समत के विटोर भुलारहल

प्रभु यादव

बारा १३ फागुन

माघ के वसन्त पञ्चमी से फागुन के पुर्णिमा तक समत के विटोर कईल जात रहल हवे जवन भुलारहल बा ।

गाँव के हट के रास्ता के नजदिक वंसतपञ्चमी के दिन बाँस के धाजा मे पुअरा के होलिका बना के गाडल जात रहल हवे जवन जगह मे फागुन के पुर्णिमा के दिन समत फुकाए से पहिले तक बिटोर कईल जात रहल रहे । अब कवनो कवनो गाव मे देखल जारहल बा जवना से बुझा रहल बा कि समत के महत्व समाज मे ओरारहल जाता बा कलैया उपमहानगरपालिका वडा नम्वर २ के यादवलाल साह जनकारी करावले बानी ।

पहिले के समय मे वसन्त पञ्चमी के समत के बास हलावला पर से गाँव गाँव के लईका सब खर, गाछ के पाता, सुखल बाँस के पाता उख के पगार लेयाके जमा कर के सभे से अधिक बडका बडका बना के समत जरावे के साईत मे जरावल जात रहल साह जनकारी करावले बानी ।

समत जरावे के दिन किसान सब के खेत मे रहल रहर मसुरी मकई, गेहु, केराव, रहिला, खेसारी लगायत के ठण्डा समय मे होखेवाला तेलहन, दलहन आ एक मुठा बना के समत मे झउसला से घर परिवार आ आपन घर के पशु सब निरोग रही ओकरा खातिर ओरहा बना के समत मे ओरह के घर लिया के राखल जाला भोजपुरी अभियनता आ कवि रामप्रसाद साह जनकारी करावले बानी ।

समत जरावला वाद होली मे रंग गुलाल दुसरका दिन खेलल जाला साह जनकारी करावले बानी । समत के विटोर के काम छुटे के अभि के समय मे आईल मोवाई के कारण लईकन सब ध्यान ना देहला से पुरान संस्कृती लोप होरहल साह जनकारी करावले बानी । सहरी आ अधिक ईलक्ट्रोनिक समान सब प्रयोग मे पहुत भईल जवना जगह समत लोप होचुकल साह जनकारी करावले बानी ।

पहिले समत के बाँस हली ओही दिन से होरी फागुन के गित सुरू होत रहल गाव गाव मे माकिर अब सुनेवाला मोवाई आईल जवन दिन से गित के गवनाई सुनावई समाप्त होरहल नागरिक समाज के अध्यक्ष उमेशलाल दास जनकारी करावले बानी ।

परम्परा से चलत आरहल संस्कृति के जागावे मे स्थानिय सरकार आ पहिलका पुरनिया लोग के बहुते भुमिका लेके करे के चेतना देवे के परि दास बतावत सुझाव देहनी ।

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