कलैया में सम्पन्न भोजपुरी कवि गोष्ठी में प्रदेश रत्न कवि शिवनन्दन जयसवाल सम्मानित
कलैया में सम्पन्न भोजपुरी कवि गोष्ठी में प्रदेश रत्न कवि शिवनन्दन जयसवाल सम्मानित

बारा २० अगहन
भोजपुरी भाषा, साहित्य आ संस्कृति के संरक्षण–विकास खातिर समर्पित एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यक्रम २०८२ अगहन १८ गते पर्सा के कलैया में भव्य रुप से सम्पन्न भइल। भोजपुरी कवि गोष्ठी आ सम्मान समारोह के नाम से आयोजित ई कार्यक्रम में देश–विदेश से जुड़ल भोजपुरी प्रेमी, वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार आ सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सहभागी भइलें।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहल रुपन्देही निवासी नवा पीढ़ी के रचनाकार शिवनन्दन जयसवाल के सम्मान, जेकरा के भोजपुरी साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ती, वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल अश्क जी अपन करकमल से सम्मानित कइलें।
सम्मान प्राप्त कइला के बाद जयसवाल कहलन, “हमरा जीवन में ई पल अतुलनीय बा। गोपाल अश्क जी जइसन विद्वान व्यक्तित्व के हाथ से सम्मान मिलल, हमार साहित्यिक यात्रा खातिर प्रेरणाके श्रोत बा। ई सम्मान हमरा में भोजपुरी भाषा आ साहित्य सेवा खातिर अउरी समर्पण पैदा कइले बा।”
कार्यक्रम के सफल आयोजना नेपाल भोजपुरी प्रतिष्ठान, बारा, भोजपुरिया माटी आ कार्यक्रम संयोजक रामप्रसाद साह जी के नेतृत्व में भइल। आयोजक टीम द्वारा साहित्यिक मंचन से लेके अतिथि सत्कार तक सब व्यवस्था अत्यन्त व्यवस्थित रहल।
कार्यक्रम के दौरान गोपाल सेवा समिती, बारा के अध्यक्ष जंग बहादुर यादव जी द्वारा उपस्थित साहित्यकार आ युवा लेखक के मार्गदर्शन देत ओहिजा भोजपुरी सांस्कृतिक चेतना के मजबूती पर जोर देहल गइल। श्री यादव द्वारा शिवनन्दन जयसवाल के मिलल स्नेह आ प्रोत्साहन कार्यक्रम के एक भावनात्मक क्षण बनल।
समारोह में विद्वान साहित्यकार दिनेश गुप्ता, प्रमोद पाण्डेय, हेरम्ब सुरेन्द्र गिरी, पत्रकार, सामाजिक अभियन्ता आ स्थानीय बुद्धिजीवी सभ के उल्लेखनीय उपस्थिति रहल।
संयोजक मंडल द्वारा कार्यक्रम के सञ्चालन के जिम्मेदारी संजु बाबा मोची जी उठवलें, जेकरा से पूरा कार्यक्रम सहज, सरस आ अनुशासित ढंग से आगे बढ़ल। कार्यक्रम के अन्त में जयसवाल देश–विदेश के भोजपुरी प्रेमी, साहित्यकार, गुरुजन आ मित्रगण के प्रति आभार जतावत कहलन,
“रउरा सभे के स्नेह आ आशीर्वाद हमरा लेखन–यात्रा के दिशा देखावत बा। ई सम्मान हमरा में भोजपुरी साहित्य–सेवा के प्रति अउरी प्रतिबद्धता जागृत कइले बा।” समारोह भोजपुरी भाषा, संस्कृति आ साहित्यिक रचनाधर्मिता के संरक्षण–प्रसार के दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज भइल।





