर अनुमतिपत्र जरुरी भईला पर भी खानेपानी के खातिर नयाँ भईला से मन्त्रालय अनुमान के भर मे १२० दिन प्रस्ताव कईल उ जानकारी करवनी । ऐन मे कि नियमावली मे तोकेवाला किसिम से जाए सकेके उनकर सुझाव बा ।

उ कहनी कि, “जदी ई ऐन मे हि तोकेके पडि आ ९० दिन कईला पर उपयुक्त हो सकता ।” नेपाल मे एकरा से पहिले खानेपानी सम्बन्धी कानून ना भईला से भी ई ऐन के महत्वपूर्ण मानल गईल बा ।

संविधान से खानेपानी के सरकार के साझा अधिकार के क्षेत्र मे राखला से ऐन से खानेपानी मे कउन सरकार के अधिकार का ह आ अधिकार का बा कहके उ स्प्रष्ट करेके विश्वास कईल बा ।

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