नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’ के घोसणा

नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’ के घोसणा

नव नालंदा महाविहार ,नालंदा ( संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ) के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह के उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित ‘बौद्ध संस्कृति संवर्धन पुरस्कार’ से सम्मानित करे के घोसणा भइल बा। ई पुरस्कार उन्हें गणतंत्र दिवस २०२६ के अवसर पर राजभवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के हाथे दिहल जाई।

ई सम्मान बौद्ध संस्कृति आ बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में लमहर समय से कइल गइल महत्त्वपूर्ण आ समर्पित योगदान खातिर दिहल जाला। पुरस्कार के साथे ₹ ५१००० के नकद राशि प्रदान कइल जाई।

प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पालि आ बौद्ध अध्ययन विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक रह चुकल बानी। ऊ २०१८ से २०२२ ले जापान स्थित भारतीय दूतावास, टोक्यो में डायरेक्टर, इंडियन कल्चरल सेंटर के रूप में काम कइनी, जहाँ भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंध आ सॉफ्ट-डिप्लोमेसी के मजबूत करे में उनका उल्लेखनीय भूमिका रहल।

एकरे पहिलहूं प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह के कई गो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुकल बा, जेमे जापान फाउंडेशन फेलोशिप (२००३-०४), फुलब्राइट सीनियर रिसर्च फेलोशिप, अमेरिका (२०११-१२) आ वादरायण व्यास राष्ट्रपति पुरस्कार (२००५) प्रमुख बा।
प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह स्वीडन के उप्साला यूनिवर्सिटी (ICCR चेयर, २०१४-१५), कार्लस्टैड यूनिवर्सिटी आ हैदराबाद विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर रह चुकल बानी। अबले ऊ चार गो महत्त्वपूर्ण किताब लिख चुकल बानी आ हिंदी, अंग्रेज़ी आ जापानी भाषा में ८० से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित कइनी। उनका व्याख्यान भारत के अलावा अमेरिका, जापान, चीन, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम आ नेपाल जइसन कई गो देशन में भइल बा।

उनकर प्रमुख शोध-रुचि में बौद्ध धर्म के अनुप्रयुक्त पक्ष, पालि-संस्कृत साहित्य, भारतीय संस्कृति, विश्व धर्म आ दर्शन आ जापानी बौद्ध परंपरा शामिल बा।

एह सम्मान के घोषणा से नव नालंदा महाविहार आ बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में हर्ष आ गौरव के माहौल बा। ई उपलब्धि नालंदा के बौद्धिक परंपरा के राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अउरी मजबूती आ प्रतिष्ठा देवे वाली मानल जा रहल बा।

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