पशुपति क्षेत्र मे कईल अतिक्रमण स्वीकार्य नइखे : पर्यटनमन्त्री

काठमाण्डु, १७ सावन
संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयनमन्त्री योगेशकुमार भट्टराई व्यक्तिगत आ व्यापारिक स्वार्थ मे पशुपति उपर हो रहल मानव अतिक्रमण के स्वीकार ना करेके बतवले बानी ।
पशुपति क्षेत्र विकास कोष के स्वामित्व मे रहल गोठाटार स्थित जमिन के सम्बन्ध मे पिछिलका बेर उठ रहल सवाल के सन्दर्भ मे आपन धारणा सार्वजनिक करत उ पशुपति क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा पुरातात्विक पक्ष के संरक्षण आ संवद्र्धन करेके बतवनी ।
कोष के अध्यक्ष भी रहल मन्त्री भट्टराई स्थानीय जात्रा आ पर्व के जगेर्ना करत पशुपति क्षेत्र के सम्पत्ति उपर हो रहल अतिक्रमण के रोकेके बतवनी ।
अतिक्रमण के चपेटा मे पडल कोष के जमिन के सम्बन्ध मे उ कहनी कि, “पशुपति के सम्पति उपर के अतिक्रमण रोके खातिर गुरुयोजना के प्रभावकारी कार्यान्वयन कईल जाई ।”
कोष के उ जमिन वितल समय मे अनेकन मुद्दा मामिला झेलत आईल तथा अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग भी निगरानी कईले बा ।
पिछिलका बेर अख्तियार पशुपति के बृहत्तर हित मे रहेवाला किसिम से पारदर्शी आ प्रतिस्पर्धी तरिका से उपयोग करे खातिर कोष के लिखित निर्देशन देहले बा ।
उहे निर्णय के आधार मे पारदर्शी कार्यविधि बनाके जमिन के माटी आ बालु व्यवस्थापन करके हरेक दिन चोरी निकासी रोकेवाला किसिम से काम अगाडि बढावे के पर्यटनमन्त्री भट्टराई बतवनी ।
पर्यटनमन्त्री भट्टराई गुरुयोजना के अगाडि बढावे के सन्दर्भ मे स्थानीयवासी के सिकाईत भी सम्बोधन करेवाला किसिम से उ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, प्रदेश तथा सङ्घ के सांसद तथा राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के राख के प्रक्रिया अगाडि बढावे के उल्लेख कइनी ।
कोष के जमिन सँगे जुडल स्थानीयवासी के निजी सम्पत्ति भईला पर भी पशुपति के मापदण्ड भितर रहके घर भा सार्वजनिक संरचना बनईला पर पशुपति के सौन्दर्यता, पुरातात्विक महत्व आ ऐतिहासिक सन्दर्भ के असर ना करेवाला किसिम से संरचना बनावेके पर्यटनमन्त्री के कहनाम बा ।
मन्त्री भट्टराई आजु सामाजिक सञ्जाल फेसबुक मे आपन धारणा सार्वजनिक करत कोष के जमिन सम्बन्ध मे सरकार सभी सरोकारपक्ष से छलफल करके सहमति बनावे के उल्लेख कइनी ।
उ कहनी कि, “पशुपति क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा पुरातात्विक पक्ष के संरक्षण आ प्रवद्र्धन करी । स्थानीय जात्रा आ पर्व के जगेर्ना कईल जाई ।
व्यक्तिगत आ व्यापारिक स्वार्थ मे पशुपति उपर हो रहल मानव अतिक्रमण के स्वीकार ना कईल जाई ।” कोष गोठाटारस्थित अतिक्रमण के चपेटा मे पडल जमिन के नयाँ गुरुयोजना बनाके अनेकन पूर्वाधार बनावे के योजना अगाडि बढईला मे स्थानीयवासी विरोध कईले बाडन ।
कोष के स्वामित्व मे काठमाण्डु के गोठाटार मे रहल ५३४ रोपनी जमिन बरीसो से आदमी÷संस्था अतिक्रमण करके घरटहरा निर्माण कईला के बाद कोष उ जमिन के गुरुयोजना के साथ पूर्वाधार विकास करेके योजना अगाडि बढवले बा ।
उ जमिन मे एक सरकारी विद्यालय ३० से बेसी टहरा बनावल गईल बा । गुठी के नाम मे मन्दिर, धर्मशाला निर्माण कईल बा । उहाँ से दैनिक बालु चोरी निकासी हो रहल बा ।
पर्यटनमन्त्री भट्टराई अभी उ क्षेत्र के स्थालगत निरीक्षण करके जमिन के संरक्षण के आ उपयोगी संरचना निर्माण करे खातिर कोष के पदाधिकारी के निर्देश्न देहले रहनी । कोष उ जमिन के गुरुयोजना तइयारी करके स्वीकृति के खातिर पर्यटन मन्त्रालय मे पठवले बा ।
गुरुयोजना अन्तर्गत जमिन मे गौशला निर्माण, अन्तर्राष्ट्रिय सम्मेलन तथा प्रवद्र्धन केन्द्र, पशुपति अध्ययन केन्द्र–प्रतिष्ठान, अस्पताल सहित समावेश बा ।
मन्त्रिपरिषद् से पारित भईला के बाद मात्र कार्यान्वयन के चरण मे जाई ।






