वीरगंज के बाल सुधार गृह से दु जने बालकैदी फरार

वीरगंज १२ कुवार
वीरगंज स्थित बाल सुधारगृह से आजु दु जने बाल कैदीबन्दी भागल बाडन । वीरगंज –४ वीर्तास्थित बालसुधार गृह से शुक के सबेरे करिब २ बजे कर्तव्य ज्यान मुद्दा के सर्लाही निवासी अमरकान्त ठाकुर आ जबर्जस्ती करणी मुद्दा के सप्तरी निवासी पाण्डव यादव छत से कुद के भागल बाडन ।
दुनु अभियुक्त के अदालत दोषी ठहर कईला के बाद आचरण सुधार के खातिर बाल सुधार मे राखल रहे । फरार दुनु जने के खोजी हो रहल पर्सा जिल्ला प्रहरी कार्यालय के प्रवक्ता तथा प्रहरी नायब उपरीक्षक कुमारविक्रम थापा जानकारी देहनी ।
क्षमता से बेसी बाल कैदीबन्दी भईला से मधेस प्रदेश के एकमात्र सुधार मे गृह ई समय समस्या सिर्जना भईल बा । न्यून भौतिक पूर्वाधार, बजेट के कमी, सरकारी उदासिनता आ क्षमता से बेसी लईका आ किशोरलोग कोचके राखेके बाध्यता के चलते सुधारगृह समस्या मे परल बा ।
साठी जने के क्षमता भईल सुधारगृह मे अभी दोब्बर से बेसी एक सय २६ लईका तथा किशोर के कोचके राखला से बालक तथा किशोरलोग मे स्वास्थ्य समस्या सँगे सुधारगृह व्यवस्थापन मे भी कठिनाइ हो रहल उहाँ के प्रमुख टीकाकृष्ण काफ्ले बतवनी ।
जगहा के कमी के चलते उ गृह मे लईकालइकी उकुसमुकुस के साथ दैनिक जिवन बितावेमे बाध्य बाडन । एके कोठरी भितर बहुते जने कोच के रहेके पडला पर स्थ्यलगायत आउर समस्या हो रहल गृह मे रहललोग के सिकाईत रहे । बहुते आदमी कोचाकोच करके रहला पर अक्सिजन के मात्रा घटके कैयन मे गोड फुलेके आ श्वासप्रश्वास के समस्या होखेके गृह मे कार्यरत स्टाफनर्स अंजु कुमारी बतवनी ।
“बेमार होखेवाला के पहिले हमनी गृह भितर ईलाज करेनी”, कहत उ, “समस्या बढत गईला के बाद आउर ईलाज के खातिर नारायणी अस्पताल मे लेजानी । जाडा के मौसम से बेसी गर्मी याम मे स्वास्थ्य मे समस्या बेसी होखेला ।” जगहा कम भईला से गृह मे रहल लईका आ किशोर के चेस, क्यारेमबोर्ड लगायत खेलबाहेक आउर खेल खेलेमे कठिनाइ भईल बा । “हमनी लगे फुटबल, भलिबल लगायत आउर खेलकुद करेके जगहा नईखे, ओहिसे अभी चेस, क्यारेमबोर्ड खेलमात्र हो रहल बा ।” हमनी चाहके भी जगहा ना भईला से लईका आ किशोरलोग के फुटबल, भलिबल खेल नईखी देवे सकत”, स्टाफनर्स अंजु कहनी ।
करिब डेढ के जमिन मे फईलल उ सुधार गृह मे छोटा बडका करके ११ कोठरी बा । छोटा कोठरी मे १२ से १४ आ बडका मे ३१ जने के कोचके राखल बा । कानुनी विवाद मे परके मधेस प्रदेश के पर्सा से सप्तरी तक के अदालत से पुर्पक्ष तथा कैद सजाय के खातिर उ सुधारगृह मे बालक आ किशोरलोग के पठावल गईल बा ।
तत्कालीन अनाथालय भवन के बितल २०७५ साल भादो मे बाल सुधारगृह के रूप मे सञ्चालन कईल रहे । उ गृह मे अभी आश्रित मेसे ४१ जबर्जस्ती करणी के, २० लागुऔषध मुद्दा के, दस सवारी ज्यान मुद्दा के आ सात जने अपहरण तथा शरीर बन्धक मुद्दा के बाडन । आउर चोरी, कर्तव्य ज्यान लगायत मुद्दा के रहल बाडन । कुछ लईकालयकी मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार, खोटा चलन, नेपाली नागरिकता उद्योग आ बालवियाह मुद्दा के भी बाडन । लईकालइकी के मुद्दा अधिकतम एक सय २० दिन मे फैसला करेके व्यवस्था ऐन मे रहला पर भी लम्हर समय तक फैसला ना भईला से सुधार गृह मे क्षमता से बेसी लईका तथा किशोर रहल प्रमुख काफ्ले बतवनी । कुल आश्रित मेसे डेढ दर्जन के मात्र मुद्दा फैसला भईल आ बाँकी पुर्पक्ष मे रहल उनकर कहनाम रहे । काठमाण्डु आ पोखरा मे रहल बाल सुधारगृह मे विद्यालय आ अस्पताल के भी सुविधा भईला परी भी गृह मे ओईसन सुविधा ना भईला से समस्या हो रहल प्रमुख काफ्ले बतवनी ।
सुधारगृह मे रहल लईका आ किशोर के मानसिक आ शैक्षिक विकास के खातिर भितर पुस्तकालय तथा मनोरञ्ज कक्ष समेत सञ्चालन कईल जनईला पर भी झन्झटिलो कानुनी व्यवस्था के चलते गृह सञ्चालन के खातिर बहुते निकाय से समन्वय करेके बाध्यता से आउर समस्या हो रहल प्रमुख काफ्ले के सिकाईत रहे ।
सङ्घीय सरकार मातहत रहल सुधारगृह मे देखल गईल समस्या समधान के खातिर सरकार समय मे ध्यान देवेके वीरगंज के बुद्धिजीवी बेचन साह जोड देहनी । “बाल सुधारगृह अभी यातनागृह जईसन बने लागल बा”, कहत उ, “ई एकदमे दुःखद् बात ह, एकरा के सरकार से गहनरुप मे लेवेके पडि ।”






