उपसभामुख के राजीनामा केहु भी आपन जरा आ धरातल भुलाएके ना चाहिं डा तुम्वाहाङ्फे काठमाण्डु

६ माघ

उपसभामुख डा शिवमाया तुम्वाहाङ्फे आपन पद से राजीनामा देहल घोषणा कईले बानी । प्रतिनिधिसभा के आजु के बईठक के सम्बोधन करत उ जननिर्वाचित संस्था के लम्हर समय तक अन्योल मे राखेके ना होखी कहके निष्कर्ष के साथ खुद मार्गप्रशस्त कईल स्पष्ट कइनी । एगो अप्रत्याशित आ अस्वाभाविक परिस्थिति के चलते सार्वभौम जननिर्वाचित संस्था लम्हर समय से सभामुखविहीन भईला पर जटिलता पैदा भईला से अइसन स्थिति कायम रहेके ना होखी कहके निष्कर्ष के साथ खुद से राजीनामा करेके निर्णय कईल उ बतवनी । खुद एकरा से पहिले सभामुखविहीन अवस्था लम्हर समय तक ना रहेके चाहिं कहके बेर बेर सम्बन्धित पक्ष के ध्यानाकर्षण करावत आईल उल्लेख करत उ अन्योलपूर्ण अवस्था मे उपसभामुख पद भी खाली करके सदन के नेतृत्वविहीन राखेके उचित ना होखेके मान्यता के आधार मे सभामुख चयन के ठोस आधार सिर्जना भईला के बाद खुद मार्गप्रशस्त करे लागल बा कहनी । उ कहनी कि, “समावेशी लोकतन्त्र हमनी के संवैधानिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण विशेषता ह, संविधान के ई मर्म अक्षर भा वचन से ना, हमनी के अभ्यास आ आचरण से मात्र कार्यान्वयन हो सकता कहके हमरा लागी ।” राज्य के उच्च ओहोदा मे समाज के सभी अङ्ग के प्रतिविम्ब झल्के सकला पर मात्र वास्तविक अर्थ मे लोकतन्त्र सुदृढ होखे सकेके बतावत उ यथार्थ सँगे संविधान निर्माण मे अगुवाइ करेके राजनीतिक दल आ नेतृत्व वर्ग सहमत बानी कहके खुद आशावादी रहल कहनाम रखनी । उपसभामुख कहनी कि, “हमर ई धारणासब कउनो अस्वाभाविक महत्वाकाङ्क्षा भा अनुचित निहोरा से प्रेरित ना रहे कहके बात मे हम दृढ बानी ।” उ लोकतन्त्र आ खुला समाज मे हमनी से करेवाला हरेक निर्णय जनता के सूक्ष्म निगरानी मे रहल बा कहके स्पष्ट करत ओकर औचित्य के परीक्षा भी समय के कसीमा घोटिने बतवनी । उ निर्णय आ सार्वजनिक जवाफदेहिता के बीच मे उचित सामञ्जस्यता होखेके सभी सम्बन्धित पक्ष से ध्यान पुगावे के पडि कहके खुद के लागल बतावत कहनी कि, “दल से सिफारिस भा निर्वाचित होके प्राप्त होखेके जिम्मेवारी भईला पर भी संवैधानिक ओहदा मे बसुञ्जेल सम्बन्धित आदमी दल सँगे के सम्बन्ध से अलग रहल बा । उ ओहोदा मे रहला पर उ दल के निर्देशन मे ना, संवैधानिक आ कानूनी प्रबन्ध मुताविक निर्देशित होके क्रियाशील होखी । हम भी इहे मुताविक इमान्दारी के साथ कर्तव्य पूरा करेके प्रयास कईले बानी ।” उ केहु भी आपन जरा आ धरातल भुलेके ना होखी तथा स्वतन्त्रता के निरपेक्ष रूप मे बुझेके ना चाहिं कहके बात मे भी खुद सचेत रहल स्पष्ट कइनी । उ कहनी कि, “उपसभामुख के रूप मे वितल दु बरीस तक माननीय सदस्य सँगे बितावे मिलल समय हमर जीवन के अविस्मरणीय आ सुखद् अवधि के रूप मे स्मृति मे रही । एगो जनानी, ओकरा उपर भी एकल अवस्था मे रहल आ जनजाति पृष्ठभूमि से आईल हमरा जइसन आदमी जनता के सार्वभौम अधिकार अभ्यास करेके ई सर्वोच्च आ गरिमामय अङ्ग के नेतृत्व करे मिलल अवसर के महत्वपूर्ण अवसर मनले बानी ।” उ ओकर श्रेय हमनी के लोकतान्त्रिक प्रणाली आ राजनीतिक दल के जाएके उल्लेख कइनी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: यो समाग्री सुरक्षित छ ।