आरती साह के मरद मोतीबाबु पकडईलें
आरती साह के मरद मोतीबाबु पकडईलें

जनकपुर ९ पुस,
सर्वोच्च अदालत पुर्पक्ष के खातिर कारागार चलान कईल आरती साह के मरद मोतीबाबु साह सोमार के दिने जनकपुर से पकडाईल बाडन । सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद फरार रहल साह के जनकपुर के सीता चोकस्थित होटल सगुन प्लाजा से पकडल गईल धनुषा के प्रहरी प्रमुख एसपी मित्रबन्धु शर्मा जानकारी देहनी ।
विशेष सूचना के आधार मे साह के धनुषा पुलीस से पकडल एसपी शर्मा बतवनी । ‘मोतीबाबु के हमनी खोजी करत रहनी । कभो भारत मे जाके लुकाएके, कभो नेपाल आवेके सूचना हमनी लग रहे,’ एसपी शर्मा कहनी, ‘उ शुक के दिने भारत से आके जनकपुर के होटल मे रहल जानकारी मिलला के बाद पकडल गईल बा ।’
धनुषा के प्रहरी प्रमुख एसपी शर्मा के मुताविक अदालत से म्याद थपके उनका के अभी धनुषा पुलीस के हिरासत मे राखल जाई । ‘अदालत कउन कारागार मे राखेके कही, ओकरा बाद हमनी उनका के उहाँ पठा देम,’ एसपी शर्मा कहनी ।
जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका वार्ड नम्बर ९ थापा चोक के २२ बरीस के आरती साह के २०८० जेठ ७ गते घर मे रहस्यमय मृत्यु भईल रहे । दहेज के टेंट मे आरती के उनकर मरद मोतीबाबु आ ससुर मदनमोहन साह लगायत घर के आउर सदस्य मिलके यातना देके हत्या कईल आरोप बा ।
धनुषा पुलीस सुरु मे आरती के ‘हत्या’ के आत्महत्या कहत मुद्दा सल्टावेके खोजल । माकिर, आरती के हत्या हि भईल दाबी करत उनकर बाबु विनोद साह, बहिन मनिषा साह आ माई निर्मलादेवी संघर्ष मे उतरेके परल । धनुषा पुलीस अटेरी कईला के बाद आरती के माइती पक्ष न्याय के खातिर काठमाण्डु पुगल बा ।
धनुषा जिल्ला अदालत आरती के मुद्दा मे उनकर मरद मोतीबाबु आ ससुर मदनमोहन साह के पुर्पक्ष के खातिर कारगार पठवले रहे । उच्च अदालत जनकपुर जिल्ला अदालत के निर्णय उल्टावत कुवार १८ गते २०८० मे आरती के मरद मोतीबाबु आ ससुर मदनमोहन के कारागार मुक्त कईले रहे । माकिर सर्वोच्च अदालत उच्च अदालत के फैसला उल्टावत कारागार चलान करे खातिर आदेश देहला के बाद उनका के पकडल गईल बा ।
शुक के दिने जनकपुर के सगुन प्लाजा होटल मे कोठरी बुक कईला पर मोतीबाबु रविकुमार साह नाम के सवारी चालक अनुमति पत्र के कार्ड देहले रहलन ।
जनकपुर के रमण कन्ट्रक्सन मे इञ्जिनियर के काम करेके बतावत मोतीबाबु सगुन प्लाजा होटल मे चार दिन से बईठल रहलन । होटल सगुन प्लाजा के सञ्चालक रुपेश सिंह के मुताविक मोतीबाबु के भेट करे खातिर हरेक दिन आदमी जम्मा होत रहे । ‘अबेर रात तक उनकर आदमीसब के आउजाउ लागत रहे,’ होटल सञ्चालक सिंह कहनी, ‘होटल के मेन गेट लगईला के बाद अबेर रात निहोरा करके खोले लागत रहे । नाम छुपाके बईठल रहलन, हमनी के जानकारी हि ना मिलल ।’





