चईती छठ सुरु

वीरगंज २२ चईत
तराई मधेश मे श्रद्धा आ निष्ठापूर्वक मनावल जाएवाला वासन्ती छठ (बोलिचाली मे चईती छठ) पर्व के विधि मंगर से सुरु भईल बा । चईत शुक्ल चतुर्थी (चौथी) से सप्तमी तक चार दिन अनेकन विधिसाथ मनावल जाएवाला पर्व के पहिलका दिन आजु बर्तालु ‘नहाय–खाय’ (पवित्र स्नान करके शुद्ध खाएके) विधि से पर्व सुरु कईले बाडन । पर्व के पहिलका दिन पवित्र स्नान करके व्रत सङ्कल्प करके शुद्ध खाना खाएके चलन बा ।
शरद आ वसन्त ऋतु मे करके बरीस मे दु बेर मनावल जाएवाला छठ सूर्य उपासना के पर्व ह । शरद ऋतु मे कातिक शुक्ल चौथी से सप्तमी तक आ वसन्त ऋतु मे चईत शुक्ल चौथी से सप्तमी तक समान विधि से ई पर्व मनावल जाला ।
पर्व के पहिलका दिन ‘नहाय–खाय’, दुसरका दिन दिनभर उपवास रहके रात के सख्खर मे बनावल खिरमात्र खाके ‘खरना’, “रसियाव रोटी”, तिसरका दिन अर्थात् षष्टि तिथि मे निराहार उपवास रहके सँझिया डुब रहल सूर्य के पवित्र जलाशय के घाट मे कम्मर तक पानी मे जाके अर्घ देहल जाला, जउना के ‘सँझिया के अरघ’ कहल जाला । अन्तिम दिन सप्तमी के दिन सबेरे उग रहल सूर्य के घाट मे अर्घ देके पर्व सम्पन्न कईल जाला । ई विधि के ‘बिहनिया के अरघ’ कहल जाला ।
छठपर्व मे ठेकुवा, भुसुवा (कसार)सहित के मिष्ठान्न परिकार सहित पाकल केरा के घरी आ आउर फलफूल तथा दही सहित के सामान बर्तालु अर्घ के समय सूर्य ओरी देखावेलन । छठ सूर्य आ सूर्यपत्नी षष्टी के उपासना के पर्व ह । ई व्रत के प्रभाव से हरेक मनोकाक्षा पूरा होखेके विश्वास कईल जाला ।
चईती छठ जईसन चईत शुक्ल प्रतिपदा सँगे वासन्ती नवरात्र (चईते दशैँ) भी सुरु भईल बा । चईत शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक वासन्ती नवरात्र मनावल जाला । ई अवसर मे देवीपीठसब मे पूजाआराधना करेवाला श्रद्धालु बढल बाडन ।






