सीमा क्षेत्र मे रुकल नेपाली के भारत मे व्यवस्थापन

काठमाण्डु १९ चईत,
लकडाउन के चलते सीमापारी रुकल नेपाली नागरिक के भारतीय क्षेत्र मे हि व्यवस्थापन भईल सरकार बतवले बा ।
नेपाल आ भारतबीच सीमा बन्द के बाद सीमाक्षेत्र मे पुगल नागरिक के जउन देश मे बाडन उहें देश के सरकार व्यवस्थापन करेके सहमति मंगर के दिने भईल रहे ।
उ सहमति के बाद सुनौली नाका मे रुकललोग के भारत के नौतनवास्थित क्वारेन्टाइन आ दार्चुला मे रुकल के भारत के धार्चुलास्थित क्वारेन्टाइन मे राखल बा । सीमा क्षेत्र मे अलपत्र नागरिक के बारे मे सम्बन्धित जिल्ला के प्रमुख जिल्ला अधिकारीलोग जानकारी लेहले बाडन ।
दार्चुला के सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी टेकसिंह कुँवर सीमा मे अलपत्र परल नेपाली के अभी भारत के अनेकन पाँच गो क्याम्प मे राखल जानकारी देहनी ।
‘अभी उलोग के बसोबास के बढिया व्यवस्था बा, अनेकन संघसंस्था के सहजोग मे खाना के व्यवस्था भी भईल बा’ कहके बतवनी । उहाँ के नेपाली के बारे मे टेलिफुन मे हि जानकारी लेरहल सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी कुँवर जानकारी देहनी ।
सीमाना बन्द के चलते नेपाल मे रुकल भारतीय नागरिक मेसे भैरहवा मे १५१ जने के नेपाल व्यवस्थापन कर रहल आ रौतहट मे ६० जने रहल प्रधानमन्त्री के परराष्ट्र सल्लाहकार राजन भट्टराई बतवनी ।
इ संख्या बढत गईला पर जउन देश के नागरिक जहाँ बाडन विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रोटोकल के ध्यान देके सम्बन्धित देश आपन नागरिक सरह व्यवहार करेके सहमति भईल उ बतवनी । एहितरे विश्वव्यापी महामारीविरुद्ध लडाइ चल रहल समय नेपाल आ भारत के सिमाना बन्द कइल भट्टराई बतवनी ।
शुरु मे वुहान से कुछ नेपाली लिअईला पर भी अभी विदेश मे रहल लाखो लाख नेपाली नागरिक के उद्दार करके लियावे के अवस्था ना रहल सरकार जनवले बा ।
जे जहाँ बा उहें सुरक्षित रहेके आ ई समस्या नेपाल के मात्र ना भईल सरकार के कहनाम बा । डा.भट्टराई कहनी कि ‘कुछ आदमी एकपक्षीय रुप मे हमनी के नागरिक काहे ना लिअईलन कहके कहत आईल बाडन आ उलोग हि काल्हु काहे उडान आ सीमा बन्द ना करके आवे देहल कहत रहलन ।
अभि भारत से सहमति होके हमनी के नागरिक जहाँ बाडन उहाँ समान व्यवहार करेके आ हमनी भी इहाँ भारतीय के व्यवस्था करेके सहमति भईल बा । एकरा के अन्यथा ना लेहल जाँव ।’
भारतमात्र ना खाडी, मलेसिया लगायत के देश से लाखों नेपाली फिर्ता होखेके चाहला पर भी लियावल सम्भव ना रहला से सम्बन्धित देश मे रहल नेपाली नियोगसब मार्फत उलोग के समस्या सम्बोधन करे खातिर परराष्ट्र मन्त्रालय पत्राचार कईले बा ।






