कृषि अनुसंधान निर्देशनालय परवानीपुर में विवाद बढ़ल : कार्यालय प्रमुख यादव पर भेदभाव, अनियमितता आ अकूत संपत्ति जुटावे के आरोप
मजदूरन के मजदूरी में कटौती से लेके भवन निर्माण में सरकारी पैसा के दुरुपयोग तक सवाल | अपना रिश्तेदारन के खास सुविधा देवे के कर्मचारी लोग के दावा

वीरगंज, १६ कातिक
कृषि अनुसंधान निर्देशनालय, परवानीपुर के कार्यालय प्रमुख डा. विश्वेश्वर यादव पर कर्मचारी आ दैनिक मजदूरी करे वाला मजदूरन के संगे भेदभाव, अपना रिश्तेदारन के विशेष सुविधा देवे, भवन निर्माण में अनियमितता करे आ अकूत संपत्ति अर्जित करे के गंभीर आरोप लागल बा। निर्देशनालय में काम करे वाला कर्मचारी आ मजदूर लोग कार्यालय प्रमुख यादव के कार्यशैली पर असंन्तोष जतावत कई तरह के अनियमितता के विषय पर सवाल उठईले बा लोग ।
करीब साढ़े चार बरिस से कार्यालय प्रमुख के जिम्मेदारी संभालत आइल यादव निर्देशनालय के अपना मनमुताबिक चलावत आइल बाड़न, अइसन आरोप कर्मचारी आ मजदूर लोग लगवले बा।
मजदूरन के मजदूरी में कटौती, काम देवे में भी भेदभाव के आरोप
निर्देशनालय में २६ गो मजदूर काम करत बाड़ें, बाकिर सभे के नियमित रूप से काम ना मिलत बा। दैनिक मजदूरी पर निर्भर मजदूर लोग के छुट्टी के दिन काम ना मिलला से आर्थिक परेशानी झेले के पड़त बा।
मजदूरन के कहनाम बा कि दैनिक मजदूरी ७६० रुपिया निर्धारित बा, बाकिर ओह लोग के मात्र ६४० रुपिया भुगतान कइल जाता। एहसे निर्धारित मजदूरी आ वास्तविक भुगतान के बीच के अंतर पर सवाल उठ रहल बा।
एहिजा कार्यालय प्रमुख के अपना रिश्तेदारन के काम में ढील देवे आ तरह-तरह के सुविधा उपलब्ध करावे के आरोप भी लगावल गइल बा।
भांजा के बिना काम कइले वेतन आ सुविधा?
कार्यालय प्रमुख यादव के भांजा बतावल जाए वाला विपिन यादव बिना काम कइले वेतन आ अन्य सुविधा पा रहल बाड़न, अइसन आरोप निर्देशनालय में काम करे वाला कुछ मजदूर लगवले बाड़ें।
मजदूरन के मांग बा कि एह मामला के निष्पक्ष जांच करा के सच्चाई सामने लावल जाव।
एहिजा कार्यालय प्रमुख के खिलाफ आवाज उठावे वाला कर्मचारी के सरुवा करे भा काम से हटावे के आरोप भी लगावल गइल बा। अपना रिश्तेदारन के मुफ्त में बीज उपलब्ध करावे के आरोप भी डा. यादव पर लागल बा।
४२ लाख के स्क्रीन हाउस आ ६० लाख के धान प्रोसेसिंग भवन के उपयोग पर सवाल
निर्देशनालय में सरकारी पैसा से बनल भवन आ अन्य संरचनन के उपयोगिता पर भी गंभीर सवाल उठावल गइल बा।
कर्मचारी लोग के मुताबिक करीब ४२ लाख रुपिया के लागत से बनल स्क्रीन हाउस आ ६० लाख रुपिया खर्च करके बनावल गइल धान प्रोसेसिंग भवन के प्रभावकारी उपयोग नइखे हो रहल।
कृषि अनुसंधान आ उत्पादन बढ़ावे के उद्देश्य से सरकारी रकम खर्च करके बनावल गइल संरचना उपयोगविहीन रहला से सरकारी निवेश के उपलब्धि पर सवाल उठ रहल बा।
हालांकि, निर्माण कार्य में आर्थिक अनियमितता भइल बा कि सरकारी रकम के दुरुपयोग भइल बा, एकर पुष्टि संबंधित कागजात आ प्राविधिक जांच के बादे हो सकेला।
भैंस के चारा से लेके तालिम भवन के दुर्दशा तक
निर्देशनालय परिसर में पालल गइल भैंसन के चारा-पानी के व्यवस्था में भी लापरवाही के आरोप कर्मचारी लोग लगवले बा। ओह लोग के कहनाम बा कि भैंसन खातिर पर्याप्त हरियर घास के व्यवस्था नइखे, जवना चलते खाली पराली के भरोसे पशु के पालन करे के पड़ रहल बा।
एहिजा परिसर में स्थित तालिम भवन के हालत भी दयनीय बतावल जा रहल बा। भवन के चारों ओर झाड़ी उग गइल बा, साफ-सफाई आ मरम्मत पर ध्यान नइखे दिहल जा रहल। भवन तक पहुंचे वाला रास्ता भी जर्जर हालत में बा।
कार्यालय प्रमुख यादव के संपत्ति पर भी उठल सवाल
पर्सा जिला के सखुवा परसौनी गाउँपालिका वार्ड नं. ५ बलुवा के मूल निवासी बतावल जाए वाला डा. यादव इन दिनों भव्य आ आलीशान महल बनवावे में जुटल बाड़न, अइसन दावा कइल गइल बा।
उनका लगे वीरगंज शहर में तीन गो मकान, महुवन में कई जगह जमीन आ काठमाडौं में घडेरी होखे के दावा भी सामने आइल बा।
उनकर पत्नी बबिता देवी के नाम पर संपत्ति रखे आ आम नागरिकन के करोड़ों रुपिया ब्याज पर लगावे के आरोप भी लगावल गइल बा।
हालांकि, एह संपत्ति के वास्तविक मालिकाना हक, खरीद के स्रोत आ वैधानिकता संबंधित अभिलेख आ संपत्ति विवरण से जांच के विषय बा। खाली आरोप के आधार पर गैरकानूनी संपत्ति अर्जित कइला के निष्कर्ष निकालल उचित ना होई।
राजनीतिक पहुँच आ खादा-माला के शौक के भी चर्चा
डा. यादव पर आरोप बा कि ऊ अलग-अलग राष्ट्रीय राजनीतिक दल के साधारण सदस्यता के रसिद अपना लगे रख के चलेलें। सार्वजनिक कार्यक्रम में खादा-माला लेके पहुंचे के आदत भी चर्चा में बा।
बतावल जाता कि काठमाडौं स्थित सिंहदरबार जाए के समय भी ऊ अपना बैग में भर के खादा-माला ले जालें। रास्ता में कवनो वीआईपी मिलला पर गाड़ी से उतर के तुरंते खादा लगावे के आदत के चलते चालक तक परेशान रहे के शिकायत सामने आइल बा।
निष्पक्ष जांच आ जवाबदेही तय करे के मांग
कृषि अनुसंधान निर्देशनालय परवानीपुर में उठल एह आरोपन से सरकारी कार्यालय के व्यवस्थापन, कर्मचारी के अधिकार, सरकारी बजट के उपयोग आ पदाधिकारी के जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा हो गइल बा।
मजदूरन के वास्तविक मजदूरी भुगतान, हाजिरी आ कार्यसम्पादन के अभिलेख, रिश्तेदारन के दिहल गइल सुविधा, भवन निर्माण के लागत आ उपयोगिता, बीज वितरण तथा कार्यालय प्रमुख के संपत्ति विवरण के निष्पक्ष जांच जरूरी देखात बा।
एह पूरा मामला पर कार्यालय प्रमुख डा. विश्वेश्वर यादव के आधिकारिक प्रतिक्रिया आ संबंधित निकाय के जांच निष्कर्ष सार्वजनिक होखल बाकी बा। आरोप प्रमाणित भइला पर कानून के अनुसार कार्रवाई होखे आ आरोप प्रमाणित ना भइला पर सच्चाई जनता के सामने आवे के जरूरत बा। संभार: उल्था हाम्रा कुरा अनलाइन से






